भारत के ट्रेड सरप्लस से चिड़ा अमेरिका, छेड़ सकता है ट्रेड वॉर

नेशनल डेस्कः (मनीष शर्मा) जब से डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से उन्होंने सभी मोर्चों पर ट्रेड वार शुरू कर दिया है। चीन, यूरोपियन यूनियन कनाडा, मेक्सिको आदि देशों के बाद के बाद ट्रम्प के निशाने पर भारत है।  इस साल जून में ट्रंप ने भारत सहित दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर निशाना साधते हुए कहा था, " हम तो ऐसे गुल्लक हैं जिसे हर कोई लूट रहा है। भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों पर 100% शुल्क वसूल रहा है।



भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े
2016 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 114 अरब डॉलर था जिसमे अमेरिका में  भारत के माल के निर्यात का मूल्य $ 46 बिलियन था और भारत में अमेरिका के माल के आयात का मूल्य 21.7 अरब डॉलर था। भारत उन देशों में से एक है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 25 अरब डॉलर से ऊपर था। इस मुद्दे को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके अधिकारी अपने भारतीय समकक्ष के साथ समय-समय पर उठाते रहते हैं।



क्या है ट्रम्प की रणनीति
1. अमेरिका चाहता है कि उसका व्यापार घाटा कम हो इसके लिए वह भारत पर सिविल एयरप्लेन और एनर्जी आदि उत्पादों के ज़्यादा निर्यात के लिए दबाव बना रहा है।
2. इस साल अमेरिका ने स्टील के आयात पर 25 प्रतिशत और एल्यूमीनियम पर 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया। वैसे तो इसका भारत पर असर नहीं होगा क्योंकि भारत अमेरिका को सिर्फ दो फीसदी स्टील आयात करता है। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा कदम उठाने से पहले जो स्टील अमेरिका जा रहा था, वह भारत में भेजा सकता है। वैसे भारत ने भी जवाब में अमेरिका के 29 वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।
3. इस साल मार्च में विश्व व्यापार संगठन में भारत के खिलाफ एक मामला शुरू किया और भारत को गैर-पारस्परिक व्यापार लाभों को रद्द करने की भी धमकी दी, भारत को विकासशील राष्ट्र होने के कारण प्राथमिकता प्रणाली के तहत सुविधा मिलती है।
4. ट्रंप ने हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल पर उच्च आयात शुल्क को लेकर भारत पर निशाना साधा था और इसे अनुचित करार दिया था। जिस पर भारत ने ब्रांडेड मोटरसाइकिल पर 50 फीसदी आयात शुल्क कम कर दिया था।
5. ट्रम्प प्रशासन ने H1B वीजा जारी करने के नियम सख्त कर दिए हैं। इसका सीधा असर भारत से स्किल्ड वर्कर्स को बुलाने में पड़ रहा है।



जब एक बिजनेसमैन राष्ट्रपति बनता है तो उसका मुख्य फोकस व्यापार ही होता है भले ही इस झगड़े में दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतंत्रों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी दांव पर न लग जाए। बेशक, अमेरिका-भारत के बीच व्यापार और निवेश के अलावा रणनीतिक साझेदारी के दूसरे भी रास्ते हैं लेकिन अगर ट्रम्प के लोक-लुभावनवाद के चलते दोनों देशों के आर्थिक आधार को चोट पहुंचती है तो उसका परिणाम एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव से  मुक़ाबला करने की अमरीकी नीति पर भी पड़ेगा।

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