विश्लेषकों ने चेताया, तेजी से बढ़ने वाले शेयरों में तेज बिकवाली की जोखिम

10/16/2021 12:26:17 PM

बिजनेस डेस्कः महंगाई में तेजी रहने की आशंका के बीच विश्लेषकों ने दुनिया भर के शेयर बाजारों पर इसके असर के बारे में आगाह किया है। जिंस, खास तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से यह चिंता और बढ़ गई है। कच्चा तेल इस हफ्ते 84 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया जो तीन साल में इसका उच्चतम स्तर है और एक साल पहले से इसके दाम करीब 96 फीसदी बढ़ चुके हैं। 

मुद्रास्फीति में आ सकता है जोरदार उछाल 
जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटजी के वैश्विक प्रमुख क्रिस्टोफर वुड ने हाल ही में निवेशकों को लिखे नोट में कहा है, 'इन सबका मतलब शेयरों में जोखिम का बढ़ना है, विशेष तौर पर उच्च मूल्य वाले शेयरों में। मुद्रास्फीति बढ़ने और फेडरल रिजर्व द्वारा नीतियों को सख्त किए जाने की चिंता में बिकवाली शुरू हो सकती है। कच्चे तेल के दाम में ऐसी ही तेजी बनी रही तो मुद्रास्फीति में जोरदार उछाल आ सकता है।'

मिड और स्मॉल कैप में आई जबरदस्त तेजी 
कोविड महामारी के मद्देनजर अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए फेडरल रिजर्व सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीतियों को नरम बनाया था। इससे उभरते बाजारों के शेयरों को बहुत फायदा हुआ है। इस साल सेंसेक्स 28 फीसदी से ज्यादा और निफ्टी 31 फीसदी मजबूत हुआ है। मिड और स्मॉल कैप में भी जबरदस्त तेजी आई है। इस साल अब तक मिडकैप 50 फीसदी और स्मॉलकैप 65 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है।

यह भी है चिंता का कारण
दूसरी ओर कच्चे तेल और कोयले तथा गैस के दाम में तेजी ने ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं को चिंतित कर दिया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है क्योंकि बिजली उत्पादन के लिए यह काफी हद तक कोयला पर निर्भर है। नोमुरा के विश्लेषकों ने भी मुद्रास्फीति को लेकर इसी तरह के विचार साझा किए हैं। नोमुरा के वैश्विक वृहद आंकड़ों के शोध प्रमुख और बाजार शोध के सह-प्रमुख रॉब सुब्बारमन ने रेबेका वांग के साथ तैयार अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'आपूर्ति पक्ष की ओर से किल्लत - सेमीकंडक्टर से लेकर ऊर्जा तक की कमी और प्रोत्साहन की नीति जारी रहने तथा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार से बेरोजगारी दर कम होगी और वेतन से संबंधित महंगाई बढ़ सकती है, जिससे मुद्रास्फीति में इजाफा हो सकता है।'


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Content Writer

jyoti choudhary

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