‘अब खुलेगी भ्रष्ट पुलिस अफसरों की पोल’‘लगेंगे थानों तथा सोशल मीडिया पर फोटो’

2020-11-18T02:45:18.5

हमारे देश में रिश्वतखोरी के रोग ने ‘महामारी’ का रूप धारण कर लिया है और बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारी रोज रिश्वत लेते हुए पकड़े जा रहे हैं। शायद ही कोई विभाग ऐसा होगा जो इससे बचा हो। विडम्बना यह है कि पुलिस जैसा विभाग, जिस पर कानून का पालन करवाने का दायित्व है, से जुड़े अफसर भी स्वयं भ्रष्टाचार के मामलों में बुरी तरह संलिप्त पाए जा रहे हैं जिसके मात्र 7 दिनों के 10 उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :

* 10 नवम्बर को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों ने पुलिस थाना अखनूर के जांच अधिकारी मोहम्मद रफीक को एक सड़क दुर्घटना के सिलसिले में 10,000 रुपए की रिश्वत-राशि के साथ पकड़ा। 
* 10 नवम्बर को ही सी.आई.ए. स्टाफ अमृतसर ने एक किलो स्मैक के साथ 2 तस्कर पकड़े। उन्होंने बताया कि वे यह स्मैक गवर्नमैंट रेलवे पुलिस ( जी.आर.पी.) के मुंशी कुलजीत सिंह से लाए थे जिस पर पुलिस ने मुंशी के विरुद्ध भी केस दर्ज किया है। 

* 11 नवम्बर को सतर्कता विभाग होशियारपुर के स्टाफ ने 20,000 रुपए लेकर राजीनामा करवाने के आरोप में  ए.एस.आई. पवन कुमार को पकड़ा तथा इसी केस में संलिप्त इंस्पैक्टर मनोज कुमार की गिरफ्तारी होनी बाकी है। 
* 12 नवम्बर को मोगा में नशा तस्करी में फंसाने की धमकी देकर 50,000 रुपए रिश्वत लेने वाले पी.सी.आर. कर्मी तथा उसके साथी को पकड़ा गया।
* 12 नवम्बर को ही ‘झारखंड’ के रामगढ़ में एक पुलिस कर्मी के खेत में गाय घुस गई तो पुलिस कर्मी ने उसके मालिक को पीट-पीट कर मार डाला।
* 13 नवम्बर को उत्तर प्रदेश में बिजनौर के ‘बढ़ापुर’ थाने में तैनात 3 पुलिस कर्मचारियों को शिकायतकत्र्ता की रेत से भरी गाड़ी पकडऩे के बाद 1500 रुपए रिश्वत लेकर उसे छोड़ देने के आरोप में पकड़ा गया। 

* 13 नवम्बर को ही उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तिकुनिया थाने के इंस्पैक्टर को एक पेड़ काटने वाले ठेकेदार से रिश्वत मांगने पर निलम्बित किया गया।
* 13 नवम्बर को ही राजस्थान के सीकर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने एक रिटायर्ड सेनाधिकारी से उसके परिजनों द्वारा मारपीट का मामला निपटाने के बदले में एक ए.एस.आई. को 15,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा। 
* 17 नवम्बर को शिकायतकत्र्ता द्वारा 1500 रुपए रिश्वत न देने पर पीट कर उसे घायल कर देने के आरोप में उत्तर प्रदेश में ‘भदोही’ की ‘ज्ञानपुर’ पुलिस चौकी के सिपाही रवि कुमार को पकड़ा। 
* 17 नवम्बर को ही गाजियाबाद के ‘लोनी’ थाने का अतिरिक्त निरीक्षक बी.के. त्रिपाठी एक मुकद्दमे की जांच में शिकायतकत्र्ता का बचाव करने के नाम पर एक लाख रुपए रिश्वत मांगने के आरोप में काबू। 

ऐसी ही घटनाओं से पुलिस विभाग की हो रही बदनामी को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस बुराई से निपटने के लिए अब पूरी तरह कमर कस ली है। इसके अंतर्गत देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सभी पुलिस थानों को जारी निर्देशों में अब भ्रष्ट पुलिस अफसरों के चित्र, अपराध में उनकी भागीदारी के पूरे विवरण के साथ थानों के नोटिस बोर्डों पर लगाने के अलावा इसे ‘सोशल मीडिया’ पर व्यापक रूप से प्रचारित करने तथा यह लिखने का भी आदेश जारी किया कि दोषियों के विरुद्ध क्या एक्शन लिया गया है? यह निर्णय सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित न रह कर भारतीय पुलिस सेवा (आई.पी.एस.) से जुड़े भ्रष्ट अफसरों पर भी लागू होगा तथा उनके चित्र भी थानों में प्रमुखता से लगाए जाएंगे। 

भ्रष्ट पुलिस कर्मियों को पकडऩे के लिए पुलिस बलों की ‘आंतरिक सतर्कता इकाई’ मजबूत की गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार ‘कत्र्तव्य पालन से भागने की प्रवृत्ति’ भ्रष्टाचार को बढ़ा रही है। लिहाजा सरकार ने सभी पुलिस प्रमुखों के सोशल मीडिया कंटैंट का विश्लेषण करने के लिए ‘इन हाऊस टीम’ बनाने का निर्देश भी दिया है। 

पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और इसके परिणामस्वरूप देश एवं जन साधारण को बढ़े खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार का यह निर्णय अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। अकेले पुलिस विभाग से जुड़े बड़े कर्मचारियों और अफसरों के ही नहीं, अन्य विभागों से जुड़े कर्मचारियों और अफसरोंं  के चित्र भी उनके अपराधों सहित उनके विरुद्ध की गई दंडात्मक कार्रवाई के विवरण के साथ थानों में प्रदॢशत किए जाएं। इस प्रकार उन्हें नसीहत मिलेगी और वे ऐसा आचरण करने से पहले इस पर अवश्य विचारेंगे।—विजय कुमार


Author

vijay kumar

Related News