पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने की आशंका: CRISIL रिपोर्ट

punjabkesari.in Tuesday, Jun 02, 2026 - 03:54 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में वृद्धि से अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति-जनित दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे आने वाले महीनों में परिवहन एवं विनिर्माण लागत बढ़ सकती है और आम उपभोग की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया। रिपोर्ट कहती है कि 15 मई के बाद से पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है और अगर कच्चे तेल के दाम ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं तो यह बढ़ोतरी निकट भविष्य में 10 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। 

क्रिसिल ने कहा, "इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था में ढुलाई लागत में बढ़ोतरी के जरिये दिखेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों और अन्य वस्तुओं की महंगाई दोनों बढ़ेंगी।" रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन कीमतों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। ईंधन कीमतों में 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा मुद्रास्फीति करीब 0.36 प्रतिशत बढ़ सकती है। अगर ईंधन कीमतें 10 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ जाती हैं तो खुदरा महंगाई में करीब 0.48 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। 

रिपोर्ट में कहा गया कि ईंधन के दाम बढ़ने का सर्वाधिक प्रभाव सड़क परिवहन पर पड़ेगा क्योंकि इसकी लागत का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर निर्भर है। इससे माल ढुलाई महंगी हो जाएगी और इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। देश में करीब 71 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग के जरिये ही होती है। क्रिसिल के मुताबिक, ढुलाई लागत बढ़ने से दूध, फल, दालें, चाय-कॉफी, मसाले, अंडे, मांस और मछली जैसे खाद्य उत्पादों की कीमतों में तेजी आ सकती है क्योंकि ये बड़े पैमाने पर परिवहन नेटवर्क पर निर्भर हैं। 

रिपोर्ट कहती है कि कपड़ा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी उत्पाद, सीमेंट और सिरेमिक जैसे क्षेत्रों में भी लागत बढ़ेगी। रसायन, कोयला और धातु क्षेत्र भी महंगाई की चपेट में आएंगे। ऐसी स्थिति में कंपनियां लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं या उत्पाद की मात्रा में कटौती कर सकती हैं। 


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Content Writer

jyoti choudhary

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