मुम्बई पुलिस प्रमुख तथा ‘रिपब्लिक टी.वी. में खींचातानी’

2020-10-15T02:22:21.443

मुम्बई के पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह तथा रिपब्लिक टी.वी. के प्रमुख के बीच खींचातानी देखने में बहुत दिलचस्प हो गई है। दोनों ही नायक एक अनुभवी वाद-विवाद करने वाले लोग हैं जोकि अंतिम सांस तक लडऩे के लिए हिचकिचाएंगे नहीं। 

मैं किसकी ओर हूं? नि:संदेह परमबीर की ओर। यह इस कारण नहीं कि वह पुलिस से संबंध रखते हैं बल्कि इसलिए कि अर्णब गोस्वामी के रिपब्लिक टी.वी. पर टैलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स (टी.आर.पी.) बढ़ाने का आरोप है जो देखने में एक वाद-विवाद करने वाले के लिए छोटा-सा अपराध लगता है। अर्णब ने अपने चैनल पर एक शातिर  नफरत से भरा कैंपेन चलाया जोकि प्यार में पागल युवा लड़की रिया चक्रवर्ती के खिलाफ था। उस पर हत्या करने के आरोप लगाए गए जो कभी हुए ही नहीं। 

निष्कर्ष निकालने के लिए इसे किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की। उसका बेजान शरीर उसके बैडरूम की सीङ्क्षलग से लटक रहा था जो भीतर से लॉक्ड था। उसे एक ताला खोलने वाला व्यक्ति ही खोल सकता था। इसे तोडऩे के लिए कम से कम 4 घंटे का समय लगना था। ताला लगे कमरे में केवल एक भूत ही प्रवेश कर सकता था तथा उस गरीब अभिनेता की हत्या करने के बाद बाहर आ सकता था। रिया पर आरोप लगाने वाले लोग शायद भूत में विश्वास करते होंगे मगर मैं नहीं करता। 

एम्स की फोरैंसिक मैडीकल विशेषज्ञों की 7 लोगों की टीम ने एकमत होकर कहा कि सुशांत की मौत का कारण आत्महत्या ही थी। मगर रिया पर आरोप लगाने वाले व्यक्ति टस से मस नहीं हुए जो वह आरोप लगा रहे हैं वही बेहतर जानते होंगे। कागजों की फिर से जांच करने के लिए वे लोग फोरैंसिक विशेषज्ञों के एक और सैट की मांग कर रहे हैं। मेरा मानना है कि वह निरंतर ही इस मांग को दोहराते रहेंगे जब तक कि एक भटका हुआ विशेषज्ञ उनका समर्थन नहीं करता। अगर ऐसा हुआ तो यह गैर-पेशेवराना व्यवहार का उच्चतम स्तर हो सकता है। 

मैं यह कहने की हिम्मत रखता हूं कि एम्स के 7 निडर डाक्टर जिनका कूपर हॉस्पिटल फोरैंसिक टीम की पोस्टमार्टम जांच पर एकमत था, पर भीतरी लोगों से दबाव पड़ा था। फिर भी वह अपनी बात से हटे नहीं। मैं इसके लिए उनकी प्रशंसा करता हूं और ऐसे लोगों के समक्ष अपना आलौकिक हैट उतारता हूं जिन्होंने न्याय तथा सच्चाई की पालना की। केंद्रीय वित्त मंत्रालय को सुशांत सिंह राजपूत के वित्तीय संबंधी मामलों की जांच करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) को लगाने के लिए किसने प्रेरित किया? ई.डी. ने कुछ भी संदेह वाला लेन-देन नहीं पाया। मगर इसने सुशांत के घरेलू स्टाफ तथा रिया चक्रवर्ती के बीच संदेशों के आदान-प्रदान को पाया जिसने दर्शाया कि सुशांत को नारकोटिक की सप्लाई की गई। इसी ने शायद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एन.सी.बी.) को महत्वपूर्ण सूचना दी जिसके बाद लोगों की धरपकड़ शुरू हुई। 

शुरू-शुरू में मेरे शहर में अन्यों की तरह मैंने सोचा कि अमित शाह एंड कम्पनी शिवसेना के नेतृत्व वाले गठबंधन के पीछे पड़ी है जो महाराष्ट्र पर शासन कर रहा है। ऐसा समाचार भी गर्माहट में था कि आदित्य ठाकरे सुशांत के घर पर एक पार्टी में शामिल हुए तथा यह पार्टी अभिनेता द्वारा ही आयोजित की गई थी। यह एंगल भी भरोसा देने वाला लगता है। इस कारण छोटी-मोटी बातों को खोजने के लिए ई.डी. को लगाया गया जो अघाड़ी को अस्थिर कर सके। बिहार में हस्तक्षेप योग्य मामला दर्ज करना तथा केंद्रीय गृह मंत्री के ‘पिंजरे वाले तोते’  सी.बी.आई. की जांच ट्रांसफर करना एक शंका वाली बात प्रकट करता है कि नीतीश कुमार तथा उसकी सहयोगी भाजपा की किस्मत इन जांचों पर ही निर्भर करती थी। मगर ऐसा नहीं हुआ। 

सी.बी.आई. स्पष्ट तौर पर आत्महत्या को हत्या में नहीं बदल सकती। ई.डी. द्वारा अभिनेता के बैंक अकाऊंट से हुई चोरी को भी ठुकरा दिया गया। यह महत्वपूर्ण बात है कि रिया सुशांत के घर से एक दिन पहले चली गई जब उसकी (सुशांत की) बहन को वहां पहुंचना था। सुशांत की बहन उनकी आत्महत्या से एक दिन पूर्व ही चली गई। क्या राजपूत परिवार सुशांत के रिया के साथ प्रेम संबंधों को मान्यता नहीं देता था और इसी बात ने सुशांत को अपना जीवन देने के लिए कहा गया? क्या ये सब बातें आत्महत्या को उकसाने वाली थीं? मुझे इस पर शंका है। मुझे इस बात पर भी शंका है कि रिया सुशांत को अपनी जान देने के लिए चाहती थी।

पैसा, ऊर्जा तथा समय को केंद्रीय गृह तथा वित्त मंत्रालयों द्वारा रिया को मोडऩे पर खर्च किया गया। क्या यह कोई फायदे वाली बात थी? हालांकि नीतीश कुमार ने अपना चुनावी अभियान मृत अभिनेता को लेकर शुरू किया। यकीनन देश तथा बिहार ने प्रेम कहानी जिसका अंत दुखद हुआ, से बढ़ कर और भी कई बड़ी परेशानियों को झेला है। 

अब राष्ट्र यह नहीं जानना चाहता कि क्या अर्णब गोस्वामी ने टी.आर.पी. को लेकर चीट किया? हमारे देश में ज्यादातर वाद-विवाद करने वाले लोग चीट करते हैं मगर टी.आर.पी. के मामले में नहीं। मगर अपने करियर या फिर अपने भाग्य को बदलने के लिए लोग चीटिंग करते हैं। इसलिए राष्ट्र को ऐसे मामलों में क्या दिलचस्पी है। क्या टी.वी. चैनल के प्रमुख एंकर ने सुशांत की मौत को लेकर देश को गुमराह किया?  टी.वी. चैनल न्यायालय के समांतर कार्रवाइयां करने लग पड़े हैं।-जूलियो रिबैरो(पूर्व डी.जी.पी. पंजाब व पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी)


Pardeep

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