ड्रग्स लेने वालों के साथ एक रोगी जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए

10/15/2021 3:39:00 AM

यदि आर्यन शाहरुख खान का बेटा नहीं होता तो एन.सी.बी. एक क्रूज लाइनर कारडेलिया, जो गत सप्ताह मुम्बई से गोवा जा रहा था पर कुछ युवाओं से अन्य ड्रग्स के अलावा मुख्य रूप से चरस की बरामदगी के लिए नगर से दूर नहीं जाती। डी.आर.आई. (डायरैक्टोरेट ऑफ रैवेन्यू इंटैलीजैंस यानी राजस्व खुफिया निदेशालय) ने गत सप्ताह अडानी द्वारा संचालित गुजरात स्थित मुंद्रा बंदरगाह से वास्तव में एक बहुत बड़ी खेप पकड़ी। अफगानिस्तान से लगभग 3000 किलो हैरोइन ईरान के माध्यम से भारत के बाजारों के लिए भेजी गई। चार अफगान नागरिकों, एक उज्बेक, विशाखापट्टनम से आंध्र के एक दम्पति, जिनके नाम पर खेप बुक करवाई गई थी, सहित इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 

हाल ही में इसी दम्पति से ऐसी ही खेप बरामद की गई जिसे टैल्कम पाऊडर का नाम दिया गया था जिसे ईरान की बांदार अब्बास बंदरगाह से मुंद्रा पोर्ट पर भेजा गया था। मामला एन.आई.ए. के सुपुर्द किया गया है। इसे जितनी कवरेज मिली है उससे कहीं ज्यादा मिलनी चाहिए थी। अफानिस्तान से आने वाली ड्रग्स संदिग्ध तौर पर आतंक के वित्त पोषण से संबंधित हैं।

ड्रग्स व्यापार के आपूर्ति पक्ष तथा इसकी अंतर्राष्ट्रीय शाखाओं के साथ एन.सी.बी. जैसी शीर्ष इन्फोर्समैंट इकाइयों द्वारा बेहतर तरीके से निपटा गया जिसे स्थानीय पुलिस बल के लिए केवल मांग के साथ निपटना बाकी रह गया। मगर मांग पक्ष स्वाभाविक तौर पर अधिक आकर्षक था और इस कारण यह अधिक रोमांचक भी है। जब इसमें बॉलीवुड शामिल हो गया तो यह और भी अधिक रोमांचक बन गया। अभिनेताओं के निजी जीवन में इसका दखल सुॢखयां बन गया। और अब स्टार्स की युवा संतानें लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में गौरी तथा शाहरुख खान का अमरीका से लौटा 23 वर्षीय बेटा आर्यन खान, जो वहां फिल्म प्रोड्यूसर बनने के लिए अध्ययन कर रहा था, एजैंसी का निशाना बन गया जो प्रचार तथा पहचान की भूखी थी। 

एक भाजपा कार्यकत्र्ता मनीष भानुशाली तथा उसके संदेहास्पद मित्र जी.पी. गोसावी, जो धोखाधड़ी, प्रताडऩा तथा ऐसे ही अपराधों में चार बार आरोपित हो चुका है, इन्फॉर्मर के रूप में एन.सी.बी. के भाग्य  से उसके मुम्बई कार्यालय में पहुंचे। अब ये दोनों इन्फॉर्मर्स के साथ-साथ एन.सी.बी. के ‘कांस्टेबल्स’ के तौर पर ड्रग इस्तेमाल करने के आरोपी डरे हुए आर्यन खान को एन.सी.बी. के कार्यालय से अदालत तथा कुछ अन्य स्थानों तक एस्कॉर्ट करते हैं जिनको टी.वी. पर नहीं दिखाया जाता। भाजपा ‘कार्यकत्र्ता’ का शामिल होना मुझमें संदेह पैदा करता है कि सत्ताधारी पार्टी सुशांत सिंह राजपूत की जांच से शुरू होकर बॉलीवुड को निशाना बना रही है ताकि वे मीडिया के लोगों को उनके घुटनों पर लाने के अपने बड़े उद्देश्य पर काम कर सके। कोई भी तानाशाहीपूर्ण पार्टी को अपने अनपकूल तथ्यों को दिखाने के लिए मीडिया को काबू करना जरूरी होता है। सिनेमा एक ऐसा माध्यम है जो बहुत मायने रखता है क्योंकि यह दिमागों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। 

हमारे जैसे किसी लोकतंत्र में कोई भी ऐसा नेता नहीं उभर सकता जो हिटलर, मुसोलिनी, सद्दाम हुसैन, मुअम्मर गद्दाफी, ईदी अमीन तथा उत्तरी कोरिया के तीन किम की तरह विश्व का कुख्यात निरकुंश हो। लेकिन प्रभुत्वशाली विचारधारा के अनुकूल आवाजें अब निश्चित तौर पर सुनने को मिल रही हैं। इसे लेकर एक अच्छी तरह से प्रशिक्षित प्रोपेगंडा मशीन सक्रिय है। मैंने सुना है कि इस बात को लेकर तर्क दिए जा रहे हैं कि ड्रग्स की बीमारी  पर काबू पाने के लिए एन.सी.बी. के लक्ष्य में मांग पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आपूर्ति। जब छोटे तथा संभावित इस्तेमालकत्र्ता प्रसिद्ध व्यक्तियों अथवा उनके बच्चों की गिरफ्तारी के बारे में सुनते हैं तो अपने आप उनके ऐसे कार्यों में शामिल होने में कमी आ जाती है।

हालांकि इस कल्पना का कोई आधार नहीं है। कुछ सामाजिक सर्कलों में ड्रग्स का इस्तेमाल इतना अधिक है कि इसमें केवल एक ही चीज मदद कर सकती है और वह है आपूर्ति को बाधित करना। मेरा अपना विचार है कि ड्रग्स लेने वालों के साथ डाक्टर के क्लीनिक में एक रोगी जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए जिन्हें सजा देने वाले न्याय की बजाय चिकित्सीय देखभाल की जरूरत होती है। 

पुलिस को अपना ध्यान ड्रग्स की आपूर्ति तथा वितरण करने वालों पर केन्द्रित करना चाहिए जो असली खतरा है। जब एन.सी.बी. को इस संबंध में उसकी जिम्मेदारी की याद दिलाई गई तो उसने एक आपूर्तिकत्र्ता तथा वितरण नैटवर्क में शामिल एक नाइजीरियन नागरिक को गिरफ्तार किया। यह चिंता का विषय है कि शहर में बड़ी संख्या में नाइजीरियन निवासी ड्रग्स के व्यापार में शामिल हैं। आर्यन खान के लिए जनता के मन में काफी सहानुभूति पैदा हो गई है। इसका एक कारण यह है कि उसका पिता अत्यंत लोकप्रिय है। दूसरा, आर्यन हमेशा जनता के बीच आने से बचता रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण, गिरफ्तारी के बाद समाचार पत्रों में उसकी तस्वीर में मासूमियत, डर, कुछ पछतावा दिखाई दे रहा था, संभवत: अपने माता-पिता को शर्मिंदा करने के लिए कहीं अधिक आत्मग्लानि। केंद्रीय मंत्रिमंडल में गृह राज्यमंत्री का बेटा जिसे लखीमपुर में प्रदर्शनकारी किसानों की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है, एक बिल्कुल विपरीत तस्वीर है। आशीष मिश्रा टेनी के लिए दुर्भाग्य से उसकी तस्वीरें लगभग उसी समय समाचार पत्रों में प्रकाशित हुईं। हमारे शहर में बहुत से ऐसे लोग हैं जो नहीं समझते कि ये युवा वास्तव में किसी गंभीर अपराध के दोषी हैं।-जूलियो रिबैरो(पूर्व डी.जी.पी. पंजाब व पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी)
 


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