परगट सिंह का सिसोदिया को जवाब, ‘‘दिल्ली का शिक्षा मॉडल सिर्फ़ पानी का बुलबुला’’

punjabkesari.in Thursday, Dec 02, 2021 - 08:36 AM (IST)

चंडीगढ़,(रमनजीत सिंह)   पंजाब और दिल्ली के शिक्षा मॉडलों की तुलना के संदर्भ में पंजाब के शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने आज ‘आम आदमी पार्टी ’ के दिल्ली मॉडल पर सवाल खड़े किए। परगट सिंह ने कहा कि दिल्ली के 1060 में से 760 स्कूलों में प्रिंसिपल के पद खाली क्यों हैं? दिल्ली के 1844 स्कूलों में से 479 वाइस प्रिंसिपल के पद क्यों खाली हैं? दिल्ली के स्कूलों में 41 प्रतिशत नान टीचिंग स्टाफ के पद खाली क्यों हैं?

पंजाब भवन में प्रैस कान्फ़्रेंस के दौरान दिल्ली मॉडल को पानी का बुलबुला बताते हुए परगट सिंह ने कहा कि सरहदी राज्य पंजाब का राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ मुकाबला ही गलत है। पंजाब एक कृषि प्रधान ग्रामीण राज्य है। दिल्ली एक म्यूंसिपल्टी शहर है। गाँवों, ख़ासकर अंतरराष्ट्रीय सरहद के साथ लगते गाँवों में माणक शिक्षा पहुंचाना हमेशा एक चुनौती रहा है। दोनों का मुकाबला ही तर्कसंगत नहीं। पंजाब का मुकाबला हरियाणा और राजस्थान आदि राज्यों के साथ करना बनता है। फिर भी, हैरानी की बात है कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री मापदण्डों के अनुसार माँगी सूची को सार्वजनिक न करके क्या छिपाना चाहते हैं?

शिक्षा मंत्री ने कहा कि केजरीवाल और सिसोदिया लगातार पंजाब के सरकारी शिक्षा प्रणाली की निंदा कर रहे हैं। आज दिल्ली के शिक्षा मंत्री द्वारा जिस तरीके से एक स्कूल में दाखि़ल होकर और स्टोर रूम को दिखाकर राजसी रोटियाँ सेकने की भद्दी साजिश रची गई, उसकी वह आशा नहीं करते थे। वह तो एक सेहतमंद बहस में विश्वास रखते हैं। उन्होेंने कहा कि कोविड की संभावित तीसरी लहर के मौके पर आप नेताओं की भीड़ ने आज स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया, जिसको भविष्य में कभी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

परगट सिंह ने कहा कि पिछले 5 सालों के दौरान पंजाब सरकार की तरफ से किये शिक्षा सुधार की बात करें तो पंजाब के करीब 13000 स्कूलों में 41000 कमरे स्मार्ट क्लास रूम बन चुके हैं, जबकि दिल्ली में कुल स्कूल ही एक हजार हैं। 

परगट सिंह ने कहा कि पंजाब में पिछले 3 सालों में लगातार सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में रिकार्ड तोड़ वृद्धि  ( क्रमवार 5 प्रतिशत, 14 प्रतिशत और 14 प्रतिशत) हुई है, जो भारत के इतिहास में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। पंजाब भारत का एकमात्र राज्य है, जहां सर्व शिक्षा अभ्यान के अध्यापकों को पक्का किया गया है। पंजाब ने पिछले 4 साल में 9000 के करीब नए अध्यापक भर्ती किये हैं और दिसंबर के अंत तक यह भर्ती 20000 हो जाएगी।

 परगट सिंह ने कहा कि पंजाब ने अपने अध्यापकों को प्रशिक्षण देने के लिए इंडियन स्कूल आफ बिज़नस और कैनेडा भेजा है। पंजाब में अध्यापकों की बदलियां पूरी तरह के साथ पारदर्शी और आनलाइन तरीकेे से हुई। प्रशासकीय सुधार में बहुत सी सहूलतें जैसे छुट्टी के लिए आवेदन पत्र, सर्टिफिकेट आदि पूरी तरह से आनलाइन हैं। इन सभी सुधारों के कारण ही पंजाब राष्ट्रीय दर्जाबन्दी (पी.जी.आई.) में 2021 में पहले नंबर पर आया है, जबकि दिल्ली छठे नंबर पर हैं। इससे पहले सर्वेक्षण में पंजाब 13वें नंबर पर था, जब कि दिल्ली चौथे नंबर पर था।

परगट सिंह ने कहा कि दिल्ली के साथ अगर मुकाबला करना ही है तो पंजाब के पिछले पाँच सालों और दिल्ली के पिछले 8सालों के समय में हुए शिक्षा सुधारों के बीच मुकाबला करना बनता है। पंजाब और दिल्ली के हालात अलग-अलग हैं। पंजाब के पास अमन कानून, कृषि, उद्योग, शहरी और ग्रामीण विकास जैसे बहुत सी जिम्मेदारियां हैं जबकि दिल्ली के पास सिर्फ़ शिक्षा और स्वास्थ्य ही है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि दिल्ली एक राजस्व सरप्लस स्टेट है, जिसको अमन कानून, कृषि आदि पर कोई खर्चा नहीं करना पड़ता। वहाँ के मुलाजिमों की पैनशनें केंद्र सरकार देती है। पंजाब पर 2.75 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ है। पंजाब में करीब 20 हजार स्कूल हैं, जब कि दिल्ली में करीब 1000 स्कूल हैं। पंजाब जैसे बड़े क्षेत्रफल व ग्रामीण-सरहदी इलाकों वाले राज्य में बच्चों को पढ़ाना, उनको बढ़िया बुनियादी ढांचा मुहैया करवाना, अध्यापकों को तैनात करना और उन पर निगरानी करना काफ़ी मुश्किल काम होता है। इसके मुकाबले दिल्ली जैसे बड़े शहरों में शिक्षा मुहैया करना कहीं आसान है।

परगट सिंह ने पूछे केजरीवाल और सिसोदिया को सवाल

परगट सिंह ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को सवाल करते हुए पूछा कि शीला दीक्षित और केजरीवाल के समय में दिल्ली की शिक्षा का क्या मुकाबला था? अगर दिल्ली मॉडल इतना बढ़िया है तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम क्यों हो रही है और प्राईवेट स्कूलों में बढ़ क्यों रही है? दिल्ली के सरकारी स्कूलों का दसवीं का नतीजा शीला दीक्षित की सरकार की अपेक्षा बुरा क्यों आता है? दिल्ली सरकार ने पिछले 6 सालों में कितने नए सरकारी स्कूल खोले हैं क्योंकि वह दिल्ली में तो 500 नये सरकारी खोलने की बात करते थे? पंजाब में सभी अध्यापकों को पक्का करने का वायदा करने वाले केजरीवाल बताऐंगे कि दिल्ली में 22 हज़ार से अधिक गेस्ट फेकल्टी अध्यापकों को कब पक्का करेंगे? दिल्ली के स्कूलों में अध्यापकों के 42 प्रतिशत स्थायी पद क्यों खाली हैं? दिल्ली के स्कूलों में बच्चों और अध्यापकों का अनुपात (35ः1) इतना कम क्यों है? दिल्ली में जब आप सरकार बनी है, उसने एक भी नया अध्यापक क्यों भर्ती नहीं किया? दिल्ली ने कितने सर्व शिक्षा अभ्यान वाले अध्यापक पक्के किये हैं? दिल्ली के 1060 में से 760 स्कूलों में प्रिंसिपल के पद क्यों खाली हैं? दिल्ली के 1844 स्कूलों में से 479 वाइस प्रिंसिपल के पद क्यों खाली हैं? दिल्ली के स्कूलों में 41 प्रतिशत नान टीचिंग स्टाफ के पद खाली हैं? दिल्ली की आनलाइन तबादला नीति क्या है और उसके अधीन कितने अध्यापकों ने फ़ायदा लिया है?

 


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News Editor

Ramanjit Singh

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