UNSC ने की पुलवामा हमले की निंदा, जैश का भी किया जिक्र

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले पर हुए हमले की निंदा की है। परिषद ने इस हमले को जघन्य और कायराना करार देते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्यों के अनुसार अपराधियों, षडयंत्रकर्ताओं और उन्हें धन मुहैया कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। उसने सभी देशों से अंतर्राष्ट्रीय कानून और सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों के तहत भारत सरकार के साथ सक्रिय सहयोग करने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र की 15 शक्तिशाली देशों की इस इकाई ने अपने बयान में जैश-ए-मोहम्मद का नाम भी लिया। परिषद ने कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्य 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में जघन्य और कायरान तरीके से हुए आत्मघाती हमले की कड़ी निंदा करते हैं जिसमें भारत के अर्धसैनिक बल के 40 जवान शहीद हो गए थे और इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। बयान में आतंकवाद को अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरों में से एक बताया गया है। भारत के प्रस्ताव पर UNSC के P5 देशों (स्थाई सदस्यों) और 10 अस्थाई सदस्यों ने इस हमले की निंदा की, इनमें चीन भी शामिल है। सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने जवानों के पीड़ित परिवारों, घायल लोगों और भारत सरकार के प्रति गहरी सहानुभूति और सांत्वना जाहिर की है।


संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक द्वारा जारी बयान में कहा गया कि महासचिव दक्षिण एशिया में स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। वह 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सुरक्षाबलों पर हुए आतंकी हमले की अपनी कड़ी निन्दा को दोहराते हैं। उन्होंने कहा कि यह कि आवश्यक है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेही तय की जाए और आतंकी कृत्यों के षड्यंत्रकारियों को तत्काल न्याय के कठघरे में लाया जाए। बयान में कहा गया कि महासचिव का विश्वास है कि सभी मुश्किल चुनौतयों का समाधान सार्थक पारस्परिक बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्वक और संतोषजनक ढंग से हो सकता है

नियमित संवाददाता सम्मेलन में यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच वार्ता को प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव से स्वयं प्रक्रिया में शामिल होने को कहा है और क्या वह यह भूमिका निभाने जा रहे हैं, दुजारिक ने कहा कि जहां तक सिद्धांत की बात है...महासचिव का विश्वास है कि सभी मुश्किल चुनौतयों का समाधान सार्थक पारस्परिक बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्वक और संतोषजनक ढंग से हो सकता है। उन्होंने दोहराया कि इसके लिए दोनों पक्षों को महासचिव के समक्ष अनुरोध करना पड़ेगा, चाहे नजरिया कुछ भी हो। 40 सीआरपीएफ कर्मियों की जान लेने वाले पुलवामा हमले के चलते भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बेहद चिंतित हैं।

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