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आदिवासी एकता परिषद के  रहस्य का उद्घाटन

2020-05-21T12:26:25.797

वामपंथी समूहों तथा चर्च के काम करने के तरीके में एक समानता यह है कि दोनों ही अपनी पहचान तथा एजेंडा छुपाने के लिए कुछ प्रकट संगठनों का जाल बताते हैं इसका खुलासा तभी होता है जब हम सिलसिलेवार इसकी पड़ताल करते हैं इस आधार पर सोचें तो पालघर में पीट पीट कर साधुओं की हत्या करने की घटना, जिसने कि  हिंदू भावनाओं को बहुत गहरा आघात पहुंचाया है एक  गहराई से विचार करने योग्य घटना है।  इस घटना का कारण  सोशल मीडिया पर चल रही कुछ अफवाहों जैसे कि "मुस्लिम लोग कोरोना फैला रहे हैं", " बच्चों के गुर्दे चुराने वाला कोई गिरोह सक्रिय है" आदि को बताने का प्रयास हो रहा है, जैसे कि किडनी कोई ऐसी चीज हो जिसको फूल की तरह उखाड़ा जा सकता है। इस कहानी का स्त्रोत क्या है? "द प्रिंट" [ लिंक1] और बहुत से मीडिया संस्थानों ने  आदिवासी एकता परिषद के राजू पंडारा नामक व्यक्ति को उद्धृत करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें चल रही थीं। इस संवेदनशील स्थिति में यदि कोई ऐसा दावा करने के लिए आगे आता है तो ऐसा मानने में कुछ भी अनुचित नहीं होगा कि आदिवासी एकता परिषद, जिसे मीडिया संस्थान पश्चिमी भारत में कार्यरत जमीन से जुड़ा हुआ संगठन बताते हैं तथा इस संगठन के सदस्य जांच पूरी होने से पहले ही घटना की कहानी का अपना प्रारूप प्रचारित करने में रुचि ले रहे हैं। तो प्रश्न यह है कि यह समूह कौन है जो आदिवासी एकता परिषद के पीछे हैं?

 आदिवासी एकता परिषद के दो चेहरे 
आदिवासी एकता परिषद ने अपनी वेबसाइट पर दावा किया है कि यह पूरी मनुष्यता तथा प्रकृति के लिए काम करती है।  इस संस्थान ने जनवरी 2020 में पालघर में एक बहुत बड़े  सांस्कृतिक एकत्रीकरण का आयोजन किया जिसमें  मध्य प्रदेश की राज्यपाल अनुसूया उइके [ लिंक3] तथा स्थानीय सांसद राजेंद्र गावित और अनेक अन्य नेता सम्मिलित हुए:  [इमेज1]  यह लगता है कि यह आयोजन ये लोग वार्षिक रूप से करते हैं और इनके दावों के अनुसार इसमें दो लाख लोग सम्मिलित होते हैं, ऐसा लगता है कि पालघर और इसके आसपास के  दादरा नगर हवेली के इलाके पर इनका विशेष ध्यान केंद्रित है क्योंकि 2019 का एकत्रीकरण दादरा नगर हवेली में सिलवासा के निकट किया गया था। 

दृश्य के पीछे
परंतु ठीक इसी समय सी बी सी आई वेबसाइट जोकि कैथोलिक बिशप्स ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट है [लिंक4], ने दावा किया है कि 2019 के एकत्रीकरण में “फादर निकोलस बड़ला  एस वी डी सेक्रेटरी, सी बी सी आई ऑफिस ऑफ़ ट्रिब्यूनल अफेयर्स”, जोकि आदिवासी एकता परिषद का एक संगठक तथा सदस्य है और सिस्टर  ललिता रोशनी लाकड़ा डी एस ए, जो इसी कार्यालय से है, ये दोनों तीन दिवसीय कार्यक्रम में सम्मिलित हुए तथा फादर निकोलस बड़ला, एस वी डी सेक्रेटरी, सी बी सी आई ऑफिस फॉर ट्राईबल अफेयर्स, ने संयुक्त राष्ट्र संघ में तथाकथित "मूल निवासियों"  के विषय पर एक भाषण भी प्रस्तुत किया था।  asianews.it, जोकि रोमन कैथोलिक पोंटिफिकल इंस्टिट्यूट फॉर फौरन मिशनरीज़ की आधिकारिक प्रेस एजेंसी है और इटली से काम करती है, ने दावा किया है कि पालघर में 13 से 15 जनवरी जो कांफ्रेंस हुई वह "कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस ऑफ इंडिया" द्वारा प्रायोजित की गई थी। "यह चर्च के मिशन का भाग है तथा यह जीसस का संदेश और गोस्पेल के मूल्य(values of gospel) हैं " [लिंक 5], [इमेज 2]। इसमें फादर बड़ला को उद्धृत करते हुये आगे कहा गया है कि हम प्रसन्न हैं कि "यूनाइटेड नेशन्स परमानेंट फोरम फॉर इंडिजिनस इश्यूज़" के उप प्रधान फूलमन चौधरी ने भी इसमें भाग लिया। यह यूनाइटेड नेशंस फोरम है क्या?  यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक सलाहकार बॉडी है जिसमें विभिन्न सरकारों द्वारा चुने गए 8 सदस्य तथा मूल निवासी लोगों की संस्थाओं द्वारा चुने गए 8 सदस्य होते हैं[लिंक 6]। फूलमन चौधरी नेपाल से हैं जिन को "मूलनिवासी" संगठनों ने नामांकित किया है। यदि आदिवासी एकता परिषद कोई संकेत है तो कोई आश्चर्य नहीं होगा की विश्व भर में मूल निवासियों के यह संगठन भी चर्च के ही प्रकट मोर्चे निकल आयें, परंतु संयुक्त राष्ट्र संघ के एक आंशिक संगठन के रूप में उनको एक निष्पक्ष चेहरा मिल जाता है जिससे उनको दुनिया के गरीब तथा मूल निवासियों के लिए काम करने में सरलता हो जाती है [इमेज 3] तथा साथ ही आदिवासी एकता परिषद को अंतर्राष्ट्रीय यात्रा तथा इस आंशिक ह्यूमन बॉडी के सामने विचार प्रकट करने का अवसर मिल जाता है जिसमें फादर निकोलस बड़ला उपस्थित रहते हैं।यह ठीक है कि सोशल मीडिया पर फादर निकोलस बड़ला को निकोलस बड़ला के रूप में ही लिखा जाता है। आदिवासी एकता परिषद की जांच करने वाले कुछ स्वतंत्र पत्रकारों ने कुछ रुचिकर तथ्य प्रस्तुत किए हैं: उदाहरण के लिए हैरी गुलबोर्न द्वारा संपादित पुस्तक "रेस एंड एथनिसिटी" [लिंक 7] में आदिवासी एकता परिषद, आदिवासियों को अपील करती है कि "जागृत हो जाएं तथा हिंदुओं के पंजों से स्वतंत्र हो जाएं" इस सब को ध्यान में रखते हुए वास्तविक प्रश्न यह है कि "सोशल मीडिया पर चलने वाली अफवाहें " भी पत्थलगड़ी आंदोलन की भांति ही आदिवासियों को भड़काने, उनको मुख्यधारा से अलग करने तथा बाहर से आने वाले लोगों को उनके इलाके में प्रविष्ट ना होने देने का ही छद्म आवरण/ हथकण्डा है क्या ? यह वर्षों से चल रहा है परंतु साधुओं की पीट पीट कर की गई हत्या की घटना की शान्ति भंग करने की क्षमता को ध्यान में रखकर आदिवासी एकता परिषद को यह समझाना चाहिए कि 

  • ●क्या उनके लाखों के वार्षिक एकत्रीकरण चर्च द्वारा प्रायोजित होते हैं ? 
  • ●क्या सी बी सी आई प्रतिनिधि फादर निकोलस बड़ला उनके गवर्निंग बोर्ड का सदस्य है-? 
  • ●क्या जैसा कि कुछ पुस्तकों द्वारा बताया गया है वह हिंदू विरोधी प्रचार में लगे हुए हैं ?
  • ●वह साधुओं की पीट-पीटकर की गई हत्या की घटना को "सोशल मीडिया की अफवाहों के कारण" हुआ प्रचारित करने को उत्सुक क्यों हैं ?
  • ●चर्च को समझाना चाहिए की उनके आदिवासी एकता परिषद से संबंध की प्रकृति क्या है ?
  • ●क्या वह पालघर के आसपास दादरा नगर हवेली को ऐसे फ्रण्टल संगठन बनाकर प्रभावित करना चाहते हैं तथा अपना लक्ष्य बनाना चाहते हैं ?

https://theprint.in/opinion/palghar-lynching-muslims-christians-usual-suspects-no-one-blamed-facebook-whatsapp/413557/
 

http://www.adivasiektaparishad.org/
 

https://cg24news.in/article-view.php?pathid=7476&article=4
 

https://www.cbci.in/detail_Slide.aspx?id=658&type=1
 

http://www.asianews.it/news-en/Thousands-of-tribal-people-meet-in-Maharashtra,-united-to-preserve-indigenous-traditions-49062.html
 

https://www.un.org/development/desa/indigenouspeoples/unpfii-sessions-2/newmembers.html
 

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1627382503982281&id=287026071351271
 

https://books.google.co.in/books?id=B3hZaJ1erY4C&pg=PA99&lpg=PA99&dq=adivasi+ekta+parishad+church&source=bl&ots=fsHEK1vEFa&sig=ACfU3U1Ctt7zheu5UM5t4zUA3YfHlqL8XA&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjY8IXu1bjpAhWr9XMBHcw9BpIQ6AEwGnoECAMQAQ#v=onepage&q=adivasi%20ekta%20parishad%20church&f=false

 


Tanuja

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