Banking Sector: 135 साल पुराने बैंकिंग कानून में बड़ा बदलाव, 1 अक्टूबर से लागू होगा नया एक्ट
punjabkesari.in Saturday, Sep 12, 2026 - 11:28 AM (IST)
नई दिल्लीः बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। आगामी 1 अक्टूबर 2026 से बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट लागू होने जा रहा है। यह नया कानून लगभग 135 साल पुराने ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891’ की जगह लेगा और आज के आधुनिक डिजिटल बैंकिंग युग के अनुकूल काम करेगा। राष्ट्रपति ने इस नए विधेयक को 13 अगस्त 2026 को मंजूरी दी थी। 10 सितंबर को जारी एक अधिसूचना के जरिए 1 अक्टूबर से इसे लागू करने की तारीख तय की गई है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह नया कानून कागजी (भौतिक), इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और क्लाउड-आधारित बैंकिंग रिकॉर्ड के लिए एक आधुनिक और तकनीक-तटस्थ कानूनी ढांचा प्रदान करेगा।
कारोबार बढ़ाने में होगी आसानी
वित्त मंत्रालय ने बताया कि नए कानून का उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों के अनुरूप कानूनी नियमों को बदलना है। इससे कारोबार करने में आसानी बढ़ाने और वित्तीय क्षेत्र के कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने में भी मदद मिलेगी।
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नए कानून की मुख्य विशेषताएं
बैंकिंग रिकॉर्ड का दायरा बढ़ा
नए ढांचे के तहत बैंकर्स बुक्स (बैंक रिकॉर्ड) में न केवल लिखित या कागजी रिकॉर्ड शामिल होंगे, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल, ऑफसाइट और क्लाउड पर सुरक्षित डेटा भी शामिल होगा।
आसान और मानकीकृत प्रमाणन
बैंकिंग रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया को सरल और मानकीकृत किया गया है। अब रिकॉर्ड के प्रमाणपत्रों को मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के माध्यम से प्रमाणित किया जा सकेगा।
साइबर सुरक्षा और डेटा अखंडता की शर्तें
किसी इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड को अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश करने के लिए कानून में कुछ शर्तें तय की गई हैं। इनमें कंप्यूटर सिस्टम का सुचारू संचालन, अधिकृत डेटा प्रविष्टि, अनाधिकृत बदलावों से सुरक्षा, सुरक्षित डेटा ट्रांसफर और साइबर जोखिमों से बचाव शामिल हैं।
बैंक अधिकारियों को लेकर भी स्पष्ट नियम
नए कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कानूनी मामले में बैंक स्वयं पक्षकार नहीं है, तो बैंक के अधिकारियों को सामान्य परिस्थितियों में गवाह के तौर पर बुलाने या मूल बैंकिंग रिकॉर्ड पेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, अदालत विशेष कारण दर्ज करते हुए ऐसा आदेश दे सकती है। इनमें रिकॉर्ड की सटीकता या प्रामाणिकता पर संदेह, नियमित रिकॉर्ड-कीपिंग में बाधा या बैंक द्वारा अदालत के आदेश का पालन नहीं करना जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं।
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अन्य वित्तीय संस्थाएं भी आ सकती हैं दायरे में
केंद्र सरकार जरूरत के अनुसार इस कानून के प्रावधानों को कुछ अन्य वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं या संस्थाओं की विशेष श्रेणियों पर भी लागू कर सकेगी। सरकार इसके लिए अलग से शर्तें, अपवाद या आवश्यक संशोधन अधिसूचित कर सकती है।
1891 के कानून का होगा अंत
नया अधिनियम बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को निरस्त कर देगा। हालांकि, पुराने कानून के तहत पहले से उत्पन्न अधिकारों, देनदारियों, जांच और कानूनी कार्यवाहियों को सुरक्षित रखा जाएगा।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, नए कानून का व्यापक उद्देश्य बैंकिंग रिकॉर्ड से संबंधित कानूनी व्यवस्था को देश की तकनीकी प्रगति और वित्तीय प्रणाली की बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाना है। इससे बैंकिंग रिकॉर्ड की कानूनी मान्यता को डिजिटल युग के हिसाब से स्पष्ट और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
