Smile please: ये जो है जिंदगी

09/24/2021 10:13:53 AM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

अगर कोई कष्ट आ गया है तो आप गऊ माता की सेवा करना शुरू कर दें, दान-धर्म करें। बूढ़े-बुजुर्गों की सेवा करें, उनको प्रणाम करें। आपकी विघ्न-बाधाएं खत्म हो जाएंगी। —महंत माता वैष्णो देवी दरबार

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भगवान न चेहरा देखते हैं और न ही तुम्हारे कपड़े देखते हैं, वह तो आप के भीतर का प्रेम भाव देखते हैं। शिव भोलेनाथ आशुतोष कहते हैं कि मुझे एक लोटा जल चढ़ा कर मेरे सामने बैठ कर अपना कष्ट तो बता, फिर देख मैं तेरा कष्ट दूर करता हूं कि नहीं। —पं. प्रदीप मिश्रा

प्रात: अपने माता-पिता को प्रणाम करना शुरू कर दो और सबके साथ अच्छा व्यवहार करो। फिर तुम्हें किसी दूसरे के आगे घुटने नहीं टेकने पड़ेंगे। —संत ललितप्रभ

दूसरों को तो हैलो-हैलो बड़े खुश होकर करते हो, कभी अपनी पत्नी से भी सच्चे मन से प्यार करें। उसका आदर-सत्कार करें। दोनों एक-दूसरे को समझने की कोशिश करो। आपका घर भगवान का ठाकुर द्वारा बन जाएगा। भगवान चल कर तुम्हारे पास आएंगे। —रमेश भाई शुक्ला

चिंता रहती है नाविक को तूफान की, कंजूस को मेहमान की, कायर को जान की, अमीर को शान की, वीरों को आन की, कमजोर को बलवान की, मुसाफिर को सामान की, पायलट को उड़ान की, बड़ों को सम्मान की, खिलाड़ी को मैदान की, स्टूडैंट को इम्तिहान की, संत को जहान की और व्यापारी को नुक्सान की।

व्यक्ति को कभी अपने वक्त पर घमंड नहीं करना चाहिए। जिंदगी है साहब, छोड़ कर चली जाएगी मेज पर होगी तस्वीर, कुर्सी खाली रह जाएगी।

मां-बाप के साथ तुम्हारा सलूक एक ऐसी कहानी है जिसे लिखते तो तुम हो लेकिन तुम्हारी औलाद तुम्हें पढ़ कर सुनाती है।

जिन लोगों ने अहंकार किया उन्होंने अपना सब कुछ गंवा दिया, फिर चाहे वह लंकापति रावण हो या आज के समय का कोई भी व्यक्ति। लिहाजा कितने भी बड़े पद पर पहुंच जाएं, हमेशा सभी के साथ प्यार से पेश आएं।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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