‘फेक न्यूज’ की फैक्टरी चला रहा पाकिस्तान

2021-04-14T04:32:37.027

भारत के खिलाफ पाकिस्तान कितनी नियोजित फेक न्यूज की फैक्टरी चला रहा है, यह जानना अति आवश्यक है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ सूचना युद्ध छेड़ रखा है जिसमें वह मनघड़ंत समाचारों का प्रयोग कर रहा है। इस पूरे प्रकरण में उसने आई.एस.आई. के साथ पाकिस्तान सरकार का भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। 

कई भाषाओं में भारत के खिलाफ चलाए जा रहे इस सूचना युद्ध में पाकिस्तान अपने घर से फेक आई.डी. का भरपूर प्रयोग कर रहा है। सूत्रों के आधार पर यह पता चला है कि पाकिस्तान इसके लिए ट्विटर का इस्तेमाल कर रहा है। पाक सरकार की इस खुफिया योजना में इमरान खान की सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ और आई.एस.आई. की सूचना इकाई मिलकर काम कर रही है। इमरान सरकार के कई मंत्री भी इस फेक न्यूज एजैंडे में शामिल हैं और इनका मकसद न केवल भारत के खिलाफ माहौल बनाना है बल्कि भारत के साथ लगते पड़ोसी देशों के साथ संबंध खराब करना भी है। 

ट्विटर ने यूजर को एक सुविधा दे रखी है कि कोई भी अपना यूजर नेम कितनी बार भी बदल सकता है। पाकिस्तान के खुफिया सूचना संगठन के चेहरे इस सुविधा का लाभ लेकर कभी ओमानी राजकुमारी बन जाते हैं, कभी श्रीलंका के ब्रिगेडियर, कभी विदेशी ब्लॉगर तो कभी-कभी चीनी सेना की ओर से ट्विट कर रहे है। शुद्ध रूप से पाकिस्तान से चल रहे साऊथ एशियन यूनाइटेड सोशल मीडिया फ्रंट यानी एस.ए.यू.एस.एम.एफ. की वैबसाइट के माध्यम से भारत के खिलाफ एक झूठा प्रचार चलाया जा रहा है। एस.ए.यू.एस.एम.एफ. डॉट ओआरजी वैबसाइट मालवेयर से भरी हुई है और विजिटर की सूचनाओं को चुराने के लिए कई तरह के परमिशन मांगे जाते हैं।

डी.एन.एस. इंफो यानी सर्वर की जानकारी के आधार पर पता चला है कि इस वैबसाइट को पाकिस्तानी मंत्री जहांगीर तरीन के सर्वर पर स्पेस दिया गया है। यह बताने के लिए काफी है कि पाकिस्तान सरकार किस तरह से उक्त वैबसाइट के  माध्यम से भारत विरोधी एजैंडा चला रही है। इस संगठन ने भारत के अलावा दक्षिण एशिया के कई लोगों को सोशल मीडिया पर जोडऩे का झूठा दावा किया है। पाकिस्तान के इस झूठ तंत्र में अफगानिस्तान, श्रीलंका, चीन, नेपाल, बंगलादेश, मालदीव के नागरिकों को जोडऩे का दावा किया गया है। छद्म संगठन एस.ए.यू.एस.एम.एफ. के सभी पदाधिकारी पाकिस्तानी खुफिया एजैंसी आई.एस.आई और इमरान खान सरकार से जुड़े हुए हैं जो श्रीलंकाई, नेपाली, चीनी और बंगलादेशी के नाम पर चेहरे और आई.डी. दिखाई जा रही है, वह या तो झूठी है या पाकिस्तान से ही उन्हें हैंडल किया जा रहा है। 

इस ग्रुप से जुड़ी एक ट्विटर आई.डी. का एक मजेदार किस्सा है। पाकिस्तानी झूठ फैक्टरी एस.ए.यू.एस.एम.एफ. से जुड़े हुए हरीथ बिलानी नाम के एक ट्विटर यूजर ने पहले तीन बार श्रीलंकाई नागरिक के तौर पर नाम बदले। फिर खुद को भारतीय बताया और अंत में पाकिस्तानी। ट्विटर ने तंग आकर इस आई.डी. को ही ब्लॉक कर दिया। इस गैंग का मकसद भारत को दुनिया में बदनाम करना, पाकिस्तान की सकारात्मक छवि बनाना और भारत के संबंध बाकी देशों के साथ खराब करना है। ओ.एस.आई.एन.टी. रिपोर्ट के अनुसार आफताब अफरीदी, अवैस जावेद सत्ती और आसिम खान के लोग भारत विरोधी इस फैक्टरी के संचालक हैं। इन तीनों के पाकिस्तानी सेना और कैबिनेट मंत्री जहांगीर तरीन से गहरे संबंध हैं। 

मैसाचुसेट्स इंस्टीच्यूट आफ टैक्नोलॉजी (एम.आई.टी.) में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि नकली समाचार सोशल मीडिया पर वास्तविक समाचारों की तुलना में 6 गुना तेजी से यात्रा करते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि झूठी कहानियां सभी सूचनाओं की सभी श्रेणियों में सत्य की तुलना में अधिक तेजी से, गहराई से और अधिक व्यापक रूप से फैली हुई हैं। इन प्लेटफार्मों पर प्रसारित की जा रही जानकारी अंतत: राजनीतिक और भू-रणनीतिक परिणामों को प्रभावित करती है और इसलिए सूचना युद्ध पाकिस्तान को बहुत रास आ रहा है। श्रीलंका में ईस्टर के समय 2019 में हुए बम धमाकों के फौरन बाद पाकिस्तान का यह संगठन सक्रिय हो गया था और यहां से यह साबित करने की कोशिश की गई थी कि भारत का इन विस्फोटों में हाथ है।-शुजाअत अली कादरी


Content Writer

Pardeep

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