हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत जिलों में वायु प्रदूषण की जांच के लिए होगी स्टडी

punjabkesari.in Sunday, Jun 26, 2022 - 07:36 PM (IST)

चंडीगढ़,(विजय गौड़): हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (एच.एस.पी.सी.बी.) की ओर से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एन.सी.आर.) के अंतर्गत आने वाले 4 जिलों में वायु प्रदूषण के स्तर और स्त्रोत की जानकारी हासिल करने के लिए स्टडी करवाई जाएगी। ये जिले वो हैं जहां साल के अलग-अलग समय में वायु प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहता है। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत जिले शामिल हैं। बोर्ड द्वारा फैसला लिया गया है कि 18 माह तक चलने वाली यह स्टडी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के राज्य/केंद्रीय शैक्षणिक अनुसंधान से करवाई जाएगी। 

 


स्टडी करवाने के बाद इन जिलों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। दरअसल नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी.) के निर्देशों पर बनाई गई स्टेट लैवल कमेटी की मीटिंग में यह फैसला लिया गया था कि हरियाणा में वायु प्रदूषण के स्तर की जांच करने के लिए स्टडी करवाई जाएगी। जिसके बाद बोर्ड ने शैक्षणिक संस्थानों से प्रोपोजल मांगे हैं। स्टडी करवाकर यह जानकारी जुटाई जाएगी कि इन 4 शहरों की हवा में मौजूद पाॢटकुलेट मैटर (पी.एम.)-2.5, पी.एम.-10, एस.ओ.-2, एन.ओ.एक्स., सी.ओ., बेंजीन, एल्डिहाइड, एन.एम.एच.सी., टी.एच.सी. और पी.ए.एच. जैसे प्रदूषकों की क्या स्थिति है।

 


-शहरों पर प्रदेश सरकार का फोकस
शहरी केंद्रों में वायु की गुणवत्ता विभिन्न जटिल स्त्रोतों से प्रभावित होती है इसलिए प्रमुख स्त्रोतों की पहचान इन्हीं एरिया में की जानी है। शहरों के आवासीय और व्यावसायिक एरिया के साथ ही उन हॉट स्पॉट्स के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी, जहां वायु प्रदूषण का स्तर उस जिले में सबसे अधिक होता है। 
इसके बाद इन हॉट स्पॉट पर फोकस करके यहां वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए प्लान तैयार किया जाएगा। स्टडी तीन सीजन के लिए करवाई जाएगी जिससे कि यह पूरा आंकड़ा जुटाया जा सके कि कौन से मौसम में कितना प्रदूषण होता है।

 


-5 से 7 मॉनिटरिंग स्टेशन लगेंगे
इस प्रोजैक्ट के दौरान हरेक शहर में कम से कम 5 से 7 एयर मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। इन्हें आवासीय इलाके के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी लगाया जाएगा। हालांकि एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या को बढ़ाया भी जा सकता है।
एक दिन में 8 घंटे तक मॉनिटरिंग होगी। जिन्हें सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक, दोपहर 2 से रात 10 बजे तक और रात 10 से सुबह 6 बजे तक के समय में विभाजित किया जाएगा। एक सीजन में लगातार 30 दिनों तक सैंपङ्क्षलग की जाएगी। इस तरह तीन सीजन के लिए 90 दिन सैंपङ्क्षलग के होंगे।


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News Editor

Ajay Chandigarh

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