‘अब अर्थव्यवस्था में सुधार का सकारात्मक परिदृश्य’

2020-11-17T02:39:15.197

यकीनन कोविड-19 की कठोर आर्थिक चुनौतियों के बाद अब दीपावली पर अर्थव्यवस्था कुछ मुस्कुराते हुए दिखाई दी है और इस मुस्कुराहट के आगे भी बने रहने की सकारात्मक संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं। चालू वित्त वर्ष 2020-21 में अप्रैल से सितम्बर 2020 के बीच की दो तिमाहियों में सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में भारी गिरावट के बाद अब चालू वित्त वर्ष की अक्तूबर से दिसम्बर की तिमाही में जी.डी.पी. में सुधार की तस्वीर दिखाई दे रही है। 

हाल ही में 12 नवम्बर को रेटिंग एजैंसी मूडीज ने भारत के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान आॢथक गतिविधियों में आने वाली कमी के अनुमान को संशोधित किया है। मूडीज ने अब भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.9 फीसदी गिरावट आने का अनुमान जताया है, जबकि पहले उसने 9.6 फीसदी गिरावट आने का अनुमान लगाया था। भारतीय रिजर्व बैंक के नए अध्ययन के अनुसार, यदि अर्थव्यवस्था में सुधार की वर्तमान गति बरकरार रही तो भारतीय अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही यानी अक्तूबर से दिसम्बर में ही गिरावट के दौर से बाहर आ जाएगी और फिर विकास दर बढऩे लगेगी। 

इसमें कोई दो मत नहीं है कि मार्च से अक्तूबर 2020 तक सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दी गई विभिन्न राहतों से तेजी से गिरती हुई अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। साथ ही सरकार की ओर से जून 2020 के बाद अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोलने की रणनीति के साथ राजकोषीय और नीतिगत कदमों का अर्थव्यवस्था पर अनुकूल असर पड़ा है। यद्यपि अभी देश महामारी से नहीं उबरा है, लेकिन अर्थव्यवस्था ने तेजी हासिल करने की क्षमता दिखाई है। कोरोना काल में सरकार को उन सुधारों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है, जो दशकों से लंबित थे। 

यदि हम अर्थव्यवस्था की तस्वीर को देखें तो पाते हैं कि अब सेवा कर (जी.एस.टी.) संग्रह मार्च 2020 से अब तक के 8 माह में पहली बार अक्तूबर 2020 में एक लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा है। अक्तूबर 2020 में 1.05 लाख करोड़ रुपए का जी.एस.टी. संग्रह हुआ जो पिछले साल अक्तूबर के 95,379 करोड़ रुपए से करीब 10 फीसदी अधिक है। इतना ही नहीं, यह आकार कोविड से पहले फरवरी 2020 में प्राप्त जी.एस.टी. के लगभग बराबर है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि अक्तूबर 2020 में प्रकाशित न्यूनतम एक करोड़ रुपए राजस्व वाली 470 सूचीबद्ध कम्पनियों के वित्तीय परिणामों से आभास मिल रहा है कि अब अर्थव्यवस्था में सुधार की शुरूआत हो चुकी है। दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं, सूचना प्रौद्योगिकी, वाहन कलपुर्जा, फार्मा सैक्टर, इस्पात और सीमैंट आदि क्षेत्रों का प्रदर्शन आशा से भी बेहतर रहा है। आई.टी. क्षेत्र की विभिन्न बड़ी कम्पनियों की ओर से भी आशावादी अनुमान जारी हुए हैं। 

यदि हम अप्रैल 2020 से अक्तूबर 2020 तक के विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के आंकड़ों का मूल्यांकन करें तो यह पूरा परिदृश्य आशान्वित होने की नई संभावनाएं देता है। देश में पैट्रोल व डीजल की खपत अक्तूबर 2020 में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 6.6 प्रतिशत बढ़ी है। इससे औद्योगिक एवं सेवा गतिविधियों के तेजी से आगे बढऩे का परिदृश्य दिखता है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि लॉकडाऊन की चुनौतियों के बाद अब नवम्बर 2020 में देश का ऑटोमोबाइल सैक्टर, बिजली सैक्टर, रेलवे माल ढुलाई सैक्टर सुधार के संकेत दे रहा है। निर्यात बढऩे की प्रवृत्ति के साथ-साथ शेयर बाजार भी अच्छी बढ़त दर्ज कर रहा है। 10 नवम्बर को बी.एस.ई. सैसेंक्स 43000 के पार पहुंच गया है। इसी तरह देश का विदेशी मुद्रा भंडार 568.49 अरब डॉलर की सर्वोच्च ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया है। 

निश्चित रूप से पटरी पर आती हुई देश की अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के लिए एक और आर्थिक पैकेज की जरूरत अनुभव की जा रही थी। ऐसे में हाल ही में 12 नवम्बर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत तीसरे आॢथक पैकेज में अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने के लिए 2.65 लाख करोड़ रुपए की धनराशि खर्च करने का ऐलान किया है। नए तीसरे आॢथक पैकेज में दो तरह की राहतें शामिल हैं। एक, 10 उद्योग क्षेत्रों के लिए 1.46 लाख करोड़ रुपए की उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन (पी.एल.आई.) स्कीम और दो, अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के लिए रोजगार सृजन, ऋण गारंटी समर्थन, स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास, रियल एस्टेट कम्पनियों को कर राहत, ढांचागत क्षेत्र में पूंजी निवेश की सरलता, किसानों के लिए उर्वरक सबसिडी, ग्रामीण विकास तथा निर्यात सैक्टर को राहत देने के 1.19 लाख करोड़ रुपए के जोरदार प्रावधान हैं। 

नि:संदेह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित किए गए तीसरे आॢथक पैकेज से अर्थव्यवस्था के सभी सैक्टर को प्रोत्साहन मिलेगा। खासतौर से अनौपचारिक क्षेत्र में नौकरियों के सृजन को प्रोत्साहन मिलेगा। बगैर बिके मकानों की बिक्री बढऩे से रियल एस्टेट को फायदा मिलेगा। बुनियादी ढांचा क्षेत्र का विकास बढ़ेगा। नई ऋण गारंटी योजना से संकटग्रस्त उद्योग लाभांवित होंगे। किसानों के साथ-साथ ग्रामीण विकास, एम.एस.एम.ई. सैक्टर और निर्यात सैक्टर को भी लाभ होगा। हम उम्मीद करें कि सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित किए गए तीसरे आर्थिक पैकेज के साथ-साथ पूर्व में घोषित किए गए आॢथक पैकेजों के तहत क्रियान्वयन और नियंत्रण पर कारगर तरीके से ध्यान देगी, इससे  मांग में नई जान फूंकी जा सकेगी और अर्थव्यवस्था को गतिशील किया जा सकेगा।-डा. जयंतीलाल भंडारी


Pardeep

Related News