कौन अपनी मां को ‘पत्थर’ मारता है

06/09/2020 10:55:44 AM

एक सामान्य कश्मीरी मानसिकता  कुछ इस तरह की है कि ‘‘हम भारत से प्यार करते हैं, हम गांधी का अनुसरण करते हैं, हम पाकिस्तान से नफरत करते हैं लेकिन हमारे युवा असंतुष्ट हैं और भारत सरकार को उनसे बात करनी चाहिए।’’खैर, इसके बारे में बात करते हैं। आप क्या चाहते हैं कि भारत सरकार असंतुष्ट युवाओं को यह बताए कि अपने देश को प्यार कैसे करें? भारत सरकार आपको यह बताए कि क्योंकि आपके पास नौकरी नहीं इसलिए आप पत्थर उठाएं? अपने स्वयं के राष्ट्र तथा उसके सैनिकों को जो आपकी रक्षा कर रहे हैं को कभी भी आरोपित न करें। इसके विपरीत हमें भारत के अंदरुनी मामलों में हस्तक्षेप तथा धार्मिक कट्टरता के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया जाना चाहिए जिसके कारण सभी मुसीबतें, ङ्क्षचताएं, इंटरनैट बंद, स्कूल बंद, घरों को नुक्सान पहुंचना तथा निर्दोषों की हत्याएं होती हैं। क्या ये बातें हमारे युवाओं को सिखाई जानी चाहिएं?

मुझे  इससे थोड़ा पीछे झांकना होगा। 
*क्या सरकार को अपनी मां से प्यार करने के लिए युवाओं को पढ़ाने की जरूरत है?
*अगर मां आपके पिता को दिल का दौरा पडऩे से बचाने के लिए खाने में नमक कम डालती है तो क्या आप पूरे मोहल्ले के सामने इसकी शिकायत करेंगे?
*अगर मां आपको स्कूल भेजने में असमर्थ है क्योंकि स्कूल की इमारत पाकिस्तानी दरिंदों द्वारा नष्ट कर दी गई थी तो क्या आप अपनी मां के ऊपर पत्थर मारोगे?
*यदि आपकी मां से आपके पिता ने वायदा किया था कि आपको एक उपहार लाकर देंगे लेकिन आपकी मां जो इस समय आपके पिता का दायित्व निभा रही है, कहती है कि वह उस उपहार को व्यावहारिक कारणों से दे नहीं सकती तो क्या आप अपने परिवार से आजादी मांगोगे?

सरकार या ईश्वर से किसी भी प्रकार की काऊंसङ्क्षलग आपकी विकृत मानसिकता बदल  नहीं सकती। कुछ चीजें हैं जो आपको आत्मनिरीक्षण करने और अपने लिए सोचने के लिए चाहिएं। यह सोचने की बजाय कि देश ने आपके लिए क्या किया है, यह सोचें कि आप देश के लिए क्या कर रहे हैं? आप राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर विश्वास करते हैं। क्या गांधी जी ने ऐसा कहा था कि कांग्रेस को छोड़कर आप किसी भी अन्य सरकार का सम्मान न करें?  आपका कहना है कि हिन्दू अनुचित हैं उन्हें इस्लाम फोबिया तथा मुस्लिम घृणा को रोकना चाहिए। आपको लगता है कि कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को भूल जाएं और लापरवाही से आगे बढ़ते जाएं? आपको यह भी लगता है कि मुगल आक्रमणकारियों द्वारा किए गए जुल्म को भुला दिया जाए? आप किसी के लिए कुछ कर गुजरने में विश्वास नहीं रखते। आप तो ऐसे लोग हैं जो किसी भी कीमत पर प्रसन्न होना चाहते हैं। 


आप कहते हैं कि आपका गांधी में अटूट विश्वास है तो क्या गांधी ने कभी कहा कि  ‘‘पहले अंग्रेज को थप्पड़ मारो और उसके बाद यह सोचो कि उन्हें कैसा महसूस होता है?’’ नहीं। गांधी जी ने कहा था कि ‘‘अगर वे थप्पड़ मारते हैं तो अपने दूसरे गाल को आगे रखो।’’ गांधी जी ने ऐसे लोगों का दिल जीता। उन्होंने इस तरह शांति का प्रचार किया तो सवाल पैदा होता है कि क्या वाकई आप उनकी शिक्षाओं की पालना कर रहे हैं।  बेशक नहीं। क्या आप अपने हिन्दू भाइयों को सर्वसम्मति से सहमति बनाने की क्षमता रखते हैं कि आप मुगल आक्रमणकारियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते और न ही आप सीमा पार से आने वाले जेहाद के कट्टरपंथी रूप का समर्थन करते हैं? आप शिकायत करने के अलावा क्या कुछ और कर रहे हैं? 
(लेखिका एक मुखर कश्मीरी सामाजिक कार्यकत्र्ता, टी.वी. डिबेट पैनलिस्ट तथा द रियल कश्मीर न्यूज की प्रमुख संपादक हैं)


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