भौमवती अमावस्या पर करें पितरों को इस तरह प्रसन्न

7/1/2019 3:13:47 PM

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हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में अमावस्या तिथि आती है और इस बार अमावस्या 2 जुलाई 2019 दिन मंगलवार यानि कि कल पड़ रही है। आषाढ़ माह में पड़ने वाली अमावस्या को आषाढ़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है और यह इस बार मंगलवार को पड़ रही है तो इसे भौमवती अमावस्या कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों की पूजा अर्चना करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिल जाती है और उनका आशीर्वाद मिलता है। इसी कारण इस आषाढ़ अमावस्या को पितृकर्म अमावस्या भी कहा जाता है।
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वैसे तो हर माह की अमावस्या तिथि पितृकर्म के लिए अच्छी होती है, लेकिन भौमवती अमावस्या कुछ विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि आषाढ़ अमावस्या के दिन हमारे पितर अपने परिजनों से अन्न-जल ग्रहण करने आते हैं। इसलिए शास्त्रों में इस दिन स्नान और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। कहते हैं कि इस तिथि पर किसी नदी पर स्नान करने से गौ दान के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन पीपल के पेड़ और भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है।

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 1 जुलाई को मध्यरात्रि रात 3.05 बजे से।
अमावस्या समाप्त: 2 जुलाई को मध्यरात्रि में 00.46 बजे तक। 
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इस दिन पिंडदान आदि करने से पितरों के काम में हुआ दोष दूर हो जाता है। 

अमावस्या के दिन गरीबों, जरूरतमंदों को उनकी जरूरत की वस्तुएं दान करनी चाहिए। इन्हें भोजन करना चाहिए। 

यदि कोई व्यक्ति शनि या मंगल ग्रह से पीड़ित हो तो उसे आषाढ़ अमावस्या के दिन हनुमान मंदिर में चमेली के तेल, सिंदूर और चोला चढ़ाना चाहिए। इस दिन शनि की साढ़ेसाती की शांति के लिए शनि के मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व है। 

मंगलवार को यह विशेष तिथि पड़ रही है तो भगवान हनुमान को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।

इस दिन गाय, कुत्ते, कौए, भिखारी, कोढ़ी आदि को भोजन करवाना चाहिए। 
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अमावस्या के दिन भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने से घर में खुशहाली आती है। 

पितरों के मोक्ष के लिए इस दिन गंगा में उनके नाम की डुबकी लगाकर स्नान करना लाभकारी होता है।


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