रिपोर्ट में खुलासा: गोलियों से ज्यादा गंदे पानी से मारे जाते हैं बच्चे

जिनेवा: हिंसाग्रस्त देशों में गोलियों से ज्यादा गंदे पानी की वजह से बच्चे मारे जाते हैं। यू.एन. चिल्ड्रंस एमरजैंसी फंड (यूनीसेफ) ने विश्व जल दिवस के मौके पर एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। संयुक्त राष्ट्र की एजैंसी के मुताबिक हिंसा प्रभावित इलाके में बच्चों की स्वच्छ जल स्रोत तक पहुंच सीमित हो जाती है। 

85,700 बच्चे गंदे पानी के कारण मरे
रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 15 साल तक की उम्र के करीब 85,700 बच्चे गंदे पानी के कारण होने वाली बीमारियों जैसे कि डायरिया आदि के कारण मारे जाते हैं जबकि गोलीबारी में 30,900 की मौत हुई। इस तरह 5 साल तक की उम्र के 72,000 बच्चे प्रतिवर्ष दूषित पानी के कारण होने वाली बीमारियों से मारे जाते हैं जबकि युद्ध से संबंधित ङ्क्षहसा में 3,400 की ही मौत हुई। 
यूनिसेफ के एग्जीक्यूटिव डायरैक्टर हेनरायटे फोरे के अनुसार पानी जीवन के लिए जरूरी है लेकिन विश्व में ऐसे कई बच्चे हैं जिन तक पीने का साफ-सुरक्षित पानी पहुंच ही नहीं पाता। यह उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य और जीवन को खतरे में डाल रहा है। अगर स्थिति यही रही तो करीब 600 मिलियन बच्चे (यानी प्रत्येक 4 में से 1) 2040 तक जल संसाधन की बहुत कम मात्रा में गुजारा कर रहे होंगे।

दूषित पानी से मौत का जोखिम 20 गुणा ज्यादा
यूनीसेफ ने इस संबंध में हिंसा प्रभावित 16 देशों में शोध किया। इसमें पाया गया कि 5 साल तक के बच्चों के दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से मौत का जोखिम गोलीबारी से मरने वालों के मुकाबले 20 गुणा ज्यादा है। 

इन देशों में किया अध्ययन
यूनीसेफ ने जिन देशों में अध्ययन किया उनमें अफगानिस्तान,बुर्किना फासो, कैमरून, सैंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, चाड, डैमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथोपिया, ईराक, लीबिया, माली, म्यांमार, सोमालिया, दक्षिणी सूडान, सीरिया और यमन शामिल हैं। 

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