‘क्या वाकई ट्रम्प बड़े बे-आबरू होकर कूचे से निकाले जाएंगे’

2021-01-16T05:26:12.703

अमरीका के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव होना नि:संदेह, बड़ी घटना है। इसके पूर्व समय पूरा कर सत्ता से बाहर जाते हुए किसी राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव तो नहीं ही आया था, इतनी जल्दी तैयार कर पेश और पारित करने की घटना भी कभी नहीं हुई। हालांकि महाभियोग के भविष्य पर अभी भी प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। अमरीका में ही प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या वाकई ट्रम्प बड़े बे-आबरू होकर कूचे से अंतिम समय में निकाले जाएंगे? यह बात पहले से साफ थी कि डैमोक्रेट हर हाल में ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएंगे और उसको पारित कराने की कोशिश करेंगे। 

प्रतिनिधि सभा की अध्यक्षा नैन्सी पेलोसी ने उप राष्ट्रपति माइक पेंस को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि वे 25वें संशोधन का इस्तेमाल कर ट्रम्प को उनके पद से हटाएं। उन्होंने डैमोक्रेटों को लिखे पत्र में कहा था कि अगर पेंस कोई कार्रवाई नहीं करते तो महाभियोग पर मतदान होगा। वस्तुत: पेलोसी ने अपने पत्र में डैमोक्रेट और उनके समर्थकों तथा ट्रम्प विरोधियों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व किया था।

उन्होंने लिखा था कि हम पर संविधान और लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी है,लिहाजा हमें तुरंत कदम उठाना होगा। राष्ट्रपति से इन दोनों यानी संविधान और लोकतंत्र को खतरा है। जैसे-जैसे दिन गुजरते जाएंगे राष्ट्रपति द्वारा लोकतंत्र को नुक्सान पहुंचाने की आशंका बढ़ती जाएगी। हालांकि रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी एक समूह ट्रम्प के खिलाफ है लेकिन वे नहीं चाहते थे कि महाभियोग प्रस्ताव लाया जाए या पारित हो। 

रिपब्लिकनों की ओर से डैमोक्रेटों को चेतावनी दी गई थी कि वे सत्ता स्थानांतरण करने में तल्खी न दिखाएं। इस प्रक्रिया को आराम से होने दें। जब किसी नेता के खिलाफ माहौल होता है तो अपनी प्रतिक्रियाओं में हम कई बार नीर-क्षीर- विवेक का इस्तेमाल नहीं करते। डैमोक्रेट केवल ट्रम्प के खिलाफ नहीं हैं वे रिपब्लिकनों को बदनाम और कमजोर करने के अवसर के रूप में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रतिनिधि सभा में उनका बहुमत है इसलिए उन्होंने एक प्रस्ताव पारित करके माइक पेंस से अपील कर दी कि वे 25 वां संशोधन लागू करें। यह प्रस्ताव 13 जनवरी को 205 के मुकाबले 223 मतों से पारित हो गया। उप राष्ट्रपति को कठघरे में खड़ा करने वाले इस प्रस्ताव की आवश्यकता क्या थी? 25 वां संशोधन पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या के आलोक में 50 साल से अधिक समय पहले पारित किया गया। 

यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति पद पर सेवा देने के उपयुक्त नहीं रह जाता तो उसकी जगह किसी और की नियुक्ति का प्रावधान करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। नैंसी पेलोसी को पत्र का जवाब देते हुए पेंस ने स्पष्ट किया था कि वे 25 वां संशोधन लागू नहीं करेंगे। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि हमारे संविधान में 25 वां संशोधन सजा देने या अधिकार छीनने का माध्यम नहीं है।

25 वां संशोधन लागू करना खराब उदाहरण पेश करेगा। डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को सुबह 11.00 बजे तक ही राष्ट्रपति हैं। उसके पहले ही वह व्हाइट हाऊस छोड़ चुके होंगे। सीनेट में उप राष्ट्रपति पेंस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वे पहले ही साफ कर चुके हैं कि महाभियोग का समर्थन नहीं करेंगे। इस तरह सीनेट में इसका पारित होना कठिन है। हां, डैमोक्रेट अपनी रणनीति के तहत रिपब्लिकनों को कठघरे में खड़ा करने में तत्काल अवश्य सफल होंगे। 

महाभियोग पारित हो या नहीं लेकिन ट्रम्प अमरीकी इतिहास के ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं जिनके खिलाफ दो बार यह प्रस्ताव आया। 18 दिसंबर 2019 को प्रतिनिधि सभा ने उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पारित कर दिया था लेकिन सीनेट में यह गिर गया। वैसे भी अमरीकी इतिहास में महाभियोग प्रस्ताव के द्वारा किसी राष्ट्रपति को हटाने की कोई घटना नहीं हुई। 1868 में राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन के खिलाफ प्रतिनिधि सभा में महाभियोग पारित हो गया लेकिन सीनेट में गिर गया। 1998 में भी बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग प्रतिनिधि सभा में पारित होने के बाद सीनेट में बहुमत पाने से वंचित रह गया। 1974 में रिचर्ड निकसन के खिलाफ वाटरगेट स्कैंडल में महाभियोग की कार्रवाई होने ही वाली थी कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया। 

महाभियोग प्रस्ताव का भविष्य जो भी हो लेकिन संसद पर जनसमूह के हमले के संदर्भ में ट्रम्प की भूमिका पर अमरीका में लंबे समय तक बहस होती रहेगी। स्वाभाविक ही है इसके साथ एक व्यक्ति और राजनेता के रूप में ट्रम्प की पूरी भूमिका तथा उनके भविष्य को लेकर भी गहन चर्चा होती रहेगी। अमरीका ही नहीं पूरी दुनिया में यह सबसे ज्यादा बहस का विषय हो चुका है।

महाभियोग में मुख्य आरोप यह है कि 6 जनवरी को उन्होंने अपने समर्थकों को भड़काया और इसी कारण संसद पर हमला हुआ,हिंसा हुई और 5 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। जरा सदन में पेलोसी के भाषण को देखें। उन्होंने कहा कि ट्रम्प ने अमरीका के खिलाफ एक घातक विद्रोह को भड़काया जिसके कारण लोकतंत्र के दिल अमरीकी संसद भवन पर हमला किया गया। सत्य बिल्कुल स्पष्ट है। इस राजद्रोही हमले के पीछे राष्ट्रपति का हाथ था और उन्होंने अपने समर्थकों को इसके लिए उकसाया। 

ये कदम दर्शाते हैं कि वे अपने कार्यालय के मूलभूत दायित्वों का निर्वहन करने में बिल्कुल अक्षम हैं। इसलिए उन्हें तत्काल पद से हटा दिया जाना चाहिए। सदन की अध्यक्षा द्वारा इस तरह के भाषण के बाद यह कहने की आवश्यकता नहीं रह जाती कि ट्रम्प विरोधियों में इस समय किस तरह की भावना व्याप्त है। हालांकि ट्रम्प ने बाद में हिंसा से अपने को अलग कर लिया।-अवधेश कुमार


Content Writer

Pardeep

सबसे ज्यादा पढ़े गए

Recommended News