एकेडमिक काउंसिल पास करेगी, तभी लागू होगा सीबीसीएस कोर्स

नई दिल्ली :  दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षिक मामलों को देखने वाली स्थायी समिति(स्टैंडिंग कमेटी) की बैठक में कहा गया कि पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज में यूजीसी के निर्देशों को स्वीकार करते हुए चयन आधारित क्रेडिट पद्धति(सीबीसीएस)के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करके इसे स्टैंडिंग कमेटी के बाद एकेडमिक कांउसिल में पास करने के बाद ही लागू किया जा सकता है। बैठक में विभिन्न विभागों में पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर पढ़ाये जाने वाले लगभग 30से अधिक विषयों को पास किया गया।
बैठक शुरू होने से पहले कमेटी के सदस्यों ने सुझाव दिया है कि पोस्ट ग्रेजुएट दो वर्षीय पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक विभाग ने अपने अलग-अलग क्रेडिट दिए है। चार सेमेस्टर में चलने वाले यह कोर्स सभी विषयों में बराबर क्रेडिट हो। साथ ही विभाग अपने छात्रों को विकल्प चुनने के लिए, अपने विभाग या अन्य विभागों से कोर्स चुन सकते हैं।

 

कमेटी के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने एम.ए हिंदी के पाठ्यक्रम के अंतर्गत कमेटी से कहा है कि वह छात्रों के लिए ऐसा कोर्स डिजाइन करे जो भविष्य में छात्रों के लिए लाभदायक सिद्ध हो। साथ ही छात्रों को अन्य विभागों से पाठ्यक्रम चुनने की पूरी आजादी हो तभी सीबीसीएस के साथ न्याय हो पायेगा। स्टैंडिंग कमेटी में सीबीसीएस के अंतर्गत एमए दो वर्षीय पाठ्यक्रम में पास हुए पाठ्यक्रमों में एमए इंग्लिश, एमए हिंदी, एमए पर्सियन, एमए सायकोलॉजी, एमए एप्लाइड सायकोलॉजी, एमए पंजाबी ,एमए रशियन ,एमए उर्दू, एमए अरेबिक, मास्टर ऑफ लायब्रेरी साइंस, बीए जर्मन स्टरडी, बीए फ्रेंच स्टडी, बीए इटेलियन स्टडी ,बैचलर ऑफ लायब्रेरी साइंस आदि में अंडर ग्रेजुएट स्तर पर कुछ बदलाव किया है।

 

कुछ अन्य विषयों को भी पास किया गया,जिसमें एमए संस्कृत, एमए बुद्धिस्ट स्टडीज, एमए लाइफ लॉन्ग लर्निंग एंड एक्सटेंशन, एमए इटेलियन, एमए फ्रेंच, एमए जर्मनी, एमए हिस्पेनिक,एमए—फिलॉसफी, एमए बंगाली, एमए तमिल, एमए, कम्प्रेटिव इंडियन लिट्रेचर ,एमए ईस्ट एसीयेन स्टरडी, एमए भूगोल,एम ए पॉलिटिकल साइंस ,एमए सोशल वर्क के अलावा विभिन्न कॉलेजों /विभागों में चलाए जा रहे पार्ट टाइम सर्टिफिकेट कोर्स को भी मंजूरी दी गई। 

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