फैसला हिमाचल प्रदेश की जनता ही करेगी

punjabkesari.in Monday, Oct 03, 2022 - 05:29 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पिछले कई दशकों से 2 राजनीतिक पार्टियां ही चुनावों में अपना वर्चस्व कायम करने में सक्षम रही हैं। कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा ने प्रदेश में लम्बे समय तक राज किया है। प्रदेश में केवल एक बार प्रदेश स्तर पर गठित हिमाचल विकास कांग्रेस पार्टी ने 4 सीटें जीतकर तीसरी पार्टी का खाता खोला था। प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर व वरिष्ठ नेता पं. सुखराम ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह नई पार्टी का गठन किया था।

हालांकि हिविकां पार्टी भी बाद में औंधे मुंह गिर गई व उसके विधायक भाजपा में शामिल हो गए जिसके साथ ही प्रदेश में भाजपा व कांग्रेस के विकल्प के तौर पर किसी अन्य राजनीतिक पार्टी का खाता ही बंद हो गया। प्रदेश के लोगों की मजबूरी रही है कि कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा को सत्ता पर काबिज होते देखना पड़ा। इन दोनों पाॢटयों के अलावा कोई अन्य विकल्प सामने नहीं आया। दोनों राजनीतिक दल सत्ता हथियाने के लिए केवल एक-दूसरे दल के नेताओं को लांछन की राजनीति करते आ रहे हैं परंतु प्रदेश वासियों को न तो भ्रष्टाचार, न ही अच्छी नीतियों के न बन पाने की वजह से बढ़ती महंगाई से कोई राहत मिली है।

प्रदेश के साथ सटे पंजाब में इस बार जनता ने वर्षों से जड़ें फैलाए राजनीतिक दलों को धत्ता दिखाकर आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत से जिताया। देश में आम आदमी पार्टी का पहला एक ऐसा राजनीतिक संगठन खड़ा हुआ जिसने एक साथ दो प्रदेशों की कमान संभाली है व इसके साथ ही आम आदमी पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए हिमाचल व गुजरात में भी कमर कस ली है। दिल्ली में सत्ता पर लगातार जीत का परचम लहराने से राष्ट्रीय स्तर की पाॢटयों को कोई स्थान न मिला लेकिन क्या हिमाचल व गुजरात में आगामी चुनावों में राष्ट्रीय स्तर के बड़े दल भाजपा व कांग्रेस में सेंध लगाने में कामयाब हो सकती है या नहीं?

यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन प्रदेश के लोगों को चुनावों के दिनों में लुभावने वायदों से दूर रह कर स्वच्छ प्रशासन व स्वच्छ राजनीतिक आईने की जरूरत है, जिसके लिए अभी तक किसी भी पार्टी ने कोई भी ऐसा आश्वासन नहीं दिया कि चुनाव जीत जाने के बाद महंगाई व भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके। जो राजनीतिक पाॢटयां सत्तासीन होने के लिए मुफ्त में रेवडिय़ां बांटने की घोषणाएं कर रही हैं अच्छा होता अगर वह सिस्टम में सुधार करने का दम भरतीं जिससे प्रदेश वासियों को भ्रष्टाचार जैसे वातावरण से मुक्ति मिलती है।

आम आदमी पार्टी नए राजनीतिक अनुभव से लोगों के लिए एक विकल्प हो सकती है लेकिन जिस तरह से सभी राजनीतिक दलों के एजैंडे में गरीब, असहाय, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन, महंगाई, बेरोजगारी की बात की जाती है परंतु बाद में उन राजनीतिक दलों का एजैंडा पैसा कमाना, भ्रष्टाचार व महंगाई को चरम सीमा तक पहुंचाना पाया जाता है जिससे आम व्यक्ति चुनावों के बाद अपने-आप को ठगा सा महसूस करता है। अक्सर देखने में आता है कि चुनावों से पूर्व राजनीतिक दल करोड़ों रुपए खर्च करते हैं जिसका सीधा असर देश की जनता पर पड़ता है।

उसी पैसे की वापसी के लिए पुन: भ्रष्टाचार पनपता है। इन दिनों कई नेताओं द्वारा दल बदलने का सिलसिला जारी है। यह दलबदलू नेता जिन पाॢटयों में वर्षों रहकर अपनी पहचान बनाते हैं उन्हीं पाॢटयों के शीर्ष नेताओं को अपने स्वार्थ के लिए चुनावों से पहले कोसने से भी नहीं चूकते। यह आम चर्चा है कि क्या चुनावों के समय ही इन नेताओं को शीर्ष नेताओं या नीतियों से बदबू आने लगती है। अगर चुनावों से पहले राजनीतिक पार्टी छोड़ी जाए तो यह एक अच्छी पहल होगी लेकिन चुनावों के दिनों में दल बदलना किसी स्वार्थ से परे नहीं है।

शायद यह नेता लोग प्रदेश की जनता को सिर्फ मूर्ख समझते हैं व दल बदलकर नए समीकरणों से अपनी टिकट व जीत सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह अनुभव भी सामने आया है कि जो नेता दल बदलकर दूसरी पार्टी में गए उनमें से कुछेक नेताओं को छोड़कर अधिकांश नेताओं को हार का स्वाद चखना पड़ा। अभी तक प्रदेश में कांग्रेस पार्टी एक लिस्ट जारी करके प्रत्याशियों की घोषणा जारी करती है, वहीं भाजपा ने अभी तक कोई लिस्ट जारी नहीं की जबकि आम आदमी पार्टी ने भी कुछ प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है जबकि भाजपा ने कई मंत्रियों व विधायकों की कारगुजारी के हिसाब से टिकट काटने की बात कही है।

प्रदेश में कौन सी राजनीतिक पार्टी अपना वर्चस्व दिखाती है, यह तो चुनावों के बाद ही पता चलेगा लेकिन आज की तारीख में भ्रष्टाचार, महंगाई व बेरोजगारी मुख्य समस्या बनी हुई है। यह फैसला प्रदेश की जनता ही करेगी कि उन्हें लुभावने वायदों व लॉलीपोप देने वाले दलों को सत्तासीन करना है या स्वच्छ प्रशासन व भ्रष्टाचार मुक्त सरकार बनानी है।-सरोज मौदगिल


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