हम भारत के ही लोगों को हिन्दुत्व नहीं समझा पा रहे

punjabkesari.in Saturday, May 14, 2022 - 04:28 AM (IST)

रामनवमी और ईद के महत्वपूर्ण त्यौहारों पर 8 प्रदेशों में दंगे हुए। सैंकड़ों लोग घायल हुए। उसके कारण भारत के प्रत्येक देशभक्त का सिर शर्म से झुक गया। अब हालत यह हो गई है कि दंगा करने का कोई भी बहाना जलूस,  झंडा, लाऊडस्पीकर मिल जाए तो उस पर पत्थर बरसते हैं, दंगे होते हैं, लोग घायल होते हैं। यदि गहराई से सोचा जाए तो लोग ही घायल नहीं होते हैं भारत की आत्मा भी घायल होती है। 

जिस देश ने हजारों साल पहले पूरे विश्व को वेदान्त का महान ज्ञान दिया। हिमालय की चोटी पर खड़े होकर घोषणा की-‘वसुधैव कुटम्बकम’ यानी पूरा विश्व एक परिवार है। इसी भावना से हजारों साल भारत विश्व के साथ व्यवहार करता रहा। भारत शक्तिशाली हुआ। दुनिया के देशों में भारत के लोग गए। प्यार का और मानवता का संदेश दिया। कहीं पर किसी देश की एक ईंट तक नहीं उखाड़ी। दुनिया के सताए हुए लोग जब भारत में आए तो खुले दिल से उनका स्वागत किया और भारत में उनको शरण दी। 

1893 में शिकागो की विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद ने जब वेदांत और हिन्दुत्व पर भाषण दिया तो पूरी दुनिया उनके चरणों में झुक गई। उन्हें ऐेतिहासिक सम्मान मिला। विश्व इतिहास में ऐेसा कोई उदाहरण नहीं है कि किसी देश के नेता के एक भाषण के बाद उस देश के प्रति पूरी दुनिया का दृष्टिकोण बदल जाए। न्यूयार्क के प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘न्यूयार्क हेराल्ड’ ने मुख पृष्ठ पर स्वामी जी का चित्र छापा और लिखा- ‘‘स्वामी विवेकानन्द धर्म सभा में सबसे महान थे-उन्हें सुनकर हमें हैरानी हुई कि इस प्रकार के महान देश में धर्म प्रचारक का भेजना कितनी मूर्खता की बात है। 

गुलाम देश का एक युवा संन्यासी अपने भाषणों के द्वारा दुनिया को हिन्दुत्व समझा पाया और आज आजाद भारत के हम सब लोग भारत के ही लोगों को हिन्दुत्व नहीं समझा पा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि किन्हीं कारणों से भारत के कुछ मुसलमान ईमानदारी से समझने के लिए तैयार ही नहीं और दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि कुछ तथाकथित हिन्दू नेताओं को स्वयं ही हिन्दुत्व का सही ज्ञान नहीं है। 

भारत में मुख्य रूप से ङ्क्षहदू और मुसलमान दो समुदाय रहते हैं। भारत के अधिक मुसलमान देशभक्त हैं, परन्तु कुछ ऐसे भी हैं जो अपने आपको विदेशी आतताई हमलावरों की संतान समझते हैं। जो भारत को अपना देश ही न समझ पाए वे हिन्दुत्व को भी नहीं समझेंगे। ऐतिहासिक सच्चाई यह है कि गजनी, गौरी और बाबर जैसे विदेशी लुटेरे आए। उन्होंने हमारा सब कुछ लूटा। कुछ लूट कर वापस चले गए और कुछ यहीं मर गए। 

उस समय के राज परिवार नवाबों के रूप में आज भी रहते हैं। भारत में आज के मुसलमान उस समय धर्म बदलने वाले हिंदुओं के ही वंशज हैं। उन लुटेरे आतताइयों के नहीं। इस ऐतिहासिक सच्चाई को न समझने के कारण ही सारी समस्या पैदा होती है। सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त मुख्य न्यायाधीश श्री छागला ने कहा था - ‘‘मेरी रगों में हिन्दू ऋषि-मुनियों का खून दौड़ता है।’’ श्री फारूक अब्दुल्ला ने भी कहा था कि उनके पूर्वज कश्मीरी पंडित थे। 

आज के भारत का मुसलमान उस समय के उन हिन्दुओं का वंशज है जिन्होंने किसी कारण पूजा करने का तरीका बदला था। अयोध्या-काशी और अन्य स्थानों पर मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाने का काम लुटेरों ने किया, विदेशियों ने किया था। वे लूट कर जा चुके हैं। उन आतताई लुटेरों ने तो गुरु गोङ्क्षबद सिंह जी के बेटों को दीवारों में चिनवाया था। इतना ही नहीं, भारत की महिलाओं को ले जाकर गजनी ने बाजारों में नीलाम करवाया था। 

शिकागो धर्म सभा में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि हिन्दुत्व पूजा पद्धति नहीं है। हिन्दुत्व पूजा पद्धतियों की बहुत-सी नदियों का एक महा समुद्र है। विश्व के लगभग 8 देशों में किसी न किसी रूप में रामलीला होती है। इंडोनेशिया और मलेशिया मुस्लिम बहुल देश हैं परन्तु वहां रामलीला होती है और राम के नाम पर कई मंदिर हैं। उनकी स्पष्ट धारणा है कि इस्लाम उनका धर्म है परन्तु रामायण उनकी संस्कृति है। वे इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनके पुरखों ने पूजा करने का तरीका बदला, परन्तु उनकी संस्कृति वही पुरानी है। यह सोचकर बड़ी हैरानी होती है कि जिस इंडोनेशिया में 88 प्रतिशत मुसलमान रहते हैं वहां राम की पूजा होती है और रामलीला होती है परन्तु जिस भारत में केवल 14 प्रतिशत मुसलमान और 80 प्रतिशत हिन्दू रहते हैं वहां रामलीला पर पथराव होते हैं, दंगे होते हैं। 

भारत का हिन्दू स्वामी विवेकानंद के बताए हुए हिन्दुत्व को समझे। पुराण की इस परिभाषा को समझे और भारत का मुसलमान इस बात को समझे कि वह आक्रमणकारी लुटेरे विदेशियों की संतान नहीं है। आज के भारत का मुसलमान उस युग के उन ङ्क्षहदुओं की संतान है जिन्होंने किसी कारण पूजा करने का तरीका बदला था।-शांता कुमार(पूर्व मुख्यमंत्री हि.प्र. और पूर्व केन्द्रीय मंत्री)


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