चाणक्य नीति- शत्रु तक कभी न पहुंचने दें अपनी ये बात वरना...

punjabkesari.in Saturday, Jul 10, 2021 - 03:33 PM (IST)

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
सफलता एक ऐसी चीज है जिसे पाने के लिए हर किसी को मेहनत करनी पड़ती है परंतु कई बार लोग जब खुद सफलता को हासिल नहीं कर पाते तो दूसरों की सफलता से ईर्ष्या करने लगते हैं जो उनकी सफलता में बहुत बड़ी बाधक बनती है। वर्तमान समय की बात करें तो ऐसी स्थिति आजकल हर जगह देखने को मिलती है नौकरी पेशा हो व्यापार हो या कोई और कार्य हर कोई एक दूसरे की सफलता को देखकर ईर्ष्या करता है और सामने वाले को गिराने की कोशिश करता है। तो वहीं कुछ लोग सफल हो जाने पर अपने होश खो बैठते हैं। यानी अपना आपा खो बैठते हैं और इसी वजह से उनकी सफलता असफलता में बदलने लगती है। इस बारे में चाणक्य के नीति सूत्र ने कहा है कि व्यक्ति को अपने जीवन में सफल होने पर भी कभी अपने होश नहीं होने चाहिए। बल्कि सदैव गंभीरता का परिचय देते रहना चाहिए जो व्यक्ति ऐसा नहीं कर पाता है। इसके चलते अपने शत्रु को अपने ऊपर जीतने का अवसर दे देता है।

आइ जानते हैं सफलता से जुड़ी अन्य खास बातें-
आचार्य चाणक्य कहते हैं जो व्यक्ति अति उत्साह में रहता है वह अपने जीवन में हमेशा नुकसान करता है इसलिए कभी भी व्यक्ति को अधिक उत्साह की स्थिति को निर्मित नहीं करना चाहिए बल्कि जितना हो सके गंभीरता रखनी चाहिए।

आचार्य चाणक्य कहते हैं किसी भी कार्य को करने से पहले योजना बनाएं साथ ही साथ ध्यान रखें कि इस योजना को किसी भी व्यक्ति के साथ साझा ना करें जो ऐसा करता है उसे सफलता की जगह सफलता प्राप्त होती है। चाणक्य केअनुसार  शत्रु कभी-कभी आपकी इस आदत से विभिन्न प्रकार के लाभ उठा लेता है जिसके बाद नुकसान आपका ही होता है।

हरिजन एक्ट के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में हमेशा इंकार से दूर रहना चाहिए। जो व्यक्ति अधिकतर अहंकार में रहता है वह समाज में धीरे-धीरे अपने सामान को खो देता है इतना ही नहीं इसके चलते हो अपने जीवन में शत्रुओं की संख्या बना लेता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Jyoti

Related News

Recommended News