नजरिया: किसे और कैसे मिलता है विशेष राज्य का दर्जा

नेशनल डेस्क (संजीव शर्मा): लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ आये अविश्वास प्रस्ताव पर बहस चल रही है। शुक्रवार देर शाम इस पर मतदान भी होगा। यह अविश्वास प्रस्ताव चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलगू देशम द्वारा लाया गया है।  टीडीपी  लम्बे रसे से आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही थी। इसी मांग को जब बार बार आग्रह के बाद मोदी सरकार ने ठुकरा दिया तो टीडीपी मार्च 2018  में एनडीए से अलग हो गयी। उसके बाद टीडीपी ने दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुई क्योंकि उसे ऐसा करने के लिए जरूरी 50 सांसद नहीं मिल पाए।


टीडीपी के लोकसभा में महज 16 ही सांसद हैं और वह इस मामले में शिवसेना से भी एक पायदान नीचे है।  संख्याबल के लिहाज़ से टीडीपी सातवें नंबर पर है। लेकिन अबके उसे कांग्रेस का साथ मिल गया और प्रस्ताव स्वीकार हो गया। खैर इस बहाने यह देखना भी जरूरी है कि विशेष राज्य का दर्जा किसे और कैसे मिलता है ? आइये देखते हैं...

क्या है विशेष राज्य 
इस दर्जे की शुरुआत 1969 में पांचवें वित्तायोग के समय हुई थी। उससे पहले राज्यों को किसी किस्म की विशेष सहायता का प्रावधान नहीं था। उस समय असम, नगालैंड और जम्मू-कश्मीर को यह दर्जा मिला था वर्तमान में 14वां वित्तायोग  कार्यरत है और अब तक 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया जा चूका है। जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के साथ इसमें अब हिमाचल और उत्तराखण्ड भी शामिल हैं। ऐसे राज्यों को केंद्र से 90 :10 के अनुपात में  वित्तीय सहायता मिलती है। दस फीसदी पर भी ब्याज नहीं लगता है। केंद्रीय बजट का 30 फीसदी इन्हीं राज्यों में बांटा जाता है। कई करों में भी राहत मिलती है।  

कैसे मिलता है विशेष राज्य का दर्जा 
विशेष राज्य के दर्जे के लिए मुख्यत: पांच जरूरी चीजें तय हैं। पहला राज्य का दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र होना। दूसरा आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़ा होना। तीसरा काम जनसंख्या और उसमे भी अधिकांश का ट्राइबल होना जरूरी है। चौथा राज्य की -प्रति व्यक्ति आय और गैर कर राजस्व काफी कम हो और पांचवां यदि उसकी सीमा अंतर्राष्ट्रीय हो तो ऐसे राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है।  
 

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