रोती दादी-पोती की तस्वीर 11 साल बाद फिर वायरल, ये हैं पूरी कहानी

अहमदाबाद : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बच्ची और बुजुर्ग महिला के रोते हुए की तस्वीर काफी वायरल हो रही है। फोटो को शेयर करते हुए लोग बता रहे हैं कि यह दादी और पोती हैं जो एक वृद्धाश्रम में मिलीं और एक-दूसरे को देखकर रोने लग गईं। इस तस्वीर को अब तक हजारों लोग शेयर कर चुके हैं। यहां तक कि क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी इसे अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। तस्वीर के साथ ही एक भावनात्मक कहानी भी बताई जा रही है कि स्कूल में पढ़ने वाली एक बच्ची जब वृद्धाश्रम पहुंची तो उसे वहां अपनी दादी मिल गईं। इसके बाद दादी, पोती एक दूसरे से लिपटकर रोने लगीं। बता दें कि यह तस्वीर 11 साल पुरानी यानि कि 2007 की है और जिसने इस फोटो को कैमरे में कैद किया उस फोटोग्राफर का नाम है-कल्पित एस. बचेच। अहमदाबाद के रहने वाले कल्पित एक वरिष्ठ फोटो पत्रकार हैं और पिछले 30 साल से इस प्रोफेशन में हैं।
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उन्होंने बताया कि विश्व फोटोग्राफी दिवस पर 'बीबीसी गुजराती' ने उनसे फोटो की बेस्ट कलेक्शन मांगी थी। उनकी भेजी गई तस्वीरों में यह फोटो भी शामिल थी जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कल्पेश ने बताया कि उन्होंने यह तस्वीर 12 सितंबर 2007 को अहमदाबाद में स्थित एक वृद्धाश्रम में ली थी। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद के मणिनगर में एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल का प्रबंधन अपने 30-40 बच्चों को मणिनगर में स्थित एक वृद्धाश्रम ले गया था। बतौर फोटोग्राफर वो भी तब वहां पहुंचे थे। वृद्धाश्रम में एक तरफ बच्चियां बैठी थीं और एक तरफ महिलाएं। कल्पित ने बताया कि तब मैंने सुझाव दिया कि बच्चियां और महिलाएं एक-दूसरे के पास आएं और मिले। तभी कुछ ही देर में वहां एक अजीब दृष्य देख सब हैरान रह गए।

एक औरत एक बच्ची को देखकर जोर-जोर से रोने लग गई। जिस बच्ची को देखकर महिला रो रही थी वो उस बुजुर्ग के पास गई और उनसे लिपट गई। दोनों काफी देर तक रोते रहे। कल्पित ने कहा कि उन्होंने उस महिला से पूछा कि क्या हुआ 'बा', आप क्यों रोई तो उस महिला ने बताया कि यह बच्ची उनकी पोती है। यह सुनकर सब लोग सन्न रह गए। तभी बच्ची ने बताया कि उसने अपने घरवालों से पूछा था कि दादी कहां गई है तो उन्होंने उसे बताया कि दादी उनके एक रिश्तेदार के घर रहने गई है।

कल्पित ने बताया कि यह तस्वीर और दादी-पोती की कहानी उस समय भी अखबार में छपी थी। तब भी इस पर काफी हलचल हुई थी और कई न्यूज चैनल के पत्रकार तब आश्रम पहुंच गए थे लेकिन तब बा अपना दर्द छुपा गई और कहा कि वे अपनी मर्जी से वृद्धाश्रम में है। कल्पित ने कहा कि कुछ दिन बाद अखबार में खबर आई कि उस बुजुर्ग महिला को उनके घरवाले ले गए हैं। लेकिन करीब दो साल बाद जब कल्पित फिर उस आश्रम में गए तो वो बुजुर्ग महिला उन्हें वहीं पर मिली थी। 

 

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