उधार ली गई धनराशि का ​उपयोग विकासात्मक गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए: सीएजी

2021-07-30T22:40:20.563

रायपुर, 30 जुलाई (भाषा) भारत ​के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उधार ली गई धनराशि का ​उपयोग पूंजी निर्माण और विकासात्मक गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 31 मार्च 2020 को समाप्त वर्ष के लिए सीएजी से प्राप्त राज्य वित्त पर लेखा परीक्षा प्रतिवेदन पटल पर रखा। बघेल के पास वित्त विभाग की भी जिम्मेदारी है।

प्रतिवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2018-19 की तुलना में वर्ष 2019-20 में ऋण पुनर्भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और कुल ऋण प्राप्तियों में भी वर्ष 2018-19 की तुलना में 5,217.43 करोड़ रुपए (36.31 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 के अंत में राज्य शासन का कुल बकाया ऋण 78,712 करोड़ रुपए था। उधार ली गई धनराशि का उपयोग पूंजी निर्माण और विकासात्मक गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए। वर्तमान व्यय के लिए उधार ली गई धनराशि का उपयोग करना और बकाया ऋण पर ब्याज की अदायगी धारणीय नहीं है।

प्रतिवेदन में कहा गया है कि राज्य शासन ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 2019-20 में अपने राजस्व प्राप्ति में 1.88 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज की। स्वयं के कर राजस्व और करेत्तर राजस्व में 3.22 और तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई तथा बजट अनुमानों में निर्धारित अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सका।
प्रतिवेदन के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2019-20 के दौरान राजस्व व्यय में 14.08 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि के दौरान पूंजीगत व्यय में 3.79 प्रतिशत की कमी आई है।
प्रतिवेदन में अनुशंसा की गई है कि राज्य शासन को वित्त आयोग और राज्य का राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप अपने वित्तीय मापदण्डों में सुधार के लिये अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए विभिन्न उपायों का पता लगाना चाहिए।
पूंजीगत व्यय को बढ़ाने की जरूरत है और उधार ली गई निधि का उपयोग विकास को प्रोत्साहित करने और संपत्ति बनाने के लिए किया जाना चाहिए। शासन को पूंजीगत परियोजनाओं को पूरा करने में देरी के कारणों की समीक्षा और विश्लेषण करना चाहिए और इस संबंध में बाधाओं को दूर करने के लिए शामिल विभागों को सक्षम करने के लिए त्वरित उपाय शुरू करना चाहिए।


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