‘पारदर्शी प्रक्रिया के तहत तय समय में न्याय देना प्राथमिकता : लोकायुक्त’

2021-09-14T20:51:13.427

चंडीग्ढ़, (अविनाश पांडेय): हरियाणा के नवनियुक्त लोकायुक्त सेवानिवृत्त जस्टिस हरिपाल वर्मा का कहना है कि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत तय समय में न्याय देना और पेंडिंग शिकायतों का जल्द निपटारा करना उनकी प्राथमिकता है। खास तौर से पिछले दो महीने में लोकायुक्त नहीं होने के दौरान 100 से ज्यादा पेंडिंग मामलों की सुनवाई शुरू कर दी ग्ई है और जल्द से जल्द इसमें फैसला सुनाया जाएगा। करीब 35 वर्षों तक वकालत और फिर साढ़े छह वर्षों तक पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जज रहे हरिपाल वर्मा मानते हैं कि लोकायुक्त के जरिए प्रदेश की जनता को काफी कुछ न्याय दिया जा सकता है, इसके लिए वह पूरा प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोकायुक्त को पावर देने के सवाल पर जस्टिस वर्मा का कहना है मौजूदा समय में काफी कुछ पावर लोकायुक्त के पास है। काम के दौरान यदि कोई दिक्कत आएगी यानी यदि उनके द्वारा किए गए फैसले प्रभावी नहीं होंगेे तो उस संबंध में सरकार के समक्ष अपनी बात जरूर रखगे। उनका कहना है कि पूर्व के लोकायुक्तों की ओर से जो भी रिकमैंडेशन सरकार को भेजी जाती है, सरकार उसे मानती रही है।

 


‘पंजाब केसरी’ से खास बातचीत में जस्टिस वर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है उसका वह बखूबी निर्वहन करेंगे। पारदर्शी सिस्टम कायम करना उनके एजैंडे में है और लोकायुक्त की छवि बेहतर रखते हुए मैरिट के आधार पर केसों का निपटारा किया जाएगा। हरियाणा के रेवाड़ी निवासी जस्टिस वर्मा ने कालेज की पढ़ाई चंडीगढ़ से पूरी की थी। 1986 से उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। इस दौरान पूर्व की बंसीलाल सरकार में वह डिप्टी एडवोकेट जरनल बनें और साथ ही 1999 से 2004 तक पंजाब यूनिवर्सिटी में गेस्ट फैक्लटी के तौर पर अध्यापन कार्य भी किया। 20 सितम्बर 2014 को वह हाईकोर्ट में जज बनें और 5 अप्रैल 2021 तक न्याय देने का काम किया।  


‘पावर कम हो या ज्यादा, फैसले अहम होंगे’ 
हरियाणा में लोकायुक्त के विधिवत गठन को भले ही 15 वर्ष हो चुके हों, लेकिन अभी तक मध्य प्रदेश, कर्नाटक और केरल सरीखे राज्यों की तर्ज पर उसे पावर नहीं मिल सकी है। खासकर मध्य प्रदेश में पुलिस भी लोकायुक्त के अधीन है और उसे रेड करने की पावर है। ऐसे में पूर्व के सभी लोकायुक्तों की यह चाहत रही है कि यदि मध्य प्रदेश की तरह से उन्हेंं भी रेड करने की पावर मिले तो काफी बेहतर काम किया जा सकता है। यही वजह है कि लोकायुक्त कोर्ट से निस्तारित होने वाले केसों की सफलता सरकार और अफसरों की मर्जी पर ज्यादा निर्भर रहती है। वजह साफ है कि  लोकायुक्त कोर्ट की ओर से किसी भी मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार को संस्तुति दी जाती है, जिसमें कई बार आरोपियों के राजनैतिक संबंधों के कारण मामला अधर में लटक जाता है। हालांकि पिछले तीन लोकायुक्तों ने कम पावर के बाद भी लोकायुक्त कोर्ट को एक अहम दिशा दी है, जिसमें अब नए लोकायुक्त हरिपाल वर्मा भी तैयारी में जुट गए हैं। वर्मा का मानना है कि पावर कम है या ज्यादा, इससे मतलब नहीं, केस के मुताबिक अहम फैसले किए जाएंगे।


‘लोकायुक्त कार्यालय में करीब 1300 केस पेंडिंग’ 
कोविड काल में डेढ़ वर्ष तक सुनवाई बाधित रहने के कारण मौजूदा समय में करीब 1300 केस अभी पेंडिंग हैं। इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें शहरी स्थानीय निकाय, टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग, पंचायत विभाग व पुलिस महकमे की ज्यादा रही हैं। जस्टिस वर्मा ने कहा कि इन केसों को तय समय में निपटाना अहम काम है, जिसकी दिन-प्रतिदिन सुनवाई का काम तेज हो गया है। वहीं लोकायुक्त आफिस में स्टाफ की कमी दूर करने के बारे में उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में लोकायुक्त दफ्तर का क्षेत्र छोटा है, जिसके लिए सरकार से नया आफिस बनाने की डिमांड की जाएगी। हालांकि उन्होंने कहा कि पूर्व के लोकायुक्त की ओर से इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया था, जिसमें जल्द ही एक ज्वाइंट रजिस्ट्रार लोकायुक्त को मिल जाएगा। सरकार से लोकायुक्त का अलग से कॉडर बनाने का भी आग्रह किया गया है। हालांकि यहां पर ज्यादातर स्टाफ हाईकोर्ट से रिटायर्ड लोगों का है, लेकिन उसके बाद भी स्टाफ की काफी कमी है जिसके लिए रेगुुलर भर्ती करने की डिमांड भेजी जाएगी।
 


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News Editor

Vikash thakur

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