UN में सुषमा की पाक को दो टूक : किसी को आतंकवाद का समर्थन करने की छूट नहीं

न्यूयॉर्क :भारत ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा है कि जब दुनिया कई तरह के संघर्षों का सामना कर रही है तब किसी भी देश को आतंकवाद का समर्थन करने और उसे संरक्षण देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने न्यूयॉर्क में आयोजित नेल्सन मंडेला शांति शिखर सम्मेलन में अपने एक वक्तव्य में यह बात कही।

स्वराज ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि हमारी दुनिया अभी भी कई तरह के संघर्षों, आतंकवाद और घृणास्पद विचारधाराओं से घिरी हुई है जो अपनी सीमाओं से आगे बढ़ रही है और हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है, इसलिए किसी को भी आतंकवाद का समर्थन करने और उसे संरक्षण देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। विदेश मंत्री ने वैश्विक परिवार के रूप में राष्ट्रों की समानता के‘सामूहिक अस्तित्व’की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नेल्सन मंडेला जैसे अग्रणी नेताओं की बुद्धिमत्ता हमारे नैतिक आदर्श बने रहने चाहिए।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि आइए इस ग्रह को एक साथ साझा कर अपने बच्चों के लिए एक वैश्विक परिवार की तरह बेहतर दुनिया बनाते हैं। विदेश मंत्री की ओर से बिना किसी देश का नाम लिए आतंकवाद पर दिया गया यह बयान ऐसे समय में आया है जब अभी कुछ दिनों पहले 21 सितंबर को भारत ने पाकिस्तान के साथ न्यूयॉर्क में होने वाली विदेश मंत्री स्तर की वार्ता को रद्द करने की घोषणा की थी।

भारत ने सुरक्षाकर्मियों की बर्बर हत्या के अलावा पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को गौरवान्वित करने के लिए उन पर 30 डाक टिकट जारी किए जाने के बाद वार्ता रद्द करने का यह फैसला लिया था। भारत ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बीच होने वाली इस वार्ता को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि बुरहान वानी पर डाक टिकट जारी करने से वार्ता के पीछे पाकिस्तान के नापाक इरादे सामने आ गये हैं और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का असली चेहरा भी सामने आ गया है। उनकी कथनी और करनी में भारी अंतर है।

भारतीय विदेश मंत्री 29 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगी। स्वराज ने अपने संबोधन में नेल्सन मंडेला को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत गर्व से मंडेला को भारत रत्न कहता है। उनके (मंडेला) द्वारा दिए गए क्षमा एवं करुणा के साथ-साथ सामाजिक समावेश के मूल्यों की अब दुनिया को सबसे अधिक आवश्यकता है। गौरतलब है कि नेल्सन मंडेला को वर्ष 1990 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान‘भारत रत्न’से सम्मानित किया गया था।

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