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कोरोना कराएगा तीसरा ‘विश्वयुद्ध’

2020-07-08T03:26:20.99

कोरोना वायरस फैलाने को लेकर दुनिया के तमाम देशों का चीन के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अमरीका तो चीन से बेहद नाराज है। वह अपने यहां हुई लाखों मौतों के लिए चीन को जिम्मेदार मानता है। इसका बदला लेने के लिए वह कुछ भी कर सकता है। उधर ताइवान, हांगकांग एवं दक्षिणी चीन सागर को लेकर अमरीका एवं चीन के बीच जिस तरह तनाव बढ़ रहा है, उससे लगता है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के कगार पर पहुंच गई है। दुनिया के तमाम अमीर-गरीब मुल्क कोरोना वायरस के प्रकोप से जिस भयावह त्रासदी झेलने को अभिशप्त हैं, उसकी जवाबदेही से चीन किसी भी तरह मुक्त नहीं हो सकता। 

कोविड-19 के प्रसार पर पर्दा डालने और वक्त रहते विश्व को हकीकत से अवगत कराने में चीन ने जो आपराधिक लापरवाही बरती, विश्व जनमत अब उसे  सबक सिखाने का मन बना रहा है। लंबे समय से चीन के खिलाफ मुखर रहे अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब खुल कर सामने आ गए हैं और चीन को सबक सिखाने के लिए कदम उठा रहे हैं। यूं तो अमरीका व चीन के बीच कारोबारी व सामरिक चौधराहट को लेकर लम्बे समय से टकराव चला आ ही रहा था, मगर कोविड-19 के प्रकोप के बाद यह चरम पर जा पहुंचा है। गत वर्ष दिसम्बर में चीन के कारोबारी शहर वुहान से निकले वायरस का सबसे बड़ा शिकार आज अमरीका ही है, जहां अब तक सबसे ज्यादा लोग जान गंवा चुके और लाखों लोग संक्रमित हैं। अमरीका-चीन के बीच तनाव दिनों-दिन बढ़ रहा है। 

उधर भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में 15 जून को हिंसक झड़प हुई थी। पिछले हफ्ते एक चीनी पनडुब्बी जापान से लगी समुद्री सीमा के पास होकर गुजरी थी। इसके अलावा चीनी लड़ाकू विमान और कम से कम एक बमवर्षक ताईवान की हवाई सीमा से होकर तकरीबन हर रोज गुजर रहा है। एक तरफ दुनिया कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ, चीनी सेना अपने पड़ोसी देशों की सीमा के अंदर घुसने में लगी हुई है। चीन की इन हरकतों से पूरा एशिया महाद्वीप अलर्ट हो गया है। साथ ही अमरीका भी इसे लेकर अलर्ट मोड पर है। चीन और ताईवान के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर लंबे से विवाद चल रहा है। अमरीका इस मसले पर पूरी तरह से ताईवान के साथ खड़ा है। अमरीका ने ताईवान को सपोर्ट करने के लिए अपने युद्धपोत भेजे हैं। अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने हाल ही में एक रेडियो इंटरव्यू में कहा कि ताईवान को अमरीका एफ-16 लड़ाकू विमान बेचने की तैयारी कर रहा है। इस बीच एशियाई देशों में विस्तारवादी चीन से बढ़ रहे खतरे को देखते हुए अमरीका ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अमरीका ने यूरोप से अपनी सेना कम करके एशिया में तैनात करने का फैसला किया है। 

अमरीकी विदेश मंत्री के अनुसार भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में चीन के बढ़ते खतरे और दक्षिण चीन सागर में चुनौतियों को देखते हुए अमरीका अपने सैनिकों को शिफ्ट कर रहा है। इस दिशा में अमरीका जर्मनी में सेना के स्तर में कटौती कर रहा है। चीन का विस्तारवाद हमारे लिए समय की चुनौती है। हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारे पास उससे निपटने के लिए सभी संसाधन उचित जगह पर उपलब्ध हों। अमरीका ने कोरोना को लेकर आप्रेशन चीन की तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में ट्रम्प ने चीन को खुलेआम चुनौती दी थी कि अगर यह गलती थी तो गलती तो गलती होती है लेकिन अगर यह जानबूझकर किया गया तो निश्चित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। 

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस बयान से साफ है कि अब अमरीका और चीन के बीच कोरोना वायरस को लेकर आर-पार की जंग शुरू हो सकती है। ट्रम्प ने चेतावनी भरे लहजे में कह दिया है कि अगर कोरोना वायरस पर चीन के ख्रिलाफ जो भी शंकाएं हैं वे सच साबित हुईं तो चीन को बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन के साथ सख्ती करते हैं तो तीसरे विश्व युद्ध की आशंका है। इस विश्व युद्ध में एक तरफ अमरीका के साथ नाटों देशों की सेनाओं सहित तमाम देश होंगे तो दूसरी तरफ चीन होगा और उसके साथ उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, ईरान सहित कुछ गिने-चुने देश होंगे। रूस की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अब यदि कहीं भी परमाणु युद्ध हुआ तो इसमें न कोई विजेता होगा और न कोई पराजित देश होगा। परमाणु बमों का इस्तेमाल करने वाले देश तो मिट ही जाएंगे और आसपास के देशों में भी भारी तबाही होगी। इन परमाणु बमों की क्षमता नागासाकी और हिरोशिमा पर गिराए गए बमों की तुलना कई हजार गुना ज्यादा होगी। हिरोशिमा शहर को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां इंसानों का क्या हश्र हुआ होगा।

हिरोशिमा पर 580 मीटर की ऊंचाई पर बम विस्फोट किया गया था। बम विस्फोट से बने हाईपोसैंटर से धुएं व आग का गोला 16 हजार मीटर  ऊंचाई तक गया। जिस अमरीकी विमान से विस्फोट के समय फोटो लिए गए थे, उस वक्त 28,480 फुट ऊंचाई पर तथा विस्फोट बिन्दू से 56 हजार फीट की दूरी पर था। विशेषज्ञों के मुताबिक तब आसपास शहर का तापमान तीन हजार से चार हजार डिग्री सैंटीग्रेड हो गया था। जबकि चाय या दूध सिर्फ 100 डिग्री पर उबल जाते हैं। इस विस्फोट के साथ ही काली बारिश ने शहर पर मौत का कफन बिछा दिया जिसका बम बनाने वालों को भी अंदाजा नहीं था। रेडियो एक्टिव किरणों ने अपना काम किया जिसका भुगतान आज की पीढ़ी भी कर रही है। बम विस्फोट के बाद अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था, मैंने उस वक्त अपनी जिंदगी की एक सबसे बड़ी गलती की जब राष्ट्रपति रुजवेल्ट को लिखे लैटर पर एटमी बम का इस्तेमाल करने के लिए हस्ताक्षर किए। 

परमाणु बमों की होड़ में रूस सबसे आगे है। उसने परमाणु बम बनाने की तकनीक 1949 में विकसित कर ली थी। इस समय उसके पास 8000 परमाणु बम तैयार हैं, जिन्हें उसने विभिन्न ठिकानों पर सुरक्षित रखा है। कितनी संख्या में छोटे बम उसके जखीरे में मौजूद हैं, यह बात किसी को नहीं मालूम। अमरीका ने परमाणु बम विकसित करने की क्षमता रूस से चार साल पहले 1945 में विकसित कर ली थी। उसके जखीरे में 7300 परमाणु बम जमा हैं। चीन तीसरे नंबर पर है। उसके पास केवल 250 परमाणु बम हैं। उसने यह तकनीक 1964 में प्राप्त की। ब्रिटेन को 1952 में यह तकनीक हासिल हो गई थी। पर उसने 225 बम तैयार करके फिर इस भंडार को आगे नहीं बढ़ाया। 

भारत से होड़ में आगे निकलने की गरज से पाकिस्तान 100 परमाणु बम बना चुका है। कुछ एजैंसियां मानती हैं कि उसके पास 110 या 120 तक परमाणु बम भी हो सकते हैं। भारत के पास 90 से 100 परमाणु बमों की बात दुनिया मानती है। इन दोनों देशों ने 1998 में यह तकनीक हासिल की। पाकिस्तान को यह तकनीक दूसरे देशों से मिली जबकि भारत ने स्वयं इसे विकसित किया। इसराईल के पास 80 बम हैं। उसने 1973 में तकनीक प्राप्त की। उत्तर कोरिया के पास 6 बम हैं उसने 2006 में यह क्षमता प्राप्त की। परमाणु बमों के अलावा रासायनिक और बैक्टीरिया फैलाने वाले बम भी वर्चस्व की जंग के कारण बन चुके हैं। उत्तर कोरिया और पाकिस्तान ऐसे देश बन चुके हैं जो विश्व शांति के लिए कभी भी खतरा बन सकते हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजैंसी आई.एस.आई., अफगानिस्तान और भारत में आतंकवादी गतिविधियां चला रही है और उसकी शह पर उसके आतंकवादी दुनिया के लिए खतरा बन गए हैं। कुछ साल पहले ही हाकिंग ने चेतावनी दी थी कि तकनीक के साथ तेजी से बढ़ रही इंसानों की आक्रामक प्रवृत्ति हमें न्यूक्लियर या बायोलॉजिकल वार के जरिए तबाह कर सकती है।-निरंकार सिंह      


Pardeep

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