इलेक्शन डायरीः जब देसाई ने दी पाकिस्तान को रॉ की गतिविधियों की जानकारी

इलेक्शन डेस्क(नरेश कुमार): दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल के बाद बने पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 1977 में सत्ता में आते ही इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल के दौरान लिए गए कई फैसले पलट दिए और इन फैसलों को पलटने के लिए संविधान में संशोधन तक किए गए लेकिन इंदिरा विरोध में मोरारजी देसाई ने एक ऐसी चूक की जिससे पाकिस्तान को मजबूत होने का मौका मिला। 


यह चूक थी पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल जिया उल हक को पाकिस्तान में भारतीय खुफिया एजैंसी रॉ की सक्रियता के बारे में जानकारी देने की।

दरअसल पाकिस्तान ने 1971 की जंग हारने के बाद जुल्फिकार अली भुट्टो के नेतृत्व में परमाणु हथियारों पर काम करना शुरू किया लेकिन इंदिरा गांधी द्वारा स्थापित की गई रॉ से मोरारजी देसाई इस कदर नफरत करते थे कि उन्होंने न सिर्फ खुफिया एजैंसी चलाने के लिए बजट में कटौती कर दी बल्कि पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल जिया उल हक को बातों-बातों में पाकिस्तान में चल रही रॉ की गतिविधियों और पाकिस्तान द्वारा तैयार किए जा रहे परमाणु हथियारों के बारे में जानकारी दे दी। 

इस जानकारी के बाद पाकिस्तान ने रॉ के एजैंटों को ढूंढ-ढूंढ कर उनका खात्मा किया और बाद में परमाणु परीक्षण किया। इन्हीं परमाणु हथियारों की धौंस दिखा कर पाकिस्तान हमें आए दिन युद्ध की धमकी देता है। हालांकि उस समय मोरारजी देसाई का तर्क था कि भारत पाकिस्तान का बड़ा भाई है और हमें पड़ोसियों से अच्छे संबंध रखने चाहिएं और उनकी जासूसी नहीं करनी चाहिए। देसाई पक्के देशभक्त और गांधीवादी थे लिहाजा उनकी इस चूक को राष्ट्र विरोध के तौर पर नहीं देखा गया लेकिन यह एक ऐसी चूक थी जिसने पाकिस्तान में रॉ को कमजोर करने का काम किया।
 

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