बड़े देशों ने अफगानिस्तान को एक बर्बर देश बना दिया

2021-07-22T05:23:03.233

आज जिस अफगानिस्तान में अफरा-तफरी का आलम है जो दुनिया के बाकी मुल्कों के लिए खतरा बनता  जा रहा है, जिस मुल्क ने अपने आपको इंसानियत की कब्रगाह बना डाला है उसे थोड़ा-थोड़ा समझ लेना चाहिए। आज अफगानिस्तान चाहे इस्लामिक क्रांति का अग्रदूत बन गया है परन्तु पहले तो यह अखंड भारत का ही एक भूभाग था। 17वीं सदी तक तो अफगानिस्तान दुनिया के नक्शे पर नहीं था। 1747 से 1773 तक अहमदशाह दुर्रानी के राज तक तो इस भूभाग को आर्याना, आर्यानुम्र बीजू, प ितया, खुरासान, पश्तूम वाह या रोह नामों से ही जाना जाता था। 

26 मई, 1739 को अकबर बादशाह ने जिस ‘उपगणा’ भूभाग को एक संधि के तहत नादिरशाह को सौंपा था, वही आज का अफगानिस्तान है। इसी ङ्क्षहदू राज्य को 1019 में महमूद गजनी ने अफगानिस्तान के राजा त्रिलोचन पाल से छीन कर इस्लामिक-क्रांति की नींव रखी थी। ईश्वर एक है-यह विचार पहले इसी धरती से निकला था। पुरुवंश, पाणिनी, गुरु गोरखनाथ और धृतराष्ट्र की धर्मपत्नी गान्धारी इसी गंधार प्रांत से थे। इसी भूभाग पर वैदिक स यता ने जन्म लिया। बौद्धमत ने इसी देश पर राज किया। बामियान बौद्ध राज की राजधानी थी। 

350 साल इसी अफगास्तिान पर राजशाही रही। अफगानिस्तान के पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में भारत और चीन, उत्तर में ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान जैसे देश हैं। इसकी जनसं या 3,2738376 और क्षेत्रफल 6,47500 वर्ग किलोमीटर है। प्राचीन स यता और संस्कृति इसी भूभाग में पनपी। पर आज यही देश इंसानियत की कब्रगाह बन गया है। बड़े देशों की आपसी फूट और इस अफगानिस्तान पर बार-बार आक्रमण ने इसे तबाह कर दिया है। साम्यवाद की समाप्ति पर यहां के मुजाहिद्दीनों ने अपने ही राष्ट्रपति का सरेआम गला काट दिया था। 

अफगानी गृह युद्ध ने इस देश को खंडहर और जरखेज जमीन को दोजख बना डाला है। आज जब अमरीकी फौजें इस देश से वापसी कर रही हैं तो एक बार फिर यह देश आग की भ_ी में झुलसने लगा है। वहां के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मौजूदगी में इल्जाम लगाया है कि पाकिस्तान की आई.एस.आई. ने ट्रेंड तालिबानों को अफगानिस्तान में लडऩे के लिए भेजा है जिनकी सं या दस हजार बताई गई है। आज अफगानिस्तान जिस आग में जल रहा है इस आग को पाकिस्तान ने ही लगाया है। पाकिस्तान खुद इस आग में जल जाएगा। जो रिपोर्ट आ रही है वह डराने वाली है। 

तालिबानों ने अफगानिस्तान के 193 जिलों पर कब्जा कर लिया। भारत ने अपना दूतावास खाली करवा लिया है। तालिबान भयानक हथियारों से लैस, अफगानी फौजों को रौंदते हुए राजधानी की ओर बढ़ रहे हैं। इस्लामी शरीयत कानूनों का झंडा उठाए तालिबान के सामने जो भी आ रहा है उसे कत्ल करते चले जा रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानी मदरसों से ट्रेंड होकर निकले यह बर्बर आतंकवादी नए-नए फरमान जारी कर रहे हैं। तालिबान का मतलब ही है इस्लामी स्टूडैंट। यह कट्टर सुन्नी आतंकवादी पहले भी 1992 से 1996 तक अफगानिस्तान पर हुकूमत कर चुके हैं। इस्लामी कट्टरपंथ के रंग में रंगे यह तालिबानी सिर्फ अफगानिस्तान के ही दुश्मन नहीं बल्कि दुनिया के शक्तिशाली देश भी इनसे डरे हुए हैं। अमरीकी फौजों की वापसी के साथ ही यह तालिबान अपने बिलों से बाहर निकल आए हैं। इनके फरमान तो देखिए : 

(क). तालिबानों ने मुल्ला-मौलवियों को फतवा जारी कर कहा है कि 15 साल की लड़कियों और 45 साल की विधवा औरतों की लिस्टें उन्हें सौंपें ताकि तालिबान लड़ाकों से उनका निकाह करवाया जाए।
(ख). कोई भी मर्द दाढ़ी नहीं कटवाएगा जो भी शेव करेगा उसे गोली से उड़ा दिया जाएगा।
(ग). छठी क्लास के बाद कोई लड़की स्कूल नहीं जाएगी। लड़कियों को शिक्षा के अधिकार से तालिबानों ने महरूम कर दिया है।
(घ). यदि कोई पत्नी अपने घर में स्कूल चला रही है तो उसको, उसके पति को और स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को गोली से उड़ा दिया जाएगा।
(ङ). कोई भी औरत मर्द के बिना बाजार नहीं जा सकेगी। अकेली औरत मिल गई तो गोली मार दी जाएगी। 

(च).अगर किसी औरत का पैर बुर्के से बाहर दिखाई दिया तो उसे सरे बाजार कोड़े लगाए जाएंगे।
(छ). प्रेमी-प्रेमिका यदि मिल गए तो कोड़ों से पीटे जाएंगे।
(ज). प्रेमी के साथ भागने वाली महिलाओं को पत्थर मार-मार कर मौत के घाट उतार दिया जाएगा।
(झ). कोई पुरुष डाक्टर किसी बीमार औरत का इलाज नहीं कर सकता। ऐसा किसी ने किया तो गोली मार दी जाएगी। 

पाठक वृंद, क्या 21वीं सदी में इंसानियत को ऐसे दिन भी देखने पड़ेंगे? अफगानिस्तान में यह हो चुका है, अब हो रहा है। दोस्तो, अफगानिस्तान में पहले भी 1996 से 2001 तक तालिबानों की हुकूमत रही है। तालिबानों की इसी हुकूमत को पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने मान्यता दे थी। मुल्ला उमर ने स्वयं को ‘हैड ऑफ सुप्रीम कौंसिल’ घोषित किया था। आज फिर तालिबान अपने देश को और सारी मानवता को ‘पाषाण युग’ में ले जा रहे हैं। तालिबान लड़ाकों ने अफगानिस्तान की प्राचीन स यता संस्कृति को पैरों तले रौंद दिया है। पुरातत्व विभाग की प्रत्येक प्राचीन धरोहर को नष्ट कर दिया है। वहां के हिंदू-सिखों की स पत्ति को छीन उन्हें पलायन करने पर मजबूर कर दिया है। सदियों पुरानी बौद्ध प्रतिमाओं को तोड़ डाला है। 

यह तालिबानी मुजाहिद्दीन 1979 से 1989 तक सोवियत सेना से लड़ते रहे। तब उनका मकसद अफगानिस्तान से सा यवादी सरकार को उखाड़ फैंकना था। इस दौरान अमरीका इन मुजाहिद्दीनों की पीठ ठोक रहा था। पाकिस्तान तब भी तालिबानों के साथ था। आज भी तालिबानों की मदद कर रहा है। यह गृहयुद्ध अफगानिस्तान में खत्म होता दिखाई नहीं देता। अफगानी जनता, अफगानी सरकार, अफगानी फौज यहां तक कि राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक अफगानिस्तान में मौत के साए में जी रहे हैं। इस गृहयुद्ध का अंत भी दिखाई नहीं देता। इस्लामिक मुल्क चिंतन करें। यह लड़ाई उन्हें भी छू सकती है।-मा. मोहन लाल (पूर्व परिवहन मंत्री, पंजाब)


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Pardeep

Recommended News