अपनी डिजिटल मीडिया टीम से क्यों नाराज हैं राहुल

‘उठ कर जाते हुए तेरे पहलू से इतना तो जान गए थे
कि रुसवा किया है किसने और रुसवा हुआ है कौन?’ 
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी एक नई यात्रा पर हैं और यह यात्रा है खुद की इमेज बदलने की, सो वह कभी बॢलन जाते हैं, कभी लंदन, तो कभी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकल पड़ते हैं, पर उनकी इमेज चमकाने में जुटी टीम में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा। इसकी कमान फिलवक्त पूर्व कन्नड़ अभिनेत्री दिव्या स्पंदना के पास है, जो जोश-जोश में कभी ऐसा कुछ कर जाती हैं जिससे पार्टी के सीनियर तारतम्य नहीं बिठा पाते। ताजा मामला बर्लिन का है। सूत्र बताते हैं कि राहुल की तरफ से किए गए एक ट्वीट को लेकर राहुल की अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं को आयोजित और समन्वित करने वाले सैम पित्रोदा और दिव्या स्पंदना में जोर की ठन गई। 

हुआ दरअसल यह कि राहुल की अलग-अलग मुद्राओं में तस्वीरें दिव्या के सौजन्य से ट्वीट हो गईं, जिनका बाद में सोशल मीडिया पर खासा माखौल उड़ा और कहते हैं कि दिव्या के इस कदम से मोदी आर्मी को भी सोशल मीडिया पर राहुल की ङ्क्षखचाई के भरपूर मौके मिल गए। पित्रोदा का कहना था कि कोई भी ट्वीट करने से पहले दिव्या को उन्हें दिखाना चाहिए था। सूत्र बताते हैं कि इस मामले ने कुछ ऐसा तूल पकड़ लिया कि वहां मौजूद शशि थरूर और मिलिंद देवड़ा को बीच-बचाव करना पड़ा। फिर राहुल को भी वहां आना पड़ा। राहुल ने किंचित नाराजगी जताते हुए अपनी डिजीटल आर्मी के प्रमुख से कहा, ‘देखिए मैं जितना कर सकता हूं उससे कहीं ज्यादा करने की कोशिश कर रहा हूं, अगर आप इसका भी ठीक-ठीक प्रोजैक्शन नहीं कर सकते हो तो मैं क्या कर सकता हूं।’ राहुल की नाराजगी को देखते हुए दिव्या ने अपने तेवर किंचित मद्धम कर लिए हैं। 

लंदन का लोचा
‘जहां डूबने को थे तुम, लहरों ने ही अपना रुख बदल लिया तेरी तिश्नगी इस कदर बढ़ती गई कि मौजों ने ही दरिया को निगल लिया’ राहुल गांधी के पिछले लंदन दौरे से भी कई चिंगारियां उठी थीं, वह तो शुक्र है कांग्रेस की डैमेज कंट्रोल मैनेजमैंट का कि बात बढऩे से पहले ही वह इस पर मिट्टी डाल पाने में सफल रहे। राहुल गांधी की लंदन की मीटिंग इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष कमलप्रीत सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में वैस्ट लंदन के जिस होटल में रखी गई थी, उस होटल के मालिक पर खालिस्तान समर्थक होने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। 

सूत्रों की मानें तो राहुल की सुरक्षा में तैनात एस.पी.जी. ने न सिर्फ राहुल को उस होटल में जाने पर चेताया था, बल्कि अपनी रिपोर्ट से गृह मंत्रालय को भी वाकिफ करा दिया था। इस पूरे इवैंट को स्पांसर करने में लंदन के एक बड़े उद्योगपति तलविंदर हायर का हाथ था, जिनसे आयोजकों ने वायदा किया था कि उनका पूरा परिवार राहुल के डिनर टेबल पर होगा, पर यह हो न सका। सूत्र बताते हैं कि इसकी भरपाई के लिए राहुल को इस उद्योगपति के लंदन स्थित आवास पर जाना पड़ा, जहां उन्होंने हायर परिवार के साथ हाई-टी का लुत्फ उठाया। 

कमल खिलाने को बेकरार हैं ये स्टार
‘गली-गली जो चांद कभी मेरे कंधों पर मटरगश्ती किया करता था,
सुना है अब वह काफिर हो गया है, मैंने उसे खुदा क्या कह डाला
वह खुद से फना हो गया है, अपनी सीरत से जुदा हो गया है’
भाजपा के दोनों शीर्ष पुरुषों को बदलते मौसम का बखूबी इल्म है, लिहाजा वे 2019 की चुनावी चौसर पर अपने हर दाव बेहद संभल कर चलना चाहते हैं। कई बड़ी सैलीब्रिटीज को भगवा दाने डाले जा रहे हैं, सबसे बड़ी बात तो यह कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी इन दिग्गजों के साथ चाय-नाश्ता और डिनर कर रहे हैं। रजनीकांत, मोहन लाल के बाद मोदी के ताजा मैन्यू में साऊथ सुपर स्टार पवन कल्याण का नाम है। सूत्र बताते हैं कि अगले कुछ रोज में मोदी बॉलीवुड के चर्चित एक्टर नाना पाटेकर से भी मिलने वाले हैं। नाना अपने प्रभावशाली अभिनय से अहलदा अपने उससे भी जोरदार जनकल्याण कार्यों के लिए जाने जाते हैं। महाराष्ट्र में जिन किसानों ने हालिया दिनों में आत्महत्याएं कर ली थीं, उन परिवारों की मदद के लिए नाना ने अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है।

इनके अलावा बॉलीवुड के चर्चित प्रतिनायक आशुतोष राणा और उनकी अभिनेत्री पत्नी रेणुका शहाणे को भी भाजपा के निरंतर संपर्क में बताया जाता है, अभिनेता अक्षय कुमार के दिल्ली या पंजाब से भाजपा के टिकट पर चुनाव लडऩे के चर्चे हैं, क्रिकेटर कपिल देव को भाजपा चंडीगढ़ से चुनावी मैदान में उतारना चाहती है, तो दक्षिण के एक बड़े सुपरस्टार मोहन लाल को केरल में शशि थरूर के खिलाफ चुनाव लड़वाने की भगवा तैयारी है। असम में भूपेन हजारिका के एक बेहद करीबी को टिकट मिल सकता है, तो कर्नाटक में अभिनेता राजकुमार के बेटे से कमल खिलाने को कहा जा सकता है। इसके अलावा आर्मी के कई रिटायर्ड जनरलों को भी आप भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते देख सकेंगे। सबसे बड़ी खबर तो यह कि इस दिसम्बर में रिटायर हो रहे एक चुनाव आयुक्त से भाजपा के संबंध इतने मधुर हैं कि उन्हें भी चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। 

नाराज हैं कलराज 
‘नाराज तुम भी हो, नाराज हम भी हैं
जब से चौदहवीं के चांद को आग लगी है
हमने आसमां तोड़कर अपना शामियाना बना लिया है’
यू.पी. के बुजुर्ग भगवा नेता कलराज मिश्र अपने पार्टी हाईकमान से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। उनके करीबियों का कहना है कि जब उन्हें केन्द्रीय मंत्री पद से उम्र का वास्ता देकर हटाया जा रहा था, तो इस वायदे के साथ कि उन्हें एक प्रमुख प्रदेश का राज्यपाल बनाया जाएगा। कलराज को पूरी उम्मीद थी जम्मू-कश्मीर से एन.एन. वोरा की रुख्सती के बाद उन्हें वहां का कार्यभार सौंपा जाएगा, पर नम्बर लग गया बिहार के गवर्नर सत्यपाल मलिक का, जो भाजपाध्यक्ष अमित शाह के बेहद करीबियों में शुमार होते हैं। बदलते भगवा दस्तूर से नाराज कलराज ने अभी पिछले दिनों लखनऊ में लगभग डेढ़ दर्जन ब्राह्मण विधायकों की बैठक बुलाई और अपने दर्दे दिल को बयां करते हुए मौजूदा नेतृत्व को पानी पी-पीकर कोसा। 

सूत्रों की मानें तो कलराज ने भाजपा के इन सवर्ण विधायकों से आह्वान किया कि वर्तमान व्यवस्था में सवर्ण हाशिए पर जा रहे हैं, अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो आगे और मुश्किल हो सकती है, फिर यही राग उन्होंने देवरिया में भी अलापा। सिर्फ कलराज ही क्यों, अब सवर्णों की ङ्क्षचता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैय्या को भी सताने लगी है। वह सवर्णों को एकजुट कर यू.पी. में एक बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में हैं। 

हुड्डा के नए इरादे
गांधी परिवार से नजदीकियों का यह सिला मिलेगा, हरियाणा के धाकड़ जाट नेता भूपिंद्र सिंह हुड्डा को किंचित इस बात का इल्म न था, पर जब से उन पर और दामाद जी यानी रॉबर्ट वाड्रा पर एफ.आई.आर. दर्ज हुई है, हुड्डा एक नए आसमां का निशां ढूंढने में जुट गए हैं। सूत्र बताते हैं कि अभी पिछले दिनों हुड्डा ने चंडीगढ़ स्थित आवास पर अपने 15-17 करीबी विधायकों को बुलाया और भविष्य की राजनीति पर चर्चा की। कहते हैं अपने करीबियों की बैठक में हुड्डा ने साफ किया कि राहुल गांधी ने उन्हें हरियाणा में कांग्रेस का सी.एम. फेस बनाने का आश्वासन दिया है। इस पर वहां मौजूद एक विधायक ने सवाल उठाया कि ‘गांधी परिवार ऐसे किसी व्यक्ति के चेहरे को आगे करने से कतराता है जिस पर कानून की तलवार लटक रही हो, सो हमें ऐसे में अपना‘प्लॉन बी’ भी तैयार रखना चाहिए।’ 

सूत्रों की मानें तो फिर इस बैठक में तय हुआ कि हर बूथ पर कांग्रेसी कार्यकत्र्ताओं से अलहदा अपने भी कुछ लोग होने चाहिएं। यह भी तय हुआ कि जो लोग सिर्फ और सिर्फ हुड्डा के विश्वासपात्र होंगे उनके हाथ में भले कांग्रेसी झंडा होगा, पर उनके सिर पर या तो गुलाबी पगड़ी होगी या गले में कोई गुलाबी पट्टा होगा। हुड्डा जब पिछले दिनों साइकिल यात्रा पर थे तो मौसम का रंग यकीनन गुलाबी हो गया था। 

चुनावी शंखनाद को दिग्गजों का साथ
‘खाली पतीली में घर भर की भूख पकती नहीं
अब चूल्हे के अंगारों को ही निगलना होगा
अब बात पूजा अर्चना इबादत से बनती नहीं
हमें तो अपना भगवान ही बदलना होगा’
चुनावी चौसर पर रणबांकुरों ने अपनी चाल सजा ली है। राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर दोनों प्रमुख पाॢटयों में सबसे ज्यादा जोश मध्य प्रदेश को लेकर दिख रहा है। 12 सितम्बर से भाजपाध्यक्ष अमित शाह महाकाल नगरी उज्जैन से अपना राज्यव्यापी दौरा शुरू करेंगे। शाह ने लगातार राज्य के शक्ति केन्द्रों के समर्पित कार्यकत्र्ताओं से भी अपना संपर्क बनाया हुआ है। दरअसल, चुनाव की असली राणनीति शक्ति केन्द्रों की कोख से ही उपज रही है। इसके बाद 25 सितम्बर को प्रधानमंत्री मोदी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन के मौके पर भोपाल में कार्यकत्र्ता महाकुंभ को संबोधित करेंगे। वहीं राहुल गांधी भी अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट कर 17 सितम्बर को सीधे भोपाल रवाना होंगे जहां वह मैगा रोड शो करेंगे। राहुल इस बात से अनजान हैं कि 17 सितम्बर को मोदी का जन्मदिन भी है। 

एक नई इबारत लिखने को बेकरार वेंकैया
वेंकैया नायडू एक नई सियासी धारा के प्रवत्र्तक बनकर उभरना चाहते हैं। उन्होंने अपने कुछ करीबी लोगों से मुलाकात में यह साफ किया है कि वह लैजिस्लेटिव काऊंसिल यानी विधान परिषदों के चुनाव की नीतियों में एक आमूल-चूल बदलाव लाना चाहते हैं। वेंकैया देश के उप-राष्ट्रपति हैं, इस नाते वह राज्यसभा के उप-सभापति भी हैं। वेंकैया का मानना है कि राज्यसभा समेत विधान परिषदों के बारे में यह एक आम धारणा बन गई है कि यह वैसे नेताओं के पुनर्वास की पनाहगाह है जो नेता किसी भांति चुनाव में जीत कर नहीं आ पाते। वेंकैया इस भ्रांति को तोडऩा चाहते हैं क्योंकि चुनाव जीतने के मामले में उनका रिकार्ड भी निहायत फिसड्डी रहा है। वेंकैया भाजपा से दीगर अन्य दलों से भी बात कर रहे हैं। उन्होंने बाकायदा एक कमेटी का भी गठन कर दिया है जो राज्यसभा के नियमों में बदलाव के बारे में भी अपने सुझाव उप-सभापति को देगी। फिलहाल देश के 29 राज्यों में से 7 राज्यों में विधान परिषद का अस्तित्व है, वेंकैया इनके वजूद को एक नए सिरे से परिभाषित करने में जुटे हैं। 

मौसम वैज्ञानिक पासवान की चिंताएं
‘तेरा जिक्र होता है तो धौंकनी-सी चलती हैं सांसें
बस एक अहसास रह गया है कि मैं जिंदा हूं अभी’
अपने राजनीतिक जीवन में बस एक बार सियासत के सबसे बड़े मौसम वैज्ञानिक रामविलास पासवान हवा का रुख भांपने से चूक गए थे, नहीं तो अब तक दिल्ली के निजाम पर जितनी भी सरकारें काबिज हुई हैं पासवान उनके अभिन्न अंग बने रहे हैं, पर 2019 का सियासी मिजाज भांपने में उनकी पारंगता उन्हें धोखा देने लगी है। सो पिछले दिनों जब बिहार के एक बाहुबली सांसद (जो उनकी पार्टी से ही निर्वाचित हुए हैं) उनसे मिलने उनके घर पहुंचे तो पासवान जी ने पहले उनसे बिहार की जनता का मिजाज पूछा। फिर उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंप दी कि वह बिहार में जगह-जगह जाएं, लोगों से मिलें, बात करें और उनके दिल व मन टटोलने के प्रयास करें कि इस दफे बिहार में किसका सिक्का चलेगा, मोदी का या फिर लालू का। उपेन्द्र कुशवाहा पहले ही कश्ती बदलने का मन बना चुके हैं, मौसम वैज्ञानिक को भी सतत् लालू के टच में बताया जा रहा है।-त्रिदीब रमण 

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