नया कांग्रेस अध्यक्ष गांधी परिवार के राडार पर रहेगा

punjabkesari.in Tuesday, Oct 04, 2022 - 03:49 AM (IST)

तीनों गांधी सोनिया, राहुल और प्रियंका का अब क्या होगा? क्या उनका पार्टी पर दबदबा बना रहेगा? जब एक रिपोर्टर ने उनकी भविष्य की भूमिका के बारे में पूछा तो सोनिया ने कहा, ‘‘बेशक मुझे लगता है कि आपको पार्टी से पूछना होगा।’’ लेकिन एक स्पष्ट गेम प्लान देखा जा सकता है। गांधी परिवार अब पार्टी में कोई पद धारण किए बिना और बिना किसी जवाबदेही के निर्णय लेने वाला होगा। सोनिया गांधी राजमाता बनेंगी और प्रियंका शक्ति का केंद्र होंगी लेकिन रिमोट राहुल के पास होगा। 

जैसा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदम्बरम ने एक साक्षात्कार में कहा है, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष हो या न हो राहुल का पार्टी में हमेशा एक प्रमुख स्थान रहेगा। 1921 और 1948 के बीच महात्मा गांधी कांग्रेस के स्वीकृत नेता थे और बाद में उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी को इसकी बारीकियां बताईं। कांग्रेस के इतिहास में ऐसे मौके रहे हैं जब नेता और अध्यक्ष एक ही व्यक्ति था। ऐसा भी समय रहा है जब लम्बे समय से नेता और अध्यक्ष अलग-अलग व्यक्ति थे। अगर राहुल गांधी चुने जाते हैं, तो वह नेता और अध्यक्ष दोनों होंगे लेकिन यदि नहीं तो वह पार्टी के स्वीकृत नेता बने रहेंगे।’’ 

जहां कांग्रेस ने 22 वर्षों बाद चुनाव के लिए अपने दरवाजे खोले हैं वहीं अब मुकाबला 71 वर्षीय गांधी परिवार के वफादार मल्लिकार्जुन खडग़े और 66 वर्षीय शशि थरूर के बीच में है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश रखने वाले खडग़े के पास आखिरकार पार्टी का नेतृत्व करने का मौका है। नेहरू -गांधी परिवार से बाहर कांग्रेस पार्टी के कम से कम 13 अध्यक्ष रह चुके हैं, इनमें जे.बी. कृपलानी, बी. पट्टाभि, सीता रमैया, पुरुषोत्तम दास टंडन, यू.एन. ढेबर, एन. संजीवा रैड्डी, के. कामराज, एस. निजलिंगप्पा, जगजीवन राम, शंकर दयाल शर्मा, डी.के. बरूआ, के.बी. रैड्डी, पी.वी. नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी। 

यह डी.के. बरूआ थे जिन्होंने कहा था कि ‘इंदिरा भारत है और भारत इंदिरा है।’ कांग्रेस पार्टी में भी कोई नई बात नहीं है। यह 1950 की बात है जब टंडन और कृपलानी ने चुनाव लड़़ा था और स. वल्लभ भाई पटेल के वफादार टंडन ने प्रधानमंत्री नेहरू की पसंद को पछाड़ते हुए इस प्रतियोगिता को जीता था। कांग्रेस ने आखिरी बार वर्ष 2000 में चुनाव करवाया था जब दिवंगत जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी को चुनौती दी थी। जैसे कि उम्मीद थी उन्होंने जितेंद्र प्रसाद को 9448 मतों के मुकाबले आसानी से हरा दिया था। 

राहुल गांधी की घटना एक दायित्व बन गई है क्योंकि वह वोट पकडऩे वाले नहीं हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस पार्टी में सबसे महत्वपूर्ण नियुक्तियां और राहुल के फैसले ठीक ही रहे। बेशक ये सभी जिम्मेदारियों के बिना हैं। गांधी परिवार ने एक वफादार को उम्मीदवार के रूप में आगे किया है। सोनिया गांधी ने अपना पद संभालने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को प्रेरित किया था। 

नाटकीय ढंग से, राजस्थान में लगभग 90 कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी के आलाकमान को चौंकाते हुए अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र दिया। गहलोत मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख दोनों ही पद संभालना चाहते थे। जबकि गांधी परिवार एक व्यक्ति, एक पद की अवधारणा पर जोर देता था। सोनिया ने गहलोत को बुलाया जिसके बाद वह पीछे हट गए। फिर उसके बाद एक डमी अध्यक्ष की तलाश शुरू की  गई और खडग़े ने अपनी भूमिका निभाई। 

राहुल ने इस महीने 3500 किलोमीटर की कठिन पद यात्रा करने का निर्णय किया है। उनका कहना है, ‘‘मैं कांग्रेस पार्टी का सदस्य हूं और पार्टी की विचारधारा से सहमत व्यक्ति के रूप में मैं इस यात्रा में भाग ले रहा हूं। मुझे इस यात्रा में भाग लेने में कोई विरोधाभास नहीं दिखता है।’’

अगले कांग्रेस अध्यक्ष के हाथ में एक अविश्वसनीय कार्य होगा। एक तरफ तो उसे आलाकमान को प्रबंधित करना और दूसरी तरफ संगठन को फिर से जीवंत करना होगा। नया अध्यक्ष गांधी परिवार के राडार पर रहेगा। नए कांग्रेस अध्यक्ष को राहुल की सलाह है, ‘‘आप विचारों के एक समूह, एक विश्वास प्रणाली और भारत के एक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं।’’ उन्होंने विस्तार से आगे कहा, ‘‘हमने उदयपुर में जो फैसला किया उस पर हम उम्मीद करते हैं कि प्रतिबद्धता बनाई रखी जाएगी जिसका अर्थ है ‘एक आदमी एक पद’।’’

राजनीतिक नेतृत्व हमेशा गांधी परिवार के साथ रहा है और यहां तक कि गैर-गांधी अध्यक्ष भी उनके प्रति निष्ठावान रहे हैं तो स्पष्ट है कि चाहे वह निर्वाचित हो या नहीं गांधी परिवार हमेशा हावी रहेगा।-कल्याणी शंकर 
 


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