3 वर्षों में 5वें चुनाव की ओर बढ़ रहा इसराईल

punjabkesari.in Friday, Jun 24, 2022 - 07:32 AM (IST)

इसराईल की नाजुक और अल्पकालिक गठबंधन सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि वह संसद को भंग करने के लिए अगले सप्ताह एक विधेयक प्रस्तुत करेगी, जिससे 3 साल में 5वें चुनाव और देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता में संभावित वापसी के लिए मंच तैयार होगा। 2019 और 2021 के बीच इसराईल के पिछले 4 चुनाव मूल रूप से इस बात पर जनमत संग्रह थे कि क्या नेतन्याहू गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुकद्दमे का सामना करते हुए शासन कर सकते हैं। नवम्बर 2019 में आरोपित किए गए नेतन्याहू ने आरोपों से इंकार किया है। 

सत्तारूढ़ गठबंधन के सत्ता-सांझाकरण समझौते के अनुसार, एक बार बिल पास हो जाने के बाद, दक्षिणपंथी राजनीतिक गठबंधन यामिना के नेता, प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट, पद छोड़ देंगे और उदारवादी मध्यमार्गी येश अतीद पार्टी के नेता विदेश मंत्री यायर लैपिड नई सरकार बनने तक अंतरिम पी.एम. बनेंगे। टिप्पणीकारों के अनुसार चुनाव पतझड़ में होंगे। 

वैचारिक रूप से विभाजित गठबंधन, इसराईल के इतिहास में सबसे अलग, ने बेनेट की यामिना के एक विधायक द्वारा दलबदल के बाद अप्रैल में अपना कमजोर बहुमत खो दिया। सरकार को 6 जून को सबसे बड़े झटके का सामना करना पड़ा, जब विपक्ष ने विद्रोही गठबंधन सदस्यों के साथ, कब्जे वाले वैस्ट बैंक में बसने वाले इसराइलियों के लिए कानूनी सुरक्षा का नवीनीकरण करने के उद्देश्य से एक बिल को हराने में मदद की। 

चुनावी प्रक्रिया : इसराईल के पास एक लिखित संविधान नहीं है और इसके मूल कानूनों के अनुसार, संसद के चुनाव हर 4 साल में होते हैं, जब तक कि नेसेट एक साधारण बहुमत से संसद भंग करने जल्दी चुनाव कराने का फैसला नहीं करता। भारत के विपरीत, इसराईल के मतदाता पार्टियों को वोट देते हैं, विशिष्ट उम्मीदवारों को नहीं। 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी इसराईली नागरिक मतदान के पात्र हैं। नेसेट में 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए एक पार्टी को कम से कम 61 की जरूरत होती है। अक्सर सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए एक पखवाड़े के संभावित विस्तार के साथ 28 दिनों का समय दिया जाता है। 

2 साल, 4 चुनाव : 2015 में अपना चौथा कार्यकाल जीतने के बाद, दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेतन्याहू अंतिम समय में एक सत्तारूढ़ गठबंधन बनाने में सफल रहे। लेकिन उन्हें अपने रक्षा मंत्री एविग्डोर लिबरमैन, दक्षिणपंथी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवादी यिसराईल बेइटिनु पार्टी के नेता, के इस्तीफे के बाद, अप्रैल 2019 में संसद को भंग करने और मध्यावधि चुनाव कराने के लिए मजबूर होना पड़ा।

हालांकि, नेतन्याहू सरकार बनाने के लिए सीटें सुरक्षित रखने में असफल रहे और सितम्बर 2019 में एक और चुनाव हुआ। लेकिन फिर से, न तो नेतन्याहू और न ही ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के उनके प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज सरकार बनाने में सक्षम थे। इसराईली प्रणाली में, गतिरोध को तोडऩे का एकमात्र तरीका किसी को बहुमत मिलने तक चुनाव कराना है, इसलिए मार्च 2020 में तीसरा चुनाव हुआ, जो फिर से अनिर्णायक था। 

अप्रैल 2020 में, नेतन्याहू अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गैंट्ज के साथ एक ‘आपातकालीन’ गठबंधन सरकार बनाने में सफल रहे। यह कमजोर गठबंधन केवल 7 महीने तक चला, दिसम्बर में, खंडित सत्तारूढ़ गठबंधन नेसेट में बजट पारित करने में असफल रहा, मार्च 2021 में चौथा चुनाव शुरू हुआ। 

एक नया गठबंधन : नेतन्याहू, जो इस अवधि के दौरान कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहे, ने आखिरकार जून 2021 में 12 साल बाद सत्ता खो दी, क्योंकि नेसेट ने बेनेट को नए प्रधानमंत्री के रूप में मंजूरी दे दी। गठबंधन समझौते के आधार पर लैपिड को 2 साल में उनकी जगह लेनी थी। आठ-पक्षीय गठबंधन में वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों दल और धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक दोनों समूह शामिल थे। पहली बार, यूनाइटिड अरब लिस्ट या ‘राम’नामक एक अरबी पार्टी  ने सरकार में प्रवेश किया। इन पार्टियों में बहुत कम समानता थी, नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की इच्छा ने उन्हें अनिवार्य रूप से एकजुट रखा। 

अब क्या हुआ : जब इसराईल चुनावों की प्रतीक्षा कर रहा है, कानूनी बाधाओं और छुट्टी में देरी के कारण अक्तूबर के अंत में, नेतन्याहू ने घटनाक्रम को ‘लाखों इसराईली नागरिकों के लिए अच्छी खबर’ कहा है और प्रधानमंत्री के रूप में वापसी की कसम खाई है। हाल के जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, नेतन्याहू की लिकुड के अगले नेसेट में सबसे बड़ी होने की संभावना है। जैसा कि हाल के चुनावों ने दिखाया है, जो अनिश्चित बना हुआ है, क्या वह एक सत्तारूढ़ गठबंधन को एक साथ लाने में सक्षम होंगे? द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पार्टियां लिकुड के साथ गठबंधन करना चाहेंगी, अगर नेतन्याहू पार्टी के नेता के रूप में इस्तीफा दे दें। पूर्व प्रधानमंत्री ने धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी और विश्वास के उल्लंघन के आरोपों को खारिज कर दिया है, जिसके लिए वह वर्तमान में ‘संदिग्ध’ के रूप में मुकद्दमे का सामना कर रहे हैं।-रघु मल्होत्रा 


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