दिल्ली के बाबुओं के बड़े बदलाव

punjabkesari.in Thursday, Jun 30, 2022 - 04:49 AM (IST)

विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली के नए उप-राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसके तहत उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में उपसचिव पी.सी. ठाकुर तथा 2 अन्य एस.डी.एम. हर्षित जैन और दविन्द्र शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद निलंबन करने के निर्णय लिए हैं। सूत्रों ने सूचना दी है कि डी.ए.एन.आई.सी.एस. अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। 

हालांकि दिल्ली सरकार में बड़े बदलाव किए गए हैं जिससे दिल्ली एडमिनिस्ट्रेटिव सब-आर्डीनेट सर्विसेज (डी.ए.एस.एस.) के 60 से 70 प्रतिशत अधिकारियों को फर्क पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार प्रमुख सचिव नरेश कुमार ने डी.ए.एस.एस. अधिकारियों की सूची को तैयार करने के लिए विभागों के प्रमुखों को कहा है। ऐसे अधिकारी अनेक वर्षों से विभाग में कार्यरत हैं तथा उनके स्थानांतरण का सुझाव दिया गया है। 40 आई.ए.एस. तथा डी.ए.एन.आई.सी.एस. अधिकारियों के दिल्ली सरकार द्वारा किए गए तबादलों के बाद ऐसा निर्णय लिया गया है। 

आखिर इस बड़े बदलाव के पीछे की कहानी क्या है? ऐसा प्रतीत होता है कि 70 प्रतिशत अधिकारी एक ही विभाग में 5 वर्षों से अधिक समय के लिए कार्यरत हैं। सैंट्रल विजीलैंस कमिशन (सी.वी.सी.) के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियों को प्रत्येक 3 वर्षों के बाद इधर से उधर किया जाना चाहिए जबकि अन्य को 5 वर्षों के बाद ट्रांसफर किया जाना चाहिए जो एक ही पद पर बैठे हैं। हालांकि ऐसे बड़े बदलाव को देखते हुए ट्रांसफरों को कुछ चरणों में किया जाएगा ताकि कार्य बाधित न हो। 

भारत के नए यू.एन. दूत ने कूटनीतिक स्टाइल तथा तत्वों को आपस में मिक्स किया : भूटान में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली रुचिरा कम्बोज संयुक्त राष्ट्र (यू.एन.) में भारत का नया स्थायी प्रतिनिधि बनने के लिए रुख कर चुकी हैं जो टी.एस. त्रिमूर्ति का स्थान लेंगी। 1987 बैच की भारतीय विदेश सेवा (आई.एफ.एस.) अधिकारी कम्बोज के पास राजनीतिक समस्याओं, शांति स्थापित करने तथा मामलों से निपटने का काफी अनुभव है।

कम्बोज यू.एन. से पहले ही वाकिफ हैं क्योंकि इससे पहले उनको यू.एन. में भारत के स्थायी मिशन के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जबकि ज्यादातर कूटनीतिज्ञ पर्दे के पीछे आमतौर पर कार्य करते हैं मगर कम्बोज इस स्थान को ग्रहण करने वाली भारत की पहली महिला होंगी। कम्बोज ने लोगों का ध्यान अपनी ओर 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथग्रहण समारोह के दौरान आकर्षित किया था जब सार्क राष्ट्रों तथा मॉरीशस के प्रमुख उपस्थित थे। ऐसा काम ज्यादातर कूटनीतिज्ञ नहीं कर पाते। 

एक प्रोटोकॉल जोकि कूटनीति का एक सबसे बड़ा तंत्र है, के तहत विदेशी गण्यमान्य व्यक्तियों का स्वागत करना होता है तथा उन्हें दिशा दिखानी होती है। इस दौरान कूटनीतिज्ञों को शानो-शौकत को देख असमंजस में नहीं पडऩा होता। ऐसी चमक-दमक के पीछे अनथक कठिन कार्य करना होता है। गंभीर कूटनीतिक कार्यों को लेकर एक सही वातावरण तथा मूड तैयार करना होता है। इस संदर्भ में रुचिरा कम्बोज को यू.एन. में फायदा मिल सकता है क्योंकि उन्होंने ज्यादातर वैश्विक नेताओं से मुलाकात की है जब उन्होंने कम्बोज के प्रोटोकोल इंचार्ज के दिनों के दौरान भारत की यात्रा की थी। विश्व के सबसे बड़े कूटनीतिक पटल पर देश की आवाज बनने के लिए कम्बोज तैयार है। 

बाबू के साथ मंत्रालय खड़ा, ट्रैवल बोर्ड को नकारा : सेवाओं को बंद करने के टी.आर.आई. एफ.ई.डी. के बोर्ड ऑफ डायरैक्टर्स के एकमत निर्णय के बावजूद ट्रैवल मामलों के मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव आर. जया ट्राइबल को-आप्रेटिव मार्कीटिंग डिवैल्पमैंट फैडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (टी.आर.आई.एफ.ई.डी.) में अतिरिक्त चार्ज लेना जारी रखेंगी। टी.आर.आई. एफ.ई.डी. चेयरमैन राम सिंह रठवा द्वारा ट्राइबल मामलों के सचिव अनिल कुमार झा को सर्वसम्मति वाले रुख से अवगत करवा दिया है। 

जया द्वारा अपने अतिरिक्त चार्ज को न लेने के निर्णय के प्रति कई लोगों को आशंका थी मगर मंत्रालय ने बोर्ड के इस निर्णय को नकार दिया है और अपने पक्ष को बाबू के हक में रखा है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि इस अतिरिक्त चार्ज को जया तब तक जारी रखेंगी, जब तक कि एक नियमित अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती। मंत्रालय जया के साथ जुड़ा है। मगर कुछ लोगों को शंका है कि जया को टी.आर.आई.एफ.ई.डी. निदेशकों के साथ निरंतर कार्य करना मुश्किल होगा। यह बात तो यकीनी तौर पर कही जा सकती है कि इस नाव में सवार होना आसान नहीं।-दिल्ली का बाबू दिलीप चेरियन 
 


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