बच गई ब्रिटिश पीएम थरेसा मे की कुर्सी, 24 घंटों में जीत लिया विश्वास प्रस्ताव

लंदनः ब्ब्रेग्जिट समझौते पर हुए मतदान में मंगलवार को बुरी तरह हारने के महज 24 घंटे के अंदर ब्रिटिश संसद में बुधवार को  पेश हुए विश्वास मत प्रस्ताव मे प्रधानमंत्री थरेसा मे को एक बार फिर किस्मत का साथ मिला। सरकार गिरने की तमाम अटकलों के खिलाफ  थरेसा मे ने विश्वास मत जीत कर ब्रेग्जिट समझौते पर सांसदों के बीच आम सहमति बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। विश्वास मत में 325 सांसदों ने मे की सरकार को समर्थन दिया, जबकि 306 वोट उनके विरोध में रहे। इस तरह 19 वोट ज्यादा हासिल करते हुए थरेसा फिलहाल अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहीं। हालांकि, यूरोपीय संघ से ब्रिटेन को बाहर रखने के उनके प्रस्ताव पर आगे क्या होगा, यह स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। 


 ब्रिटेन के यूरोपियन संघ से बाहर निकलने के लिए  अब भी कई सवाल
यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन को अलग करने वाले थरेसा मे के प्रस्ताव पर मंगलवार को संसद वोटिंग हुई थी। ब्रिटिश संसद यानी हाउस ऑफ कॉमन्स में थरेसा मे के समझौते के पक्ष में 202 वोट और विरोध में 432 वोट पड़े थे।यहां तक कि उनकी अपनी कंजर्वेटिव पार्टी के 118 सांसदों ने भी उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद विपक्षी लेबर पार्टी थेरेसा मे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई, जिस पर भारतीय समयानुसार बुधवार देर रात वोटिंग कराई गई जिस में थरेसा मे जीत गईं और उनकी सरकार गिरने का संकट टल गया । 1973 से यूरोपीय यूनियन में ब्रिटेन लेकिन ब्रिटेन के यूरोपियन संघ से बाहर होने का रास्ता अब भी खुला हुआ है। ब्रेग्जिट के लिए कानूनन तय की गई 29 मार्च की तारीख के बीच ब्रिटेन आधी सदी के सबसे गहन संकट में फंसा हुआ हैक्योंकि 1973 में यूरोपियन संघ का हिस्सा बने ब्रिटेन को बाहर निकलने के लिए कई सवालों से जूझना पड़ेगा । 


थरेसा को मिल चुकी इतिहास का सबसे करारी हार
ब्रिटेन ने 1973 में 28 सदस्यीय यूरोपीय संघ की सदस्यता हासिल की थी. उसे 29 मार्च को इस यूनियन से अलग होना है। इसे लेकर ही मे ने एक समझौता पेश किया था।इस समझौते पर उन्हें विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन समेत अपनी पार्टी के सांसदों का विरोध झेलना पड़ा। उनके प्रस्ताव पर जब संसद में वोटिंग हुई तो उन्हें इतिहास की सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा। हाउस ऑफ कामन्स में उनका प्रस्ताव 202 के मुकाबले 432 मतों से गिर गया। यानी 230 वोट का यह अंतर आधुनिक इतिहास में किसी भी ब्रिटिश पीएम की सबसे करारी हार है।

विपक्ष समझौते के खिलाफ
विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन ने थेरेसा मे की हार को विनाशकारी बताते हुए उनके प्रस्ताव पर भी टिप्पणी की। कोर्बिने के थेरेसा के प्रस्ताव को अधकचरा और नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए कहा कि यह समझौता ब्रिटेन के लिए अंधेरे में छलांग लगाने जैसा होगा। थेरेसा की हार के कुछ ही मिनटों बाद जेरेमी कोर्बिन ने थेरेसा मे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान कर दिया। जिसके बाद पूरी दुनिया में यह चर्चा होने लगी कि थरेसा मे की सरकार अब खतरे में है। . तमाम किस्म के कयास लगाए जाने लगे लेकिन अगले ही दिन 24 घंटे बाद जब इस अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई तो जेरेमी कोर्बिन अपने उद्देश्य में विफल हो गए और 325 सांसदों ने थेरेसा मे का समर्थन किया। अब देखना ये है कि ब्रेग्जिट पर क्या समाधान निकल पाता है।

समझौता लाने की चुनौती बरकरार
नियमों के मुताबिक, जब सांसद कोई विधेयक खारिज कर देते हैं, तो प्रधानमंत्री के पास दूसरी योजना के साथ संसद में आने के लिए तीन कामकाजी दिन होते हैं यानी अब अविश्वास प्रस्ताव के संकट से उबरने के बाद थेरेसा मे के सामने ब्रेग्जिट पर एक ऐसा समझौता लाने की चुनौती है, जिस पर पूरी संसद सहमत हो सके और यूरोपीय यूनियन से बाहर होने का ब्रिटेन का रास्ता साफ हो सके।

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