ऑफ द रिकार्डः CBI को लेकर PM मोदी के लिए कठिन समय

नेशनल डेस्कःप्रधानमंत्री की सीबीआई में हमेशा चलती है क्योंकि यह प्रमुख जांच एजैंसी प्रत्यक्ष रूप से उनके तहत है। सी.बी.आई. के निदेशक की नियुक्ति पी.एम. करते हैं यद्यपि भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता निदेशक के चयन के लिए बने ‘कालेजियम’ के सदस्य होते हैं मगर इस बार एक अजीब-सी स्थिति पैदा हो गई है जिस कारण पी.एम. मोदी के लिए कठिन समय है। पहला कारण यह है कि मौजूदा सी.बी.आई. प्रमुख आलोक वर्मा मोदी की बात नहीं सुनते। यद्यपि उनकी नियुक्ति मोदी ने खुद की थी। मोदी उनसे बहुत नाराज हैं और चाहते हैं कि उनकी छुट्टी हो मगर प्रधानमंत्री उनको बर्खास्त नहीं कर सकते क्योंकि उनका 2 वर्ष का निश्चित कार्यकाल है।


मोदी के लिए अच्छी बात यह है कि वह जनवरी में सेवानिवृत्त हो रहे हैं इसलिए सी.बी.आई. के नए निदेशक की तलाश शुरू हो गई है और कार्मिक विभाग ने इस महत्वपूर्ण पद के लिए सम्भावित अधिकारियों का नाम सुझाया है। डी.ओ.पी.टी. भी मोदी के तहत है। हताश सरकार आलोक वर्मा के उत्तराधिकारी के लिए एक विश्वसनीय अधिकारी की तलाश में जुटी हुई है। मौजूदा निदेशक आलोक वर्मा और प्रधानमंत्री कार्यालय (पी.एम.ओ.) के बीच अविश्वास हाल ही के वर्षों में निम्न स्तर पर पहुंच गया है, यहां तक कि वर्मा ने सी.बी.आई. के एक विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ खुली जंग छेड़ रखी है। अस्थाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे विश्वसनीय अधिकारी हैं।

वर्मा और अस्थाना के बीच कटुता इस सीमा तक बढ़ गई है कि वर्मा ने भ्रष्टाचार के केस में कथित रूप से संलिप्त होने के मामले में अस्थाना के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। वर्मा ने अस्थाना के खिलाफ दो पत्र केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सी.वी.सी.) को लिखे हैं। सी.वी.सी. सी.बी.आई. की निगरानी करने वाली संस्था के अलावा यह देखती है कि सी.बी.आई. ने क्या किया है। अब मोदी सरकार अपने विश्वसनीय व्यक्ति को सी.बी.आई. का अगला निदेशक नियुक्त करना चाहती है मगर स्थिति आसान नहीं। भारत के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के मोदी के साथ मधुर संबंध नहीं।

विपक्ष में सबसे बड़ी एकल पार्टी कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े भी मोदी के खिलाफ हैं। ये दोनों उस कालेजियम के सदस्य हैं जो सी.बी.आई. के नए निदेशक का चयन करेगी। इसमें संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी बैठक की अध्यक्षता करेंगे लेकिन पी.एम.ओ. के लिए इस बार सी.बी.आई. निदेशक पद के लिए अपने चहेते का नाम पारित कराना आसान नहीं हो सकता इसलिए मोदी सरकार गम्भीर दुविधा में है कि वह कैसे अपने चहेते अधिकारी को नया सी.बी.आई. प्रमुख नियुक्त करवाए।

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