मानवता में लालच और मुनाफा न हो

2021-05-01T04:35:57.433

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने एक विशेष मंत्रिस्तरीय चिंताजनक टिप्पणी की कि इस समय वैश्विक कोविड-19 संक्रमण दर सबसे अधिक है और कुछ देश जो पहले व्यापक प्रसारण से बच गए थे, अब संक्रमणों में तेजी से वृद्धि देख रहे हैं।

दवाइयों की उपलब्धता और कीमतों को लेकर विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में त्राहिमाम है। कोरोना महामारी ने पूरे विश्व के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती प्रस्तुत की है। ऐसा नहीं है कि वैश्विक स्तर पर हैल्थ को लेकर कोई सामूहिक प्रयास नहीं हुआ, लेकिन यथार्थ के तहत राष्ट्रीय हित को दूसरे पहलू से जोड़ा गया। 

इस महामारी ने दुनिया व सभी देशों के सामने मानव सेहत से संबंधित सवालों को हर नीति के सामने एक नए आयाम के रूप में खड़ा कर दिया। कोविड-19 महामारी ने देशों में लोगों की स्वास्थ्य सेवा और इसमें दवाओं तक पहुंच में गहन असमानताओं, वैक्सीन का वितरण, आदि जैसे प्रमुख विषय को उजागर किया है।

हर युग की अपनी प्रतिबद्धता होती है, इसी कारण दूसरे विश्व युद्ध के पश्चात ग्लोबल ट्रेड और वित्तीय स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आई.एम.एफ., विश्व बैंक व गैट वार्ता के परिणामस्वरूप विश्व व्यापार संगठन की स्थापना हुई। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था  के इंजन के रूप में उभर कर सामने आए, जहां बाजार की शक्तियों ने राज्य के क्षेत्र और समय को दरकिनार कर दिया।

वैश्वीकरण की इस प्रक्रिया ने देशों के बीच सकारात्मक अन्योन्याश्रितता पैदा की, लेकिन हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि कई क्षेत्रों में, अंतर्संबंध के नियम पक्षपाती थे। अभी हाल ही में गॉर्डन ब्राऊन, अन्य पूर्व नेताओं और नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने डब्ल्यू.टी.ओ. के अंतर्गत ट्रिप्स समझौते से हट कर पेटेंट को निलंबित करने की बात रखी जो महामारी को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। भारत, दक्षिण अफ्रीका ने भी पेटेंट को लेकर गुहार लगाई है। 

इसी संदर्भ में ध्यान देना चाहिए कि 2001 में एच.आई.वी. महामारी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ट्रिप्स के हानिकारक प्रभाव को उजागर किया था। दक्षिण अफ्रीका में इस विषय पर आज भी चर्चा है कि किस प्रकार पेटेंट धारकों के लिए सुरक्षा को सुनिश्चित किया गया और मरीज जिसको दवा की जरूरत है उसको अनदेखा कर दिया गया। वर्तमान संस्करण में यही कहानी दोहराई जा रही है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पेटेंट और अन्य अधिकारों को इकट्ठा करने के लिए एक स्वैच्छिक पूल की शुरूआत की है, लेकिन यह समस्या का आधा हल है। वैश्विक बौद्धिक संपदा नियमों को कोविड-19 वैक्सीन की दुनिया भर में पहुंच को बेहतर बनाने के लिए संशोधनों की आवश्यकता है। विश्व समुदाय को निजी स्वामित्व अधिकारों, वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य असमानता को संतुलित करने के लिए खड़ा होना चाहिए। कोविड-19 वायरस के नए संस्करण अधिक गंभीर हैं। 

इस वैश्विक संकट में पेटेंट और प्रतिस्पर्धा के कारण, विकासशील देशों के सामने कई और परेशानियां हो जाती हैं। वैक्सीन इक्विटी और उपलब्धता को केवल वैश्विक संस्थानों के माध्यम से ही निपटाया नहीं जा सकता है, जनभागीदारी के आधार पर देशों द्वारा प्रयास किए जाने चाहिएं। साथ ही हम ज्ञान और अन्य संबंधित चीजों में यथास्थिति में नहीं रह सकते। नई दवाओं को विकसित करने में प्रौद्योगिकियों, ज्ञान और अनुभवों को सांझा करने की आवश्यकता है। ये अतीत में वैश्वीकरण के नुक्सान के कारण भी थे। इन गलतियों को सुधारना समय की जरूरत है,जहां वैश्विक प्रयास आम लोगों की चिंताओं के समाधान के लिए होने चाहिएं, क्योंकि प्रत्येक देश के सामने चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। 

मानवता को आज वैश्विक शासन की बहुत आवश्यकता है क्योंकि सीमाओं के पार सुरक्षा में कटौती का खतरा है। इतिहास इस बात का गवाह है कि वैश्विक शासन ने हमें प्रत्येक युद्ध के बाद स्थिरता का रास्ता दिखाया है। अमीर देशों को समझना चाहिए कि यथार्थ केवल मुनाफा और लालच का पक्षधर नहीं है। पहले भी इसी संकुचित सोच के करण वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो अन्यथा बहुत उपयोगी हो सकती थी, वो परेशानियों का सबब बन गई। इस समय लालच और निहित स्वार्थों को वैश्विक सामूहिक प्रयास से मानवता को विफल नहीं करने देना है।-डॉ.आमना मिश्रा
 


Content Writer

Pardeep

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