सरकारें बचाने के लिए कांग्रेस का संघर्ष

7/15/2019 3:48:25 AM

कर्नाटक तथा गोवा के बाद अब भाजपा राजस्थान तथा मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है तथा कांग्रेस के तीन दल-बदलुओं को गोवा मंत्रिमंडल में शामिल करने के बाद राजस्थान तथा मध्य प्रदेश के महत्वाकांक्षी कांग्रेस विधायक अशोक गहलोत तथा कमलनाथ पर उन्हें कैबिनेट में शामिल करने के लिए दबाव बना रहे हैं क्योंकि इन दोनों राज्यों में सरकारें बसपा तथा निर्दलीय विधायकों के समर्थन पर निर्भर हैं। मायावती अब अपने विधायकों को कैबिनेट में शामिल करने के लिए दबाव बना रही हैं। 

कांग्रेस पार्टी दोनों राज्यों में अपने विधायकों पर पकड़ बनाए रखने का जी-तोड़ प्रयास कर रही है लेकिन यदि राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ देते हैं और नया पार्टी अध्यक्ष आता है तो अशोक गहलोत व कमलनाथ के लिए अपने विधायकों पर पकड़ बनाए रखना कठिन होगा। दोनों राज्यों में भाजपा के राज्य नेता घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं और दोनों राज्यों में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की पराजय के बाद मुख्यमंत्रियों के विरोधी धड़े कांग्रेस से बाहर आने के समय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 

ममता बनाम भाजपा
लोकसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी तृणमूल की एकता को लेकर ङ्क्षचतित हैं क्योंकि कई विधायक तथा निगम पार्षद तृणमूल छोड़ कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं तथा कोलकाता नगर निगम का चुनाव अगले वर्ष होना है और उसके बाद विधानसभा चुनाव। इसलिए ममता ने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह ली है लेकिन प्रत्येक सप्ताह दो-चार तृणमूल नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं। वर्तमान में बिधाननगर के मेयर तथा विधायक सब्यसाची दत्ता भाजपा में शामिल होने को तैयार हैं। भाजपा नेता मुकुल राय के अनुसार विधायक सब्यसाची हाल ही में उनसे मिले हैं। 

इस बीच कई तृणमूल पार्षद, जो गत माह भाजपा में शामिल हुए थे, वापस तृणमूल में लौट आए हैं और निश्चित तौर पर इससे तृणमूल को नार्थ 24 परगना जिला तथा दक्षिण दिनाजपुर जिला परिषद में कांचरपारा तथा हालीसहर निगमों पर कब्जा करने में मदद मिलेगी। तृणमूल नेता एवं सांसद अभिषेक बनर्जी के अनुसार लोकसभा चुनावों के बाद कई तृणमूल नेता भाजपा में शामिल हुए थे और हालीसहर में उनके कुल 23 पार्षदों में से कई भाजपा में चले गए थे लेकिन 9 जुलाई को उनमें से 13 तृणमूल में वापस लौट आए। इसलिए तृणमूल को 23 में से 13 पार्षदों का समर्थन प्राप्त है लेकिन मुकुल राय ने प्रतिक्रिया दी कि यह कुछ और नहीं बल्कि एक राजनीतिक रणनीति है और वे भाजपा के लिए काम करेंगे। 

इसी तरह से दक्षिण दिनाजपुर जिला परिषद के सदस्य भाजपा में चले गए थे और वापस तृणमूल में लौट आए हैं लेकिन स्थानीय भाजपा नेता तृणमूल पर आरोप लगा रहे हैं कि वह उनको वापस लाने के लिए पुलिस तथा प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशांत किशोर स्थानीय निकाय चुनाव जीतने में तृणमूल की मदद करेंगे। 

पारिवारिक एकता का समय
सपा-बसपा गठबंधन तोडऩे के बाद मायावती लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी की हार के लिए सपा को दोष दे रही है। हालांकि बसपा ने 2014 के लोकसभा चुनावों में कोई भी सीट न जीतने के मुकाबले इस बार 10 सीटें जीती हैं और सपा ने केवल 5 सीटें जबकि अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव भी लोकसभा चुनाव हार गईं। यह मोदी लहर या चाचा शिवपाल यादव के कारण हो सकता है लेकिन भाजपा सरकार अब उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल दौरान हुए खनन घोटाले की जांच कर रही है। सी.बी.आई. ने लखनऊ तथा सुल्तानपुर में कई स्थानों पर छापे मारे हैं और उसी तरह योजना बना रही है जैसा उसने बिहार में चारा घोटाले में किया था जहां लालू प्रसाद यादव मुख्य आरोपी थे। वरिष्ठ सपा नेताओं के अनुसार यह पार्टी तथा अखिलेश यादव को बचाने के लिए परिवार में एकता का समय है। 

कर्नाटक में दोषारोपण का खेल
विरोधी कांग्रेसी विधायकों के एक विमान में बेंगलूर से मुम्बई जाने के बाद कांग्रेस भाजपा पर उन्हें मुम्बई ले जाने का आरोप लगा रही है क्योंकि ज्यूपिटर एविएशन कम्पनी भाजपा सांसद राजीव चन्द्रशेखर की है लेकिन चन्द्रशेखर ने ट्वीट करके कहा है कि उन्हें दोष नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि चार्टर्ड फ्लाइट सर्विस किसी के लिए भी उपलब्ध है और भाजपा तथा चार्टर्ड विमान को किराए पर लेने के बीच कोई संबंध नहीं है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी को किसी शुभङ्क्षचतक ने गत सप्ताह उनके विदेश जाने से पहले उन्हें सलाह दी थी कि उनके विरोधी तथा पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया शरारत कर सकते हैं इसलिए उन्हें इस मौके पर विदेश यात्रा नहीं करनी चाहिए। इस बीच भाजपा विधायक उमेश जाधव, जिन्होंने लोकसभा चुनावों में गुलबर्गा से मल्लिकार्जुन खडग़े को पराजित किया था, ने स्वागत किया है कि यदि दलित नेता मल्लिकार्जुन खडग़े को एच.डी. कुमारस्वामी के स्थान पर मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो इससे पार्टी में एकता होगी और सभी कांग्रेस-जद (एस) विधायक वापस लौट आएंगे। 

बजट बाद रात्रिभोज
लगभग 16 रिपोर्टर तथा सम्पादक बजट बाद रात्रिभोज में शामिल हुए जबकि बाकी पत्रकारों ने डिनर का बहिष्कार किया, जिस कारण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को काफी शॄमदगी उठानी पड़ी। एकजुटता के अप्रत्याशित प्रदर्शन तथा पत्रकारों की स्वतंत्रता के प्रयास में वित्त मंत्रालय को कवर करने वाले 100 से अधिक पत्रकारों ने सीतारमण द्वारा शुक्रवार को दिल्ली के ताजमहल होटल में आयोजित बजट बाद डिनर पार्टी में शामिल न होने का निर्णय किया। पत्रकारों ने सर्वसम्मति से डिनर का बहिष्कार करने का फैसला किया क्योंकि वित्त मंत्रालय ने नार्थ ब्लाक में मीडिया पर्सन्स के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिए थे और केवल उन्हीं मान्यता प्राप्त पत्रकारों को प्रवेश की इजाजत थी जिन्होंने किसी अधिकारी से पहले से समय लिया हो। पत्रकारों ने वित्त मंत्री से प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया है।-राहिल नोरा चोपड़ा