तेल की बढ़ती कीमतों से जेब पर बढ़ेगा बोझ, महंगी होंगी ये सेवाएं

नई दिल्लीः कच्चे तेल के वैश्विक दाम में तेजी की वजह से घरेलू बाजार में डीजल व पैट्रोल के दाम बढ़ने के बाद परिवहन, खाद्य, मेडिकल उपकरण और आयातित सामान अब जेब पर भारी पड़ने वाले हैं। केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री का कहना है, 'पैट्रोल और डीजल के दाम थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर क्रमश: 5 फीसदी और 3 फीसदी असर डालते हैं।' उन्होंने कहा, 'उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर अप्रत्यक्ष असर मोटे तौर पर प्रत्यक्ष असर का 50 फीसदी होता है। इसमें ट्रांसपोर्ट सेवाएं और वस्तुएं जैसे पेट्रोकेमिकल्स, पेंट्स, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक उत्पाद शामिल हैं।'

परिवहन क्षेत्र की बढ़ेगी लागत
पिछले एक साल में ब्रेंट क्रूड के दाम में 41 फीसदी तेजी आई है और यह पिछले शुक्रवार को 76.7 डॉलर प्रति बैरल रहा। भारत में डीजल और पैट्रोल के दाम में कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी के मुताबिक ही तेजी आई है। तेल विपणन कंपनियां बढ़े हुए दाम का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं और सरकार शुल्क में छूट नहीं दे रही है, जिसकी वजह से कीमतें ज्यादा बनी हुई है। परिवहन क्षेत्र में ईंधन मुख्य इनपुट लागत है, जिसकी वजह से परिचालन लागत बढ़ी है। इस क्षेत्र में अभी अनिश्चितता है कि बढ़ी लागत के बोझ की भरपाई किराया बढ़ाकर होगी या ढुलाई बढ़ने से।

खाद्य वस्तुओं के बढेंगे दाम
जानकारों के अनुसार अगस्त में डीजल के दाम में 2.2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई लेकिन ट्रक रूट पर किराया भी 4 से 5 फीसदी बढ़ गया। ट्रक वालों को फलों, सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की ढुलाई में 15-20 फीसदी बढ़ोतरी से भी मदद मिली है। अगर ट्रक के किराए में बढ़ोतरी जारी रहती है तो खाद्य वस्तुओं के दाम पर भी इसका असर पड़ सकता है। डीजल के दाम में तेजी का तत्काल फलों व सब्जियों के दाम पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे किसानों का मुनाफा खत्म होगा। जैसे किसान के लिए प्रति ट्रक प्याज लाने की लागत 10,000 रुपए थी, जो अब बढ़कर 12,000 से 15,000 रुपए हो गई है। 

 

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