Kundli Tv- क्यों ये अपवित्र चीजें होती हैं पूजा में इस्तेमाल?

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हिंदू धर्म में बहुत से ग्रंथ हैं, इन ग्रंथों में इंसान के हित के लिए और ज्ञान को बढ़ाने के लिए बहुत सी बातें पढ़ने को मिलती है। आज हम बात करेंगे कि विष्णु स्मृति की। जिसमें हिंदू धर्म में अपवित्र चीजों को भी पवित्र बताया गया है। कहते हैं  यह चीजें हमें जानवर, पक्षी और कीड़ों के मल, उल्टी और उनके मरने से मिलती है। तो आइए जानते हैं इनके बारे में-  

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सबसे पहले बात करते हैं गाय के दूध की। जिसे सबसे पहले उसका बझड़ा जूठा करता है। इसके बाद ही हमें दूध मिलता है, लेकिन गाय के दूध को पांच अमृतों में एक माना गया है। इतना ही नहीं इसका उपयोग देवी-देवताओं के अभिषेक के लिए किया जाता है और दूध से खीर और घी बनाते हैं जिनको नैवेद्य के रूप में भगवान को चढ़ाया जाता है। इसके अलावा और भी चीजें हैं जो अपवित्र होकर मिलती है लेकिन भगवान की पूजा में उन्हें पवित्र माना गया है।

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श्लोक-
 उच्छिष्टं शिवनिर्माल्यं वमनं शवकर्पटम् ।
काकविष्टा ते पञ्चैते पवित्राति मनोहरा॥


अर्थात-उच्छिष्ट, शिव निर्माल्यं, वमनम्, शव कर्पटम्, काकविष्टा, ये पांचों चीजें अपवित्र होते हुए भी पवित्र है।


उच्छिष्ट- जैसे कि हमने ऊपर बताया कि गाय का दूध पहले उसका बछड़ा पीकर उच्छिष्ट यानि झूठा करता है। इसके बाद भी वह अपवित्र नहीं पवित्र माना जाता है। इतना ही नहीं गाय के दूध को अमृत भी कहा जाता है।

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वमनम्-मधुमक्खी जब फूलों का रस लेकर अपने छत्ते पर आती है तब वो अपने मुख से उसे निकालती है यानि उस रस की उल्टी करती है। जिससे शहद बनता है और उसे फिर भी पवित्र माना जाता है। शहद का उपयोग मांगलिक कामों में किया जाता है। पांच अमृतों में शहद को भी एक माना गया है।
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शव कर्पटम्- रेशमी वस्त्र मांगलिक कामों और पूजा-पाठ में होना ज़रूरी है। रेशमी वस्त्र को भी पवित्र माना गया है, लेकिन आपको बता दें कि रेशम को बनाने के लिए उसको उबलते पानी मे डाला जाता है और इससे उसमें रहने वाला रेशम का कीड़ा मर जाता है। उसके बाद रेशम मिलता है तो इस प्रकार शव कर्पट होने के बाद भी इसे पवित्र है माना जाता है।
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काक विष्टा-कौवा पीपल आदि पेड़ों के फल खाता है और उन पेड़ों के बीज अपनी विष्टा यानि मल में इधर-उधर छोड़ देता है जिससे पेड़ों की उत्पत्ति होती है। पीपल भी काक विष्ठा यानी कौए के मल में निकले बीजों से पैदा होता है। फिर भी इसको पवित्र माना गया है। पीपल पर देवताओं और पितरों का निवास भी माना गया है।
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