2022 तक भारत को कुपोषण मुक्त करने का लक्ष्य

2021-09-12T17:16:31.823

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (डब्ल्यू. सी.डी.) राष्ट्रीय पोषण मिशन के तौर पर चर्चित आवश्यक पोषण अभियान के तहत सितंबर 2021 के पूरे महीने के दौरान चौथा ‘पोषण माह’ मना रहा है। सितम्बर 2018 में सामाजिक व्यवहार में बदलाव एवं संचार पर विशेष ध्यान देते हुए देश भर में पहला पोषण माह मनाया गया था। तब से हर साल सितंबर के महीने को कुपोषण संबंधी चुनौतियों से निपटने और लोगों में, विशेष तौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए ‘पोषण माह’ के रूप में मनाया जाता है।

 

कुपोषण दुनिया भर में महिलाओं एवं बच्चों में बीमारियों और मृत्यु का एक प्रमुख कारण रहा है। यह संज्ञानात्मक विकास और सीखने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है जिससे उत्पादकता में कमी आती है। भारत सरकार ने देश में कुपोषण की उच्च दर जैसी समस्याओं से निपटने के लिए समय-समय पर कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें से कुछ योजनाएं- 1975 में शुरू की गई एकीकृत बाल विकास योजना, 1993 में शुरू की गई राष्ट्रीय पोषण नीति, 1995 में शुरू की गई मध्याह्न भोजन योजना और 2013 में शुरू राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन आदि हैं।

 

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए और कुपोषण से निपटने के लिए 8 मार्च, 2018 को राजस्थान से पोषण अभियान की शुरूआत की थी। पोषण अभियान सरकार का मल्टी-मिनिस्ट्रियल कन्वर्जेंस मिशन है जिसके तहत 2022 तक भारत को कुपोषण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। पोषण अभियान गरीब क्षेत्रों में बच्चों, महिलाओं और गर्भवती माताओं के पोषण को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2022 तक बच्चों में स्टंटिंग (आयु के अनुपात में छोटा कद) को 38.4 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करना है।

 

कुपोषण एक जटिल एवं बहुआयामी समस्या है और इसके कई कारण हैं जिनमें से अधिकतर आपस में जुड़े हुए हैं। देश में कुपोषण की समस्या को दूर करने के किसी भी समाधान में बुनियादी तौर पर सभी संबंधित क्षेत्रों को शामिल किया जाना चाहिए। नोडल मंत्रालय होने के नाते महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण अभियान को एक जन आंदोलन बनाने का प्रयास किया है जिसमें विभिन्न सरकारी निकायों, राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के स्थानीय निकायों, सामाजिक संगठनों, निजी क्षेत्र और बड़े पैमाने पर जनता की समावेशी भागीदारी शामिल है। विभिन्न सहयोगी मंत्रालय और विभाग राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में जमीनी स्तर पर पोषण जागरूकता से संबंधित गतिविधियों में मदद करेंगे। इन विभागों में आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता के जरिए महिला एवं बाल विकास विभाग, आशा, ए.एन.एम., प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जरिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, स्कूल एवं पंचायत के जरिए पंचायती राज विभाग और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं। स्वदेशी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति अथवा आयुष (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) भी पोषण अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुपोषण के विभिन्न संकेतकों के समाधान तलाशने के लिए आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर शोध किया जाएगा।

 

कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण पैदा हुई अप्रत्याशित परिस्थिति ने दुनिया भर में लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। कोविड-19 ने न केवल आगे की राह को प्रभावित किया है बल्कि पिछले 3 वर्षों में पोषण अभियान द्वारा की गई प्रगति को भी प्रभावित किया है। सबसे ज्यादा प्रभावित हमेशा गरीब होते हैं जो आम तौर पर अपनी आय का अधिकांश हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं। सरकार ने कई नागरिक सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कठिन परिस्थितियों में भी कुपोषण की समस्या के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने का प्रयास किया है। सरकार ने महिलाओं और बच्चों में कुपोषण में वृद्धि को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाऊन के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए राशन एवं खाद्यान्न का घरेलू वितरण शुरू किया ताकि कोविड-19 वैश्विक महामारी के प्रभाव को कम किया जा सके।

 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित ‘पोषण माह’ में कुपोषण, इसके विभिन्न कारणों के बारे में जागरूकता पैदा करने और इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की अनोखी क्षमता है। सरकार हर साल ‘पोषण माह’ मनाने के लिए एक अनोखा विषय चुनती है। इस वर्ष भारत, आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और इसलिए तेजी से व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पूरे महीने को समग्र पोषण में सुधार की दिशा में एक केंद्रित एवं समेकित दृष्टिकोण के साथ साप्ताहिक विषयों में विभाजित किया गया है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण संबंधी परिणाम हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। 

 

आंगनवाड़ी व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं जो भारत के पोषण लक्ष्य हासिल करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का प्रमुख आधार है। आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पी.एम.एस.एस.वाई.) जैसी योजनाओं का उद्देश्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश भर में प्राथमिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुधार करना है। सरकार देश में ठोस आहार की शुरूआत करने वाले शिशुओं को खिलाने के तरीकों में सुधार लाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।  

डा. मुंजपारा महेंद्रभाई
(महिला एवं बाल विकास और आयुष राज्य मंत्री)


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Content Writer

Seema Sharma

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