कोटखाई की गुड़िया को कब मिलेगा इंसाफ? एक साल बाद भी मर्डर-गैंगरेप की नहीं सुलझी मिस्ट्री

शिमला: शिमला के कोटखाई में ठीक एक साल पहले 6 जुलाई को हैवानियत का शिकार देवभूमि की एक बेटी का शव अर्धनग्न हालत में दांदी जंगल में मिला था। इस घटना से पूरा हिमाचल हिल गया था। जहां 4 जुलाई को एक लड़की स्कूल से घर के लिए चली मगर बीच में न जाने कहां गायब हो गई। दो दिन बाद उसी लाश जंगल के बीचोंबीच मिली। 10वीं कक्षा की इस छात्रा के साथ निर्मम गैंगरेप के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस दरिंदगी पर पूरा प्रदेश आक्रोश से भर गया। हाईकोर्ट की पहल पर जांच सीबीआई को सौंपी गई। 9 महीने की जांच में सीबीआई ने गुड़िया के गुनहगार को तो पकड़ लिया, लेकिन मलाल ये कि एक साल बाद भी गुड़िया के इंसाफ के लिए निगाहें न्याय पर टिकी है। 


पहले पुलिस और अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। सी.बी.आई भले ही एक आरोपी को पकड़ कर मामला सुलझाने का दावा कर चुकी हो लेकिन गुड़िया के परिजनों के जहन में ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब उन्हें अभी तक नहीं मिल पाए हैं। गुड़िया के परिजनों की मानें तो इस वारदात में एक से ज्यादा लोग शामिल हैं। हिमाचल पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी तो हवा का रुख कुछ और था। पुलिस की एस.आई.टी. ने 6 कथित आरोपियों को पकड़ा और मामला सुलझाने का दावा किया। मगर बात उस समय उलझ गई जब कोटखाई पुलिस लॉकअप में पकड़े गए एक कथित आरोपी सूरज की हत्या हो गई। सूरज की हत्या का आरोप एस.आई.टी. ने पकड़े एक अन्य कथित आरोपी राजू पर डाला। जब सी.बी.आई. ने मामले की छानबीन की तो पाया गया कि एस.आई.टी. ने बेगुनाहों को फंसाया और सूरज की हत्या भी पुलिस की पिटाई से हुई।


गुड़िया केस से जुड़े पुलिस लॉकअप सूरज हत्याकांड मामले में आई.जी. जैदी, शिमला के पूर्व एस.पी. डी.डब्ल्यू. नेगी, डी.एस.पी. मनोज जोशी व अन्य 6 पुलिस कर्मी न्यायिक हिरासत में चल रहे हैं। सभी आरोपी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अदालत में चालान भी पेश किया जा चुका है। पूर्व एस.पी. डी. डब्ल्यू. नेगी को छोड़ जांच एजैंसी कोर्ट की अनुमति के बाद सभी आरोपियों के वॉयस सैंपल भी ले चुकी है और इसकी रिपोर्ट भी जांच टीम को मिल चुकी है।


गुड़िया के कातिलों की तलाश में उलझी सीबीआई की जांच भी मुश्किलों में भरी थी। लंबी और थका देने वाली जांच का सिलसिला शुरू हुआ। करीब-करीब 1000 लोगों से पूछताछ की गई। 250 लोगों के डीएनए सैंपल लेकर मिलान कराने की कोशिश की गई। यहां तक कि ये जांच 3 राज्यों तक पहुंची। सीबीआई ने हिमाचल के अलावा उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर की खाक भी छानी। गुड़िया के कातिलों को सुराग देने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 10 लाख रुपए के इनाम देने का भी ऐलान किया है। सी.बी.आई. ने यह ऐलान बीते 20 दिसंबर को अदालत में स्टेट्स रिपोर्ट दायर करने से पहले किया था।


सीबीआई ने बीते 13 अप्रैल को आरोपी अनिल उर्फ नीलू को शिमला जिले के कोटखाई से गिरफ्तार किया था और गुडि़या केस को सुलझाने का दावा किया था। कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में सीबीआई ने कहा कि आरोपी ने दुष्कर्म के बाद गुड़िया की हत्या की। डीएनए और फोरेंसिक जांच रिपोर्टों को इसका आधार बनाया था। सीबीआई का दावा है कि नीलू न तो फोन का इस्तेमाल करता था, न ही कभी बाजार जाता था। इसीलिए उसे पकड़ने में इतना समय लग गया। अपनी बात को सही साबित करने के लिए सीबीआई ने 62 गवाह बनाए हैं। वहीं कोर्ट में नीलू ने कहा कि वह गुनहगार नहीं है और न्याय के लिए लड़ाई लड़ेगा। प्रदेश में जयराम सरकार ने गुड़िया के नाम से एक हैल्पलाइन भी शुरू की है। मुख्यमंत्री ने इसका शुभारंभ किया था। बताया गया है कि हिमाचल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर शुरू की गई मगर गुड़िया आज भी इंसाफ मांग रही है। 

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