Kundli Tv- इस मंदिर में कौन करता है भगवान का जलाभिषेक

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हमारे भारत देश में एेसे कई चमत्कारी और रहस्यमयी मंदिर है, जिनके बारे में कम ही लोगों को पता होगा या फिर युं कहें कि इनके रहस्यों के बारे में आज तक शायद ही कोई जान पाया होगा। लोगों का मानना है कि एेसे मंदिरों में होने वाले चमत्कारों के पीछे ईश्वर की ही शक्ति होती है। तो आईए बात करतें हैं एक एेसे शिव मंदिर की जिसमें कोई शक्ति भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करके चली जाती हैं, जिसका आज तक किसी को नहीं पता चला कि वह कौन है जो भगवान का जल अभिषेक करके चला जाता है।


यह मंदिर मध्यप्रदेश के मुरैना की तहसील कैलारस से 25 कि.मी दूर पहाडग़ढ़ के घने जंगलों में ईश्वरा महादेव के नाम से स्थित है। मंदिर के शिवलिंग का अपना ही एक विशेष महत्व है। मान्यता है कि मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त यानि चार बजे के समय कोई शक्ति स्वयं पूजा-अर्चना करने आती हैं। वहां के पुजारी जब सुबह मंदिर के द्वार खोलते हैं तो कोई अद्भुत शक्ति भगवान पर फूल, बेलपत्र, चावल और जल से अभिषेक किया हुआ मिलता है। 

प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच बसे मंदिर के शिवलिंग पर झरने से जलाभिषेक हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी सिद्ध बाबा ने पहाड़ों के बीच शिवलिंग स्थापित कर उनकी तपस्या की थी। तभी से शिवलिंग के शीर्ष पर प्राकृतिक तौर पर झरना भगवान का जलाभिषेक कर रहा है। इस मंदिर को लेकर वहां के लोगों का कहना है कि एक बार इस रहस्य को जानने के लिए एक व्यक्ति ने शिवलिंग के ऊपर हाथ रख लिया था ताकि उसे उस शक्ति का पता चल सके, जो शिव की पूजा करती है, लेकिन तभी अचानक आंधी चली और कुछ समय बाद जब उन्होंने हाथ हटाया तो अदृश्य भक्त शिव का पूजन कर चुका था। किंतु जिस व्यक्ति ने हाथ रखा था वह बाद में कोढ़ी हो गया।

कई लोगों का मानना है कि शिवलिंग की स्थापना रावण के भाई विभीषण द्वारा की गई थी और उन्हें सप्त चिरंजीवियों में से एक माना गया है। इसलिए राजा विभीषण ही यहां भगवान की पूजा करने आते हैं।

एक बार पहाडग़ढ़ रियासत के राजा पंचम सिंह ने अपनी सेना को मंदिर के इर्द-गिर्द लगा दिया था। लेकिन सुबह चार बजे से पहले सब सो गए थे और जब आंख खुली तो मंदिर में पूजा-अर्चना हो चुकी थी। तो इसलिए मंदिर का रहस्य आज भी बरकरार है।
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