कोरोना से बचाव के लिए कनिका जैसों पर लगे ‘रासुका’

2020-03-22T04:17:02.223

कोरोना वायरस के कहर से बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई जनता कफ्र्यू की अपील का पूरे देश में पालन होगा। कोरोना के बारे में सच से ज्यादा अफवाह और विवाद हैं लेकिन इस बात पर सभी लोग एकमत हैं कि महामारी का यह वायरस विदेशों से भारत में आ रहा है। बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर की करतूत से देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में अनेक मंत्रियों के साथ दूसरे राज्यों के सांसद भी अब संदेह के दायरे में आ गए हैं।

उत्तर प्रदेश में पुलिस और सी.एम.ओ. द्वारा कनिका कपूर के खिलाफ आई.पी.सी. की धारा 188, 269 और 270 के तहत चार एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई हैं। हल्की धाराओं में दर्ज ऐसे मामलों में तुरंत जमानत मिलने के साथ अधिकतम 2 साल की सजा का प्रावधान है। कनिका कपूर जैसी गैर जिम्मेदार सैलीब्रिटीज की मनमौजी फ्रीडम के लिए करोड़ों जनता के मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता है। यू.पी. के मुख्यमंत्री अपनी प्रशासनिक सख्ती के लिए मशहूर हैं। कनिका कपूर के खिलाफ अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वह बिग बॉस के प्रतिभागियों की तरह इस विवाद का फायदा उठाकर और ज्यादा चॢचत और सफल हो जाएंगी। 

कनिका कपूर जैसे कई और भी हैं। कनिका के संग पार्टी करने वाले पूर्व सांसद अकबर अहमद डम्पी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। सैलीब्रिटीज की पार्टी में सभी राजनीतिक दलों के नेता सर्वधर्म समभाव से शामिल होकर जनसेवा की नई मिसाल पेश करते हैं। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री समेत कई लोगों का कोरोना टैस्ट अभी भले ही नैगेटिव आया हो, लेकिन इस वायरस का प्रभाव कई बार दो हफ्ते बाद ही दिखता है। कनिका कपूर की पार्टी में गए भाजपा सांसद दुष्यंत सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया अब एकांतवास में चले गए हैं, लेकिन उनकी लापरवाही से अनेक सांसद और राष्ट्रपति संक्रमण के दायरे में आ गए हैं। टी.आर.एस. के विधायक और कई अन्य राजनेताओं ने भी ऐसा ही जनविरोधी आचरण किया है, जिसे देखकर कई दूसरे लोग भी अस्पतालों और एयरपोर्ट से भाग रहे हैं। मध्य प्रदेश में सत्ता की मलाई के लिए व्याकुल नेताओं ने तो भीड़ के साथ शक्ति प्रदर्शन करने के बाद रात में विधायकों के साथ सामूहिक डिनर भी कर लिया। देश के प्रधानमंत्री जब संकल्प और संयम की बात कर रहे हों उस समय राजनेताओं और सैलीब्रिटीज का ऐसा बर्ताव देश विरोधी ही माना जा सकता है। ऐसे लोगों के लिए राजेश कवि ने क्या खूब लिखा है,‘‘देश की अच्छी हिफाजत कर रहे हो, खेत विधवा का समझकर चर रहे हो।’’ 

कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थलों पर धरना-प्रदर्शन और तोड़-फोड़ करने वाले दंगाइयों के खिलाफ योगी सरकार ने उनके पोस्टर लगवाकर, भारी जुर्माना वसूलने की कार्रवाई शुरू की थी। सार्वजनिक तोड़-फोड़ में सिर्फ सम्पत्ति का ही नुक्सान होता है, जिसकी भरपाई आसान है लेकिन आपराधिक लापरवाही से कोरोना वायरस के विस्तार करने को समाज और देश दोनों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जाना चाहिए। कोरोना के संक्रामक वायरस को जाने-अनजाने बढ़ाने वाले लोग अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी समझें, इसके लिए जरूरी है कि कनिका कपूर जैसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो। उत्तर प्रदेश सरकार ने अनेक दंगाइयों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और गैंगस्टर एक्ट लगाया। उसी तर्ज पर कनिका कपूर के खिलाफ भी यदि कार्रवाई हो तो अमीरजादों की बेशर्मी का लबादा बेनकाब हो जाएगा। 

विदेशों से आयातित यह संकट आगे चलकर और गहराना ही है। केंद्र सरकार ने विदेश से आने वाली अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर अल्पकालिक रोक लगा दी है। इसके बावजूद विदेशों से आ चुके लोग भारत में कोरोना की महामारी का विस्तार कर रहे हैं। कनिका जैसे रईसों द्वारा विदेशों से लाई बीमारी का बोझ देश की करोड़ों गरीब जनता क्यों उठाए? जो लोग बीमारी के वाहक हैं उन्हें या तो विदेशों से आने ही नहीं दिया जाए या फिर उन्हें भारत में ही दूरस्थ स्थानों पर अलग-थलग रखा जाए। इस बीमारी का वैज्ञानिक और डाक्टर जल्द ही इलाज खोज लेंगे लेकिन तब तक इसके डर से  उपज रहे संकट से बड़ी आबादी को बचाने की जिम्मेदारी समाज और सरकार दोनों की है। यह संकट यदि लंबा चला तो गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले करोड़ों किसान और असंगठित क्षेत्र के कामगार बीमारी की बजाय आर्थिक संकट से तबाह हो सकते हैं। केरल सरकार ने इस बीमारी से निपटने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया है। 

योगी सरकार ने दिहाड़ी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के 35 लाख लोगों को राहत देने के लिए एक हजार रुपए की मदद का ऐलान किया है, 3500 करोड़ रुपए की यह रकम असंगठित क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए नाकाफी है, जो नोटबंदी के बाद कोरोना के कहर का शिकार हो रहे हैं। कनिका ने जिस ताज होटल में पार्टी की थी, उसे स्थानीय प्रशासन ने बंद करवा दिया है। कानपुर और लखनऊ में कनिका कपूर जिन जगहों पर गईं, वहां पर बड़े पैमाने पर जनता के पैसों से लॉक डाऊन हो रहा है। जरूरत इस बात की है कि राष्ट्रीय संकट की इस घड़ी में राज्यों के साथ केंद्र एक समन्वित नीति अपनाए। राज्य और केंद्र सरकार के पास संसाधनों की आर्थिक सीमाएं हैं। कोरोना से निपटने के लिए जनता कफ्र्यू जैसे कई उपायों पर अमल के लिए स्थानीय प्रशासन, राज्य और केंद्र द्वारा अनेक आदेश पारित किए जा रहे हैं। इनमें से कई आदेश सी.आर.पी.सी. की धारा 144 के तहत पुलिस या मैजिस्ट्रेट द्वारा जारी हो रहे हैं, जिसके तहत भीड़ को रोकने के प्रावधान हैं। इसके अलावा 123 साल पुराने एपिडैमिक डिजीज एक्ट 1897 के प्रावधान के तहत सरकारों ने अनेक नोटीफिकेशन जारी किए हैं। 

ब्रिटिशकालीन इस कानून से स्वाइन फ्लू, कॉलरा, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों की रोकथाम के प्रयास कुछ राज्यों में हो चुके हैं लेकिन कोरोना जैसी अंतर्राष्ट्रीय संक्रामक महामारी से पूरे भारत में निपटने के लिए दो सदी पुराना कानून नाकाफी दिखता है। इस बीमारी से इतना ज्यादा हड़कम्प मचा है कि डर की वजह से दिल्ली में एक संदिग्ध मरीज ने अस्पताल से कूदकर आत्महत्या ही कर ली। भारत में सरकारी दफ्तरों व अदालतों में सिर्फ सुपर एमरजैंसी के काम हो रहे हैं तो अब आम जनता की सुरक्षा के लिए समाज और सरकार दोनों को विशेष तौर पर सचेत रहना होगा। कानूनी नुक्ताचीनी और अफवाहों से परे जाकर, आज जरूरत इस बात की है कि कोरोना की महामारी और इसकी दहशत से लोगों को हर तरह से बचाया जाए क्योंकि जान है तो जहान है।-विराग गुप्ता


Pardeep

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