इतनी सख्ती के बावजूद युवाओं तक ड्रग्स कैसे पहुंच जाती हैं

2021-10-11T04:27:53.687

आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें शाहरुख खान सिमी ग्रेवाल को गर्व से कह रहे हैं कि उनका बेटा दो बरस की आयु से ही अगर ड्रग्स ले या सैक्स करे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। अगर यह वीडियो सही है, तो मजाक में भी एक पिता का अपने बेटे के विषय में ऐसा सोचना बहुत चिंताजनक है। हाल में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को क्रूज की ‘रेव पार्टी’ से एन.सी.बी. ने गिरफ्तार किया, जिस पर टी.वी. एंकर कई दिनों से भरतनाट्यम कर रहे हैं, जबकि देश की अन्य कई महत्वपूर्ण दुर्घटनाओं की तरफ उनका ध्यान भी नहीं है। 

34 वर्ष पहले की बात है, ‘न्यूयॉर्क टाइम्ज’ की एक अमरीकी महिला संवाददाता मुझे दिल्ली में किसी मित्र के घर लंच पर मिली। उन दिनों न्यूयॉर्क में ड्रग्स के भारी चलन की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही थी। मैंने उत्सुकतावश उससे पूछा कि तुम्हारे यहां भी क्या पुलिस महकमे में इतना भ्रष्टाचार है कि न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों में ड्रग्स का प्रचलन सरेआम हो रहा है? उसने बहुत चौंकाने वाला जवाब दिया। वह बोली, ‘‘न्यूयॉर्क में साल भर में ड्रग्स के मामले में जितने लोगों को न्यूयॉर्क की पुलिस पकड़ती है अगर वे सब जेल में बंद रहें तो साल भर में आधा न्यूयॉर्क खाली हो जाए।’’ उसके इस वक्तव्य में अतिशयोक्ति हो सकती है, पर उसका भाव यह था कि पुलिस में फैले भारी भ्रष्टाचार के कारण ही वहां ड्रग्स का कारोबार इतना फल-फूल रहा है। 

यह कोई अपवाद नहीं है। जिस देश में भी ड्रग्स का धंधा फल-फूल रहा है, उसे निश्चित तौर पर वहां की पुलिस और सरकार का परोक्ष संरक्षण प्राप्त होता है। वरना हर देश की सीमाओं पर कड़ी सुरक्षा और देश में आने वाले हवाई जहाजों, पानी के जहाजों और सड़क वाहनों की कस्टम तलाशी के बावजूद ड्रग्स कैसे अंदर आ पाते हैं? यह उन देशों के नागरिकों के लिए बहुत ही चिंता का विषय है क्योंकि इस तरह पूरे देश की धमनियों में फैलने वाले ड्रग्स का प्रभाव न सिर्फ युवा पीढ़ी को बर्बाद करता है, बल्कि लाखों औरतों को विधवा और करोड़ों बच्चों को अनाथ बना देता है। 

आर्यन खान के मामले में या उससे पहले रिया चक्रवर्ती के मामले में हमारे मीडिया ने जितनी आंधी काटी, उसका एक अंश ऊर्जा भी इस बात को जानने में खर्च नहीं किया कि गरीब से अमीर तक के हाथ में, पूरे देश में ड्रग्स पहुंचती कैसे हैं? अभी हाल ही में एन.सी.बी. ने गुजरात में अडानी के प्रबंधन में चल रहे बंदरगाह से 3000 किलो ड्रग्स पकड़ी, जो अफगानिस्तान से ‘टैल्कम पाऊडर’ बता कर आयात की गई थी। इस पकड़ के बाद एन.सी.बी. ने जांच को किस तरह आगे बढ़ाया, यह हर पत्रकार की रुचि का विषय होना चाहिए था, पर इस पूरे मामले पर मीडिया ने चुप्पी साध ली। यह हमारे मीडिया के पतन की पराकाष्ठा का प्रमाण है। 

इससे भी बड़ी घटना एक और हुई जिसे मीडिया ने बहुत बेशर्मी से नजरअन्दाज कर दिया, जबकि ड्रग्स के मामले में वह खबर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के इतिहास की शायद सबसे बड़ी खबर होनी चाहिए थी। अभी दो हफ्ते पहले 20 सितम्बर को हैदराबाद से छपने वाले एक अंग्रेजी अखबार ने एक खोजी खबर छापी कि अडानी के ही बंदरगाह के रास्ते जून 2021 में देश में 25 टन ड्रग्स, जिसे भी ‘सैमी कट टैल्कम पाऊडर ब्लॉक’ बताया जा रहा है, भारत में आई, जिसकी कीमत खुले बाजार में 72 हजार करोड़ रुपए है। 

पहला प्रश्न तो यह है कि टी.वी. चैनलों पर उछल-कूद मचाने वाले मशहूर एंकरों ने इस खबर का संज्ञान क्यों नहीं लिया? दूसरी बात, भारत जैसे औद्योगिक रूप से काफी विकसित देश में अफगानिस्तान से ‘टैल्कम पाऊडर’ आयात करने की क्या जरूरत आन पड़ी? दुनिया जानती है अफगानिस्तान पूरी दुनिया में ड्रग्स बेचने का एक बड़ा केंद्र है और ड्रग्स और ‘टैल्कम पाऊडर’ दिखने में एक से होते हैं। इसलिए अफगानिस्तान से अगर कोई ‘टैल्कम पाऊडर’ का आयात कर रहा है तो उसकी जांच-पड़ताल में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। संदेह की सुई इसलिए भी हैरान करने वाली है कि अडानी पोर्ट से राजस्थान की ट्रांसपोर्ट कम्पनी के जिस ट्रक में यह 25 टन माल रवाना किया गया, उसने एक भी टोल बैरियर पार नहीं किया। मतलब दस्तावेजों में ट्रक का नाम, नम्बर फर्जी तरीके से लिखा गया। इस 25 टन की खेप का आयात करने वाला व्यक्ति माछेवरापु सुधाकर चेन्नई का रहने वाला है। इसने अपनी पत्नी वैशाली के नाम ‘आशि ट्रेङ्क्षडग कम्पनी’ के बैनर तले यह माल आयात किया। इस कम्पनी को जी.एस.टी. विजयवाड़ा के एक रिहायशी पते के आधार पर दिया गया है। 

तहकीकात करने पर पता चला कि वह पता वैशाली की मां के घर का है, जहां किसी भी कम्पनी का कोई कार्यालय नहीं रहा। पिछले वर्ष ही पंजीकृत हुई इस कम्पनी का घोषित उद्देश्य काकीनाडा बंदरगाह से चावल का निर्यात करना था, पर पिछले पूरे एक वर्ष में अडानी के बंदरगाह से जून 2021 में आयात किए गए इस 25 टन तथाकथित ‘टैल्कम पाऊडर’ के सिवाय इस कम्पनी ने कोई और कारोबार नहीं किया। इतने स्पष्ट प्रमाणों और इतनी संदेहास्पद गतिविधियों पर देश का मीडिया कैसे खामोश बैठा है? आर्यन खान ने जो किया उसकी सजा उसे कानून देगा, पर उस जैसे देश के करोड़ों युवाओं के हाथों में ड्रग्स पहुंचाने का काम कौन कर रहा है, इसकी भी खोज खबर लेना क्या देश के नामी मीडिया वालों की नैतिक जिम्मेदारी नहीं है?-विनीत नारायण
 


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Content Writer

Pardeep

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