जीएमसीएच-32 में नया विवाद, करीब 30 लाख रुपये के गड़बड़ी का अनुमान

punjabkesari.in Thursday, Dec 02, 2021 - 04:32 PM (IST)

चंडीगढ़, (अर्चना सेठी)- बीते दस सालों में जीएमसीएच-32 से डाक्टर, नर्स, टेक्निशियन बन चुके मेडिकल स्टूडैंट्स का रिकार्ड ऑडिट द्बारा खंगालना शुरु किया गया है। ऑडिट को ऐसे कई पूर्व मेडिकल स्टूडैंट्स का ब्यौरा मिला है जो पढ़ाई के दौरान जीएमसीएच-32 के हॉस्टल्स में रहे, मैस का खाना खाया, बिजली का इस्तेमाल किया लेकिन इसके शुल्क जमा करवाए बगैर ही कालेज को गुड बाय कह गए। हॉस्टल के रजिस्टर से मिले अधूरे दस्तावेजों की वजह से अस्पताल व मेडिकल कालेज को तीस लाख रुपये के करीब नुकसान होने का अनुमान है हालांकि सही नुकसान जानने के लिए ऑडिट सारे रिकार्ड्स की जांच कर रहा है।

दरअसल, जीएमसीएच-32 प्रबंधन को कुछ सप्ताह पहले जानकारी मिली थी कि कोरोना काल के दौरान पिछले दो सालों के हॉस्टल्स के शुल्क अस्पताल प्रबंधन को जमा नहीं करवाए गए थे। रिकार्ड में ना तो यह ब्यौरा मिला कि कौन सा मेडिकल स्टूडैंट किस कमरा नंबर में रूका था, ना ही यह पता चल सका कि हॉस्टल के कितने कमरे खाली रहे और ना ही शुल्क ही जमा करवाए गए।

सूत्रों की मानें तो ऑडिट ने वर्ष 2019 और वर्ष 2020 के दौरान तीन से चार लाख रुपये के शुल्क जमा ना करवाए जाने पर ऐतराज जताया। दो सालों के रिकार्ड में गड़बड़ी को देखने के बाद प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के हाथ पैर फूल गए और चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2012 से लेकर अब तक का जीएमसीएच-32 के सभी हॉस्टल के कमरों से संबंधित शुल्कों के ऑडिट के आदेश जारी कर दिए, सिर्फ इतना ही नहीं  ऑडिट की कार्रवाई पूरी होने तक जीएमसीएच-32 के सारे हॉस्टल्स के कर्मचारी को सस्पैंड करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए।

नहीं मिला ब्यौरा किसने कुर्सी तोड़ी, किसने मैस का खाना खाय

अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि हॉस्टल के अधिकारी ने जीएमसीएच के किसी भी हॉस्टल के रिकार्ड को मेनटेन ही नहीं किया। रिकार्ड में कमरों के नंबर और उसमें रहने वाले मेडिकल स्टूडैंट्स के नाम गायब हैं। अगर नाम हैं तो उनके आगे हॉस्टल के कमरे नंबर ही नहीं लिखे गए। रजिस्टर में मैस के खाने से लेकर लॉन्डरी के शुल्कों का ब्यौरा ठीक से लिखा नहीं गया है। किस कमरे में किस चीज की मुर मत पर पैसे खर्च हुए थे वो भी विवरण नहीं मिला। किस स्टूडैंट ने कौन सी कुर्सी तोड़ी, कौन से बर्तन खराब किए वो सब कुछ रजिस्टर में लिखा नहीं गया। सूत्र कहते हैं कि हॉस्टल के अधिकारी का पहले भी हॉस्टल के फर्नीचर से संबंधित कुछ विवाद हुआ था।

सूत्रों का कहना है कि ऑडिट ने जब मेडिकल कालेज के अमलगामेटेड फंड्स को जांचा तो पाया कि पिछले कुछ सालों से हॉस्टल द्बारा फंड जमा ही नहीं करवाए गए थे। जब फंड का रिकार्ड देखा तो पहले दो सालों के तीन से चार लाख रुपये शुल्कों में गड़बड़ी मिली और ऐसे कई मेडिकल स्टूडैंट्स मिले जो शुल्क दिए बगैर ही हॉस्टल में रहकर पढ़ाई पूरी कर कालेज से जा चुके थे। ऐसे कई पूर्व स्टूडैंट्स ने अब अस्पताल प्रबंधन की फटकार के बाद कुछ लाख रुपये जमा करवा भी दिए हैं और कई स्टूडैंट्स ने शुल्क जमा करवाने की हामी भरी है और इसी तरह अब बीते सालों के स्टूडैंट्स से भी शुल्क वसूले जाएंगे।

ऑडिट की कार्रवाई पूरी होने पर ही पता चलेगा सही नुकसान

जीएमसीएच-32 के हॉस्टल्स वार्डन एवं प्रभारी डॉ.संजय डी क्रूज का कहना है कि रिकार्ड मेनटेन ना होने की वजह से कितने रुपयों की गड़बड़ी हुई है इसके बारे में ऑडिट की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। हालांकि अस्पताल के आंतरिक ऑडिट के एक अधिकारी ने नाम ना लिखे जाने की शर्त पर कहा कि फिलहाल यही सामने आया है कि सस्पैंड किए गए कर्मचारी ने हॉस्टल के कमरों से संबंधित तथ्यों को रजिस्टर में ठीक से दर्ज नहीं किया था। कर्मचारी की इस लापरवाही की वजह से कितना नुकसान हुआ है इसका इतनी जल्दी पता नहीं चल सकता। ऑडिट की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही कुछ कह सकेंगे।

कर्मचारी को तुरंत कर दिया सस्पैंड ताकि कार्रवाई ना हो प्रभावित

जीएमसीएच-32 की डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ.जसबिंदर कौर का कहना है कि रिकार्ड में गड़बड़ी मिलते ही कर्मचारी को सस्पैंड कर दिया गया है, ताकि जांच और ऑडिट की कार्रवाई किसी भी तरह से बाधित ना हो सके। दो सालों का ऑडिट पूरा होने के बाद अब बाकी के बीते सालों के सारे रिकार्ड खंगाले जा रहे हंै। रिकार्ड्स की जांच पूरी होने के बाद ही बताया जा सकेगा कि कितने रुपयों में गड़बड़ी हुई है।


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News Editor

Archna Sethi

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