ऑफ द रिकॉर्डः संदेसरा ब्रदर्स को किसने दिया समर्थन

नेशनल डेस्कः इस घोटाले में सी.बी.आई. जितनी गहराई से जांच करती है उतने ही चौंकाने वाले सबूत सामने आते हैं क्योंकि कम्पनी को प्रत्येक सुविधा और मदद जून 2004 के बाद से मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार द्वारा दी गई। कम्पनी को दाहेज पोर्ट के विकास का अनुबंध और 150 एकड़ जमीन दी गई। गुजरात सरकार ने जनवरी 2017 में वाइब्रैंट गुजरात सम्मेलन आयोजित करने के लिए कम्पनी की मदद ली। स्टर्लिंग बायोटैक के चेयरमैन नितिन संदेसरा नवम्बर 2008 में (जो फरार है) गुजरात भाजपा नेतृत्व और सरकारी अधिकारियों के साथ अपने विमान में यूगांडा और कीनिया के दौरे पर गया था। 2009, 2011, 2013, 2015 और 2017 के वाइब्रैंट गुजरात के बिल में भी स्टर्लिंग बायोटैक का नाम था जिसमें गुजरात की फार्मा और बायोटैक्नोलॉजी की नीतियों की सफल कहानी का उल्लेख था।

स्टर्लिंग सेज को जमबुसार में सेज विकसित करने के लिए 3 हजार एकड़ जमीन अलॉट की गई। गुजरात सरकार ने बैंकों की शिकायतों के बावजूद कम्पनी को अतिरिक्त 6000 एकड़ जमीन अलॉट की। बैंकों ने शिकायत की थी कि ग्रुप का ऋण खराब हो रहा है। स्टर्लिंग सेज 2013 तक गुजरात सरकार द्वारा दी गई 9000 एकड़ जमीन पर बैंक काबिज रहा।

स्टर्लिंग बायोटैक गुजरात का सबसे चहेता ग्रुप था और इसने राज्य सरकार की तरफ से एक के बाद एक प्रोत्साहन प्राप्त किए। सी.बी.आई. की समस्या यह है कि अब उसे स्टर्लिंग बायोटैक और यू.पी.ए. के तत्कालीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच सांठ-गांठ का सुराग ढूंढना होगा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन दोनों भाइयों को नाइजीरिया से कैसे वापस लाया जाए। ऐसा दिखाई देता है कि कोई भी उन दोनों भाइयों को वापस लाने का इच्छुक नहीं।

Related Stories:

RELATED गुजरात कांग्रेस का दावा, अहमदाबाद का नाम बदलने के खिलाफ राज्य की जनता