हाईकोर्ट में प्रशासन ने दाखिल किया विस्तृत जवाब, कहा-बिल्डर लॉबी से मिलकर लोगों ने किए अपार्टमैंट के गैर-कानूनी निर्माण

2021-07-23T01:32:49.33

चंडीगढ़, (रमेश हांडा) : पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में चंडीगढ़ प्रशासन ने अपार्टमैंट एक्ट और फ्लोर वाइज बिल्डिंग प्लान को लेकर विस्तृत जानकारी एफिडैविट के माध्यम से दाखिल कर दी है, जिसमें प्रशासन ने कहा है कि जो जवाब फरवरी 2020 में यू.टी. के सीनियर स्टैंडिंग काऊंसिल ने दाखिल किया था, प्रशासन आज भी उसी पर
अडिग है। कोर्ट को बताया गया है कि याचिकाकत्र्ताओं ने सैक्टर-10 में और दक्षिणी सैक्टरों में बिल्डर लॉबी से मिलकर गैरकानूनी अपार्टमैंट्स का निर्माण किया है और अब रजिस्ट्रियां करने की मांग कर रहे हैं, जिसका कैपिटल एक्ट 1952 और मास्टर प्लान 2031 में भी कहीं जिक्र नहीं है, अगर चंडीगढ़ में रिहायशी प्लॉट्स में अपार्टमैंट बनाने की अनुमति दी गई तो शहर का स्वरूप बदल जाएगा। जवाब में बताया गया कि चंडीगढ़ में लोगों को प्लॉट घर बनाने के लिए दिए गए थे और प्रावधान था कि परिवार बढऩे की सूरत में तीन मंजिल तक बनाई जा सकती हैं, लेकिन लोगों ने अपार्टमैंट बनाकर बेचने शुरू कर दिए हैं, जिसकी अनुमति प्रशासन  ने कभी दी ही नहीं न ही कभी फ्लोर वाइज रजिस्ट्री या अपार्टमैंट प्लान को अप्रूवल ही दी गई है।


परिवार का सदस्य अपना हिस्सा बेचना चाहे तो उसकी रजिस्ट्री होगी
जवाब में बताया गया कि कैपिटल एक्ट 1952 में इंडियन कांट्रैक्ट एक्ट व ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट में यह प्रावधान जरूर है कि अगर पिता या मालिक घर को परिवार के तीन सदस्यों को बराबर या शेयर के आधार पर देता है तो शेयर होल्डर को अपना शेयर बेचने का अधिकार है जिसकी रजिस्ट्री भी की जाती है।


कहीं भी फ्लोर वाइज की रजिस्ट्री नहीं की
जवाब में बताया गया कि प्रशासन की सुविधा नामक हैंड बुक में कंस्ट्रक्शन और रेलैक्सेशन की पूरी जानकारी दी गई है जिसमें अपार्टमैंट का कहीं जिक्र नहीं है। एस्टेट ऑफिस के रिकार्ड में भी म्यूचुचल ट्रांसफर का ही जिक्र है। कहीं भी फ्लोर वाइज रजिस्ट्री नहीं की गई।


4 माह में करना है निपटारा, सोमवार से रोज सुनवाई
हाईकोर्ट ने प्रशासन के जवाब को रिकार्ड में ले लिया है और मामले की सुनवाई अब सोमवार से हर रोज होगी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने चार माह में मामले का निपटारा करने के आदेश हाईकोर्ट को दिए हुए हैं, जोकि सितम्बर 2021 में पूरे हो जाएंगे।


याची एसोसिएशन ने कहा था, रजिस्ट्रियां होती रही हैं
प्रशासन की ओर से गत वर्ष फरवरी में हुई मामले की सुनवाई के समय कोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए बताया था कि चंडीगढ़ में रैजीडैंशियल प्रॉपर्टी की फ्लोर वाइज रजिस्ट्री नहीं हो सकती जबकि याची पक्ष ने कोर्ट के समक्ष सबूत रखे कि चंडीगढ़ में फ्लोर वाइज रजिस्ट्रियां होती रही हैं जिसके बाद कोर्ट ने विस्तृत जवाब मांगा था।


फ्लोर वाइज अपार्टमैंट बेचने की मांगी है अनुमति
सैक्टर-10 की रैजीडैंट वैल्फेयर एसोसिएशन की ओर से दाखिल हुई याचिका के माध्यम से कोर्ट से मांग की गई है कि चंडीगढ़ में देश में अन्य स्थानों की तरह फ्लोर वाइज बिल्डिंग प्लान की अप्रूवल दी जाए ताकि जमीन का मालिक फ्लोर वाइज अपार्टमैंट बेच सकें।


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News Editor

AJIT DHANKHAR

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