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लॉकडाउन में भी चुका रहे लोन, SBI के 20% ग्राहकों ने ही चुना कर्ज भुगतान से राहत का विकल्प

2020-05-23T12:39:45.237

बिजनेस डेस्कः देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि एसबीआई के 20 फीसदी कर्जदारों ने ही कर्ज की किस्तें चुकाने में दी गई छूट का लाभ उठाया। रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर बैंकों से कर्ज ले रखे लोगों को एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 तक के लिए किस्तें चुकाने से छूट देने की घोषणा की थी। अब इस अवधि को बढ़ाकर 31 अगस्त 2020 तक कर दिया गया है।

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कुमार ने कहा कि, 'एसबीआई के मामले में इनका (किस्त से राहत विकल्प चुनने वालों का) फीसदी बहुत छोटा है।' उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छूट का विकल्प चुना है, उनमें सभी तरलता के संकट का सामना नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'उनमें से कई अपने ऋण की किस्तें चुका सकते थे, लेकिन उन्होंने रणनीति के अनुसार छूट का लाभ उठाना तय किया। वे अपनी नकदी को बचाकर रखना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने किस्तें चुकाने से छूट का विकल्प चुना।' 
साथ ही उन्होंने कहा कि आरबीआई के रेपो दर में कमी करने और कर्ज की किस्तें चुकाने में राहत को तीन महीने के लिए और बढ़ाने से अर्थव्यवस्था के त्वरित पुनरुद्धार में मदद मिलेगी।
 
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क्‍या है SBI का कहना
एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बताया, "एसबीआई के मामले में मोरेटोरियम सुविधा (EMI भुगतान टालने) लेने वाले ग्राहकों का प्रतिशत बहुत छोटा है।" उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छूट का विकल्प चुना है, उनमें सभी नकदी के संकट का सामना नहीं कर रहे हैं। रजनीश कुमार ने कहा, "इनमें से कई अपने लोन की किस्तें चुका सकते थे लेकिन उन्होंने रणनीति के अनुसार छूट का लाभ उठाना तय किया। वे अपनी नकदी को बचाकर रखना चाहते हैं, इसीलिए उन्होंने किस्तें चुकाने से छूट का विकल्प चुना।’’

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EMI देने की सलाह
एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कर्जदाताओं को सलाह दी कि यदि वे नकदी की कमी से नहीं जूझ रहे हैं तो कर्ज की किस्तें चुकाते रहें। उन्होंने कहा कि अगर आप ईएमआई (कर्ज की किस्तें) चुकाने में सक्षम हैं, तो भुगतान करते रहें। अगर भुगतान करने में असमर्थ हैं, तभी कर्ज की किस्तों से छूट का लाभ उठाना चाहिए।"

रजनीश कुमार ने कहा कि कर्ज की किस्तें चुकाने से राहत की अवधि का विस्तार उद्योग के लिए मददगार होगा। इसके अलावा, इस कदम के कारण आरबीआई को फंसे कर्ज खातों का एक बार पुनर्गठन करने की तत्काल आवश्यकता नहीं होगी।


jyoti choudhary

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