क्या रेल मंत्रालय का अनुसरण करेंगे अन्य मंत्रालय

2021-07-29T06:22:50.53

पहली मर्तबा एक मंत्री मोदी सरकार में 2 बड़े मंत्रालयों को संभाल रहा है। मंत्रिमंडल में वह सबसे व्यस्त मंत्री है तथा उन्होंने अपने बाबुओं को चुस्त-दुरुस्त रखने का निर्णय लिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय में 2 शिफ्टों में 18 घंटे के कार्यों को जारी किया है। पूर्व में उड़ीसा कैडर के आई.ए.एस. अधिकारी रह चुके वैष्णव को कार्पोरेट सैक्टर में 2 वर्षों के एक छोटे-से कार्यकाल का अनुभव है। पहली शिफ्ट प्रात: 7 बजे से सायं 4 बजे तक होगी तथा दूसरी शिफ्ट सायं 3 बजे से लेकर मध्य रात्रि तक होगी। अन्य चीजों के अलावा इस कदम के द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी खुश करने की कोशिश की गई है जो 18 घंटे तक रोजाना कार्य में व्यस्त रहते हैं। 

सूत्रों के अनुसार रेल मंत्रालय के अतिरिक्त डायरैक्टर जनरल (पी.आर.) डी.जे. नारायण द्वारा जारी आदेश के अनुसार 2 शि टों को रेल मंत्रालय के अधिकारियों और स्टाफरों के बीच तथा मंत्री के कार्यालय में लागू किया जाएगा। मगर बाबुओं को डर है कि यह प्रचलन मंत्रालय के दूसरे विभागों में भी बढ़ाया जा सकता है। वैष्णव के इस कदम ने मोदी सरकार में एक नई लहर को जन्म दिया है।

ऐसा माना जा रहा है कि उनकी नई सरकार की ऐसी प्रक्रिया को अन्य मंत्रालयों द्वारा भी अपनाया जा सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में भी ऐसा हो सकता है क्योंकि वैष्णव के पास वह मंत्रालय भी है। सूत्रों के अनुसार वाणिज्य मंत्रालय भी ऐसे वर्क कल्चर को अपनाने में दिलचस्पी दिखा रहा है। इस तरह के प्रयास से वैष्णव अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना चाहते हैं। दो शि टों को लेकर मंत्रालय में सभी बाबू अब फिक्रमंद हैं। 

नाम में क्या रखा है? : कुछ बाबू लोग बेहद उत्साहित तथा खुश नजर आ रहे हैं कि उन्हें मोदी सरकार के सबसे शक्तिशाली मंत्री को रिपोर्टिंग करनी पड़ेगी क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले नए सहकारिता मंत्रालय की घोषणा हो चुकी है। कृषि मंत्रालय से वर्तमान परिवर्तन अनौपचारिक है क्योंकि प्रोटोकोल सूची से परे सचिवों का पदक्रम है। मगर शाह निश्चित तौर पर इस मंत्रालय को चलाने के लिए एक सुपर बाबू को चुनना पसंद करेंगे। शाह के उच्च स्तरीय सुरक्षा तंत्र को देखते हुए नए सहकारिता मंत्रालय की बैठकें गृह मंत्रालय में ही आयोजित होंगी। 

केंद्र ने कहा है कि नया मंत्रालय एक अलग प्रशासन उपलब्ध करवाएगा। जिसका अलग कानूनी और नीतियों का ढांचा होगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि सरकार सहकारिता गति को और मजबूत करना चाहती है। इसके लिए और ज्यादा श्रम बल की जरूरत पड़ेगी तथा नए मंत्रालय को नए नौकरशाहों की जरूरत पड़ेगी जिसका मतलब यह है कि बाबुओं के लिए और ज्यादा नौकरियां होंगी। ऐसा भी सवाल उठ रहा है कि नए मंत्रालय का नाम गुमराह करने वाला है। इसलिए इसका नाम मिनिस्ट्री ऑफ को-आप्रेटिव होना चाहिए। शाह के लिए एक और बड़ी भूमिका है। 

पद के लिए चुना : दिल्ली के बाबू को पता चला है कि एन.एच.ए.आई. में निरंतर बदलाव हुए हैं जोकि 2006 से लेकर अब तक एक मुख्य समस्या है। 2012-15 के 3 वर्षों में तत्कालीन प्रमुख आर.पी.सिंह ने अपना कार्यकाल पूरा किया था। दिलचस्प बात है कि सिंह अंतिम चेयरमैन थे जिन्हें सर्च-कम-सिलैक्शन प्रक्रिया द्वारा चुना गया था। उत्तराखंड को अपने नए मु यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मिलने के एक दिन बाद केंद्र ने वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी एस.एस. संधू को राज्य का नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया। मगर उत्तराखंड का फायदा एक घाटे में दिख रहा है जोकि नैशनल हाईवेज अथॉर्टी ऑफ इंडिया (एन.एच.ए.आई.) के रूप में है। 

बतौर एन.एच.ए.आई. चेयरमैन संधू केंद्र के डैपुटेशन पर थे तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं उच्च मार्ग मंत्री नितिन गडकरी के महत्वाकांक्षी मूलभूत ढांचे को मार्ग पर ला रहे थे। गडकरी को अब एक नए चेयरमैन की तलाश होगी। इसके अलावा दो अन्य महत्वपूर्ण पद मैंबर फाइनांस तथा मैंबर पी.पी.पी. की खोज करना भी होगा। ये दोनों पद कई महीनों से रिक्त पड़े हैं। 5 वर्षों में 3 मुख्यमंत्री देखने वाले उत्तराखंड राज्य के लिए नए मु यमंत्री धामी को अपने प्रमुख सचिव को चुनने की अनुमति दी गई है।-दिल्ली का बाबू दिलिप चेरियन


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Content Writer

Pardeep

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